इंदौर TI इंद्रमणि पटेल पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश, किसी भी थाने में टीआई पटेल हस्तक्षेप करते हैं तो सीपी होंगे जिम्मेदार

Sanjay Gupta | Jan 15, 2026, 14:38 IST
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इंदौर के चर्चित चंदनगर टीआई इंद्रमणि पटेल को हटाने का सुप्रीम कोर्ट का औपचारिक आदेश गुरुवार को आया। आदेश में सख्त टिप्पणी की गई है। क्या है आदेश में... चलिए बताते हैं

NEWS IN SHORT

  • टीआई इंद्रमणि पटेल स्टाक/पाकेट गवाह बनाने के मामले में फंसे हैं।
  • एक आरोपी पर उन्होंने चार की जगह आठ केस भी बताए थे, इसमें सुनवाई जारी है।
  • इसके पहले भी एक आरोपी के बेटे को थाने में हथकड़ी लगाकर बैठाने पर हाईकोर्ट ने तीखी टिप्पणी की थी।
  • सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की टिप्पणी का भी हवाला दिया और कहा कि इसके बाद याचिका वापस हो गई, इसलिए हम यह आदेश दे रहे हैं।

NEWS IN DETAIL

INDORE. इंदौर के चर्चित चंदनगर टीआई इंद्रमणि पटेल को हटाने के संबंध में मौखिक आदेश देने के बाद सुप्रीम कोर्ट का औपचारिक आर्डर गुरुवार को आ गया है। इसमें सख्त टिप्पणी की गई है। हालांकि मौखिक आदेश के बाद तत्काल उन्हें लाइन अटैच किया जा चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने कई अहम बातें इस आदेश में कही हैं।



आरोपी अनवर हुसैन पर सुप्रीम कोर्ट का औपचारिक आदेश आ गया है। आरोपी अनवर पर चार की जगह आठ केस बनाने और 176 केस में चिन्हित पाकेट गवाह को पेश करने के मामले में यह आदेश आया है।



इस आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि आदेश का इंतजार नहीं करते हुए तत्काल टीआई को लाइन अटैच किया जाए। साथ ही उन्हें अगले आदेश तक किसी भी जांच/पर्यवेक्षण/पुलिस स्टेशन में तैनाती का कोई भी दायित्व नहीं सौंपा जाए।



तो फिर सीपी होंगे जिम्मेदार

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में कहा है कि सुनवाई के दौरान आए तथ्यों से साफ है। कोर्ट ने कहा कि प्रतिवादी संख्या 4, यानी टीआई पटेल के खिलाफ अंतरिम आदेश जरूरी है।



इसके अलावा, अगर प्रतिवादी संख्या 4, टीआई पटेल के जरिए किसी भी पुलिस स्टेशन में किसी भी मामले में हस्तक्षेप करने की कोशिश की जाती है, तो प्रतिवादी संख्या 5, यानी इंदौर पुलिस कमिश्नर (संतोष सिंह) इसके लिए खुद जिम्मेदार होंगे। उन्हें इस कोर्ट के सामने जवाब देना होगा। इस आदेश के लागू होने का इंतजार किए बिना ही इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी जाए और यह काम तुरंत किया जाए।



हाईकोर्ट के आदेश का भी दिया उदाहरण

सुप्रीम कोर्ट ने इंदौर में आकाश तिवारी केस में हाईकोर्ट के आदेश की भी बात की। इस मामले में चंदनगर के एक आरोपी के नहीं मिलने पर उसके पुत्र को ही गिरफ्तार कर लिया था। साथ ही, उसे हथकड़ी लगाकर थाने में 30 घंटे बैठाया था।



सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब हम टीआई के आचरण की जांच कर रहे हैं, तब हाईकोर्ट इंदौर में भी एक अलग याचिका में 4 दिसंबर 2012 की यह टिप्पणी भी सामने आई। इसमें सीपी को इन पर कार्रवाई के लिए निर्देश दिया गया। वहीं, बाद में याचिका वापस हो गई। इसलिए हमें लगता है कि इसमें तत्काल निर्देश देने की जरूरत है। हालांकि यह साफ है कि यह आदेश अंतरिम है।





सीपी का शपथपत्र और एडिशनल डीसीपी की भूमिका देखेंगे

सुप्रीम कोर्ट में पुलिस के जरिए इस मामले में शपथपत्र पेश किया गया है। इस केस में सीपी, एडिशनल डीसीपी दिक्षेष अग्रवाल और टीआई पटेल तीनों को ही पक्षकार बनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में लिखा कि सीपी द्वारा पेश शपथपत्र और एडिशनल डीसीपी की भूमिका पर अगली सुनवाई 3 फरवरी को की जाएगी।



उल्लेखनीय है कि आरोपी अनवर हुसैन के अधिवक्ता रितम खरे ने इस शपथपत्र पर आपत्ति ली है। साथ ही, इसे सुप्रीम कोर्ट की आंखों में धूल झोंकने वाला बताया है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी चूक में यह सब खानापूर्ति की गई है।



सुप्रीम कोर्ट क्यों हुआ पाकेट गवाह पर सख्त

सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार केसों में एक ही गवाह को पेश करने पर आपत्ति ली है। आदेश में कहा है कि- प्रथम दृष्टया, प्रतिवादी संख्या 4 ने कथित अपराधों के पुलिस संस्करणों के समर्थन में उन्हीं गवाहों का बार-बार उपयोग किया है। साथ ही, अनुमति दी है। अर्थात् रखे हुए गवाहों का, एक ऐसी प्रथा जो जांच की निष्पक्षता और तटस्थता की जड़ तक जाती है। साथ ही, हमारे जैसे कानून के शासन के जरिए शासित देश के लिए अभिशाप मानी जा सकती है।



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पाकेट या स्टाक विटनेस हाल के समय में तेजी से बढ़ता जा रहा है। इसमें किसी थाने में तय लोग, जो पहले से परिचित होते हैं, उन्हें कई मामलों में गवाह बना दिया जाता है। इससे प्राकृतिक न्याय ही खत्म हो जाता है। चंदनगर केस में भी 176 मामलों में से 35 गवाह बार-बार सामने आए, खासकर सलमान और आमिर नाम के दो गवाह जो कई केसों में पेश हुए।



अब आगे क्या?

यह मामला सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर प्रकृति का माना है। इसे लेकर लगातार सुप्रीम कोर्ट ने तीखी टिप्पणियां की हैं। लेकिन इसके बाद भी पुलिस अपने अधिकारियों को खासकर टीआई को बचाने में जुटी रही।



जैसे हाईकोर्ट इंदौर के आदेश के बाद भी सीपी ने टीआई पर कोई कार्रवाई नहीं की। इस मामले में सीपी और एडिशनल डीसीपी को भी आगे जवाब देना है। साथ ही टीआई पटेल कब तक थाने से दूर रहेंगे, यह भी आगे अंतिम आदेश में तय होगा।



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