इंदौर में चुनाव आयोग और नगर निगम की वोटर लिस्ट में झोल, अकेले दो सीटों पर 30 हजार नामों का हेरफेर!

Aman Vaishnav | Oct 18, 2026, 12:09 IST
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इंदौर वोटर लिस्ट में चुनाव आयोग और निगम सूची के आंकड़ों में बड़ा अंतर
इंदौर वोटर लिस्ट में चुनाव आयोग और निगम सूची के आंकड़ों में बड़ा अंतर

इंदौर में केंद्रीय चुनाव आयोग और नगर निगम की वोटर लिस्ट में नाम कटने को लेकर बड़ा अंतर सामने आया है। फरवरी 2026 में हुए SIR के बाद इंदौर की 9 विधानसभा सीटों से 3 लाख 80 हजार 298 वोटर्स के नाम काटे गए थे। वहीं जब इसी आधार पर नगर निगम की वोटर लिस्ट अपडेट की गई, तो उसमें सिर्फ 2 लाख 87 हजार 259 नाम ही कम हुए।

इंदौर वोटर लिस्ट का मामला

हैरानी की बात यह है कि सिर्फ पांच महीने में दोनों वोटर लिस्ट के आंकड़ों में बड़ा अंतर सामने आया है। 26 फरवरी को केंद्रीय निर्वाचन आयोग (Central Election Commission) ने अपनी अंतिम सूची जारी की थी।

इसमें इंदौर के 9 विधानसभा क्षेत्रों से 3 लाख 80 हजार 298 वोटर्स के नाम हटाए गए थे। वहीं नगर निगम की लिस्ट अपडेट हुई, तो सिर्फ 2 लाख 87 हजार 259 नाम ही हटाए गए। यानी दोनों लिस्ट के आंकड़ों में 93 हजार 39 वोटर्स का अंतर है।

विधानसभा के हिसाब से आंकड़ों का बड़ा अंतर

जब अलग-अलग विधानसभा सीटों के आंकड़े देखते हैं, तो यह अंतर और साफ नजर आता है। इंदौर-3, इंदौर-4 और इंदौर-5 पूरी तरह शहरी इलाके हैं। वहीं इंदौर-1, इंदौर-2 और राऊ के कुछ हिस्से ग्रामीण और मिले-जुले इलाके हैं। अगर सिर्फ पूरी तरह शहरी वार्डों वाली सीटों की बात करें, तो दोनों सूचियों में हटाए गए नामों का अंतर 36 हजार 356 है।

विधानसभावार आंकड़ों का पूरा विवरण इस प्रकार है...

  • विधानसभा 1: नगर निगम की सूची से 65 हजार 557 नाम हटे। जबकि एसआईआर में 69 हजार 844 नाम कटे थे। यहां कुल 4 हजार 287 नामों का अंतर मिला है।
  • विधानसभा 2: नगर निगम सूची से 67 हजार 844 नाम कटे। जबकि एसआईआर में 62 हजार 426 नाम हटाए गए थे। यहां 5 हजार 418 नामों का फर्क है।
  • विधानसभा 3: निगम की लिस्ट से 32 हजार 536 नाम हटाए गए। एसआईआर में 34 हजार 693 नाम कटे थे। यहां 2 हजार 157 नामों का अंतर दर्ज हुआ है।
  • विधानसभा 4: नगर निगम सूची से केवल 18 हजार 358 नाम हटाए गए। एसआईआर में 33 हजार 89 नाम काटे गए थे। यहां का अंतर 14 हजार 731 वोटर्स का है।
  • विधानसभा 5: निगम सूची में 62 हजार 443 नाम हटाए। एसआईआर के दौरान 77 हजार 642 नाम कटे थे। यहां दोनों सूचियों में 15 हजार 199 वोटों का अंतर है।
  • राऊ विधानसभा: नगर निगम की सूची से 32 हजार 193 नाम कटे। एसआईआर में 40 हजार 521 नाम हटाए थे। यहां 8 हजार 328 नामों का अंतर सामने आया है।
चुनाव आयोग का बड़ा फैसला: 17 राज्यों में वोटर लिस्ट का विशेष सारांश पुनरीक्षण (SSR) शुरू, SIR विवाद के बीच अहम कदम | Election Commission's Big Decision: Special Summary Revision (SSR) of Voter List to Begin in 17 States Amidst SIR Controversy
SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, मध्य प्रदेश समेत 17 राज्यों में बदलेगी वोटर लिस्ट
17 Oct 2026 ,
By Sandeep Kumar
SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग ने बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SSR कराने की तैयारी शुरू की है। इनमें मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश भी शामिल हैं। वोटर लिस्ट संशोधन के लिए 1 जनवरी 2027 की तारीख निर्धारित की गई है। इस प्रक्रिया में नए मतदाताओं के नाम जोड़े जाएंगे। मौजूदा सूची की गलतियों में भी सुधार किया जाएगा।
SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग ने बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SSR कराने की तैयारी शुरू की है। इनमें मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश भी शामिल हैं। वोटर लिस्ट संशोधन के लिए 1 जनवरी 2027 की तारीख निर्धारित की गई है। इस प्रक्रिया में नए मतदाताओं के नाम जोड़े जाएंगे। मौजूदा सूची की गलतियों में भी सुधार किया जाएगा।

सबसे बड़ा खेल विधानसभा 4 और 5 में दिखा

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सबसे ज्यादा चौंकाने वाली स्थिति इंदौर विधानसभा-4 और विधानसभा-5 में देखने को मिली है।

विधानसभा-4 का गणित

यहां एसआईआर के दौरान 33 हजार 89 वोटर्स के नाम सूची से हटा दिए गए थे। जब नगर निगम की सूची सामने आई, तो उसमें सिर्फ 18 हजार 358 नाम ही कटे मिले। यानी सीधे तौर पर 14 हजार 731 वोटर्स का फर्क आ गया। इसे वार्ड के हिसाब से देखें, तो हर वार्ड में औसतन 1,133 वोटर्स का बड़ा अंतर आ रहा है।

विधानसभा-5 का गणित

यहां केंद्रीय आयोग की एसआईआर सूची के तहत 77 हजार 642 मतदाताओं के नाम हटाए गए थे। इसके उलट नगर निगम की सूची में सिर्फ 62 हजार 443 नाम ही कम किए गए। यानी यहां भी 15 हजार 199 वोटों का भारी अंतर रह गया।

अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब दोनों आयोगों की वोटर लिस्ट का आधार एक ही एसआईआर अभियान था, तो फरवरी से जुलाई के बीच महज पांच महीने में इतना बड़ा अंतर कैसे आ गया?

नाम कटने के मामले में टॉप 4 जिले

पूरे प्रदेश में वोटर्स के नाम कटने के मामले में चार प्रमुख जिले सबसे आगे रहे हैं। इन चारों जिलों में कुल मिलाकर 13 लाख 69 हजार 881 (13.69 लाख से अधिक) वोटर्स के नाम कटे हैं।

इनका कारणवार ब्योरा नीचे दिया गया है...

  • यहां कुल 4 लाख 39 हजार 871 नाम कटे। इसमें 43 हजार 741 मृतक थे।
  • 1 लाख 97 हजार 898 शिफ्टेड और 1 लाख 75 हजार 424 गैरहाजिर थे।
  • 22 हजार 808 दोहरी प्रविष्टि वाले नाम शामिल थे।

भोपाल

  • यहां कुल 4 लाख 36 हजार 131 नाम हटाए गए। इसमें 33 हजार 791 मृतक थे।
  • 2 लाख 86 हजार 666 शिफ्टेड और 1 लाख 1,503 गैरहाजिर थे।
  • 14 हजार 171 दोहरी प्रविष्टि वाले मामले थे।

ग्वालियर

  • यहां कुल 2 लाख 46 हजार 538 नाम कटे। इसमें 27 हजार 852 मृतक थे।
  • 1 लाख 48 हजार 273 शिफ्टेड और 61 हजार 520 गैरहाजिर थे।
  • 8 हजार 893 दोहरी प्रविष्टि के मामले रहे।

जबलपुर

  • यहां कुल 2 लाख 47 हजार 341 नाम हटाए गए। इसमें 51 हजार 357 मृतक थे।
  • 1 लाख 15 हजार 437 शिफ्टेड और 66 हजार 678 गैरहाजिर थे।
  • 13 हजार 869 दोहरी प्रविष्टि वाले नाम थे।

राज्य स्तर पर बढ़े 27.40 लाख मतदाता

वहीं अगर हम पूरे राज्य के स्तर पर देखें तो वहां भी एक बड़ा बदलाव सामने आया है। एसआईआर पूरा होने के बाद राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या अंतिम प्रकाशन में 5.39 करोड़ दर्ज की गई थी। इसमें 2.79 करोड़ पुरुष और 2.60 करोड़ महिला मतदाता शामिल थीं।

इसके बाद जब राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) ने अपनी अंतिम रिपोर्ट जारी की, तो उसमें कुल मतदाताओं की संख्या 5.67 करोड़ दर्ज पाई गई। अगर हम एसआईआर के आंकड़ों से इसकी तुलना करें, तो राज्य निर्वाचन आयोग की रिपोर्ट में करीब 27.40 लाख मतदाता बढ़ गए हैं।

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