भागीरथपुरा कांड- वर्षों पहले ही हो गया था दूषित जल का खुलासा, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने निगम को 3 बार लिखे पत्र, लेकिन ध्यान नहीं दिया

Rahul Dave | Jan 02, 2026, 13:04 IST
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इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के बाद अब एक बड़ा खुलासा हुआ है। सालों पुरानी रिपोर्ट में ये सामने आया था कि शहर के 59 इलाकों का पानी... नीचे पढ़ें पूरी खबर

INDORE. भागीरथपुरा में दूषित जल से एक बाद एक मौत होने लगी। इसके बाद नगर निगम सहित अन्य जिम्मेदार विभागों के अधिकारी और जनप्रतिनिधि जागे। जबकि वर्षों पहले ही इसका खुलासा हो गय था कि यहां का पानी पीने योग्य नहीं है।



प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 59 जगहों पर दूषित पानी के लिए निगम को तीन पत्र लिखे। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने इस गंभीर समस्या पर कोई ध्यान नहीं दिया।



समय रहते नहीं उठाया ठोस कदम

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि शहर के 60 में से 59 जगहों का पानी पीने के लायक नहीं था। इसके बावजूद न तो नगर निगम ने कोई कदम उठाया, और न ही जिम्मेदार लोगों ने समय रहते इसे ठीक करने की कोशिश की। इन इलाकों में भागीरथपुरा भी शामिल था।



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2019 में सामने आई थी जांच रिपोर्ट

पीसीबी की यह रिपोर्ट 2016-17 और 2017-18 में लिए गए पानी के सैंपलों पर आधारित थी। इसकी जांच रिपोर्ट 2019 में सामने आई थी।



6-7 साल पहले ही जानकारी मिल गई थी

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तीन बार लिखे पत्र

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बस रिपोर्ट जारी कर अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। 2022 तक इंदौर नगर निगम को तीन बार पत्र लिखकर चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि इन इलाकों का पानी बिना उपचार किए इस्तेमाल करना खतरनाक है।



भोपाल तक अवगत कराया

जब नगर निगम ने इन चेतावनियों को भी नजरअंदाज कर दिया, तब पीसीबी के क्षेत्रीय कार्यालय ने कदम उठाया। उन्होंने सेंट्रल ग्राउंड वॉटर बोर्ड, भोपाल को भी इस गंभीर स्थिति से अवगत कराया। इसके बावजूद न तो जल आपूर्ति बंद हुई, न वैकल्पिक व्यवस्था की गई और न ही दूषित स्रोतों को सील किया गया।



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टाली जा सकती थी जानलेवा स्थिति

आज जब भागीरथपुरा में मौतें हो रही हैं, तब यह सवाल उठना लाजिमी है। उस वक्त कार्रवाई होती, तो क्या यह जानलेवा स्थिति टाली नहीं जा सकती थी?



पीसीबी की जांच में यह आया था

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सीधे घरों तक पहुंच रहा गंदा पानी

जांच में कुछ चौंकाने वाला मामला सामने आया। जिन इलाकों से सैंपल लिए गए थे, वे या तो कान्ह नदी के आसपास थे या सीवेज लाइनों के बेहद करीब स्थित थे। गंदा पानी भूमिगत जलस्रोतों में मिलकर सीधे लोगों के घरों तक पहुंच रहा था।



59 इलाकों में पीने योग्य पानी नहीं

पीसीबी की रिपोर्ट में ये सामने आया था कि भागीरथपुरा की गलियां, खातीपुरा, रामनगर, खजराना रोड और आसपास के इलाकों का पानी पीने लायक नहीं है। इसके अलावा, सांवेर रोड, परदेशीपुरा, जूनी इंदौर, निरंजनपुर, सदर बाजार और बड़ा गणपति इलाके का पानी भी पीने के लिए सुरक्षित नहीं है।



क्यों नहीं हुई रिपोर्ट पर कार्रवाई ?

भागीरथपुरा में हो रही मौतें सिर्फ एक इलाके की त्रासदी नहीं हैं। पूरे इंदौर के लिए चेतावनी हैं। यह प्रशासनिक लापरवाही, जिम्मेदारी से भागने और समय पर फैसले न लेने का नतीजा है। सवाल यह नहीं कि रिपोर्ट कब आई थी, सवाल यह है कि उस रिपोर्ट पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि अब भी जवाबदेही तय नहीं हुई, तो अगला भागीरथपुरा कहां होगा?



59 स्थानों पर सैंपल फेल

मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के लैब प्रभारी अतुल कोटिया ने बताया कि शहर के 59 स्थानों से पानी के सैंपल लिए गए थे। इन सभी सैंपलों की विस्तृत जांच कराई गई है।



इनमें 59 स्थानों के सैंपल फेल निकले थे। इसके बाद नगर निगम को तीन पत्र लिखे थे, वहीं सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड, भोपाल को भी अवगत कराया था।



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