इंदौर यशवंत क्लब: 20 साल बाद टूटा पम्मी-टोनी का दबदबा, तीसरा व्यक्ति बना चेयरमैन

Sanjay Gupta | Jun 29, 2026, 12:23 IST
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इंदौर यशवंत क्लब
इंदौर यशवंत क्लब

इंदौर के यशवंत क्लब चुनाव में जैन पैनल ने जीत दर्ज की है। जितेन्द्र उर्फ जीतू जैन 65 वोटों से चेयरमैन चुने गए। इसके साथ ही 20 साल बाद क्लब को पम्मी छाबड़ा और टोनी सचदेवा के वर्चस्व से हटकर नया चेहरा मिला है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • यशवंत क्लब चुनाव में जैन पैनल ने मैनेजिंग कमेटी के चारों प्रमुख पद जीते हैं।
  • जितेन्द्र उर्फ जीतू जैन 65 वोटों से चेयरमैन चुने गए।
  • 20 साल बाद क्लब को पम्मी छाबड़ा और टोनी सचदेवा के अलावा नया चेयरमैन मिला है।
  • कार्यकारिणी के पांच में से चार पद जैन पैनल और एक पद पम्मी पैनल के खाते में गए हैं।
  • कोई भी सदस्य लगातार दो बार चेयरमैन बनने के बाद तीसरी बार चुनाव नहीं लड़ सकता है।
इंदौर यशवंत क्लब चुनाव के नतीजे रविवार, 28 जून की देर रात आए। मैनेजिंग कमेटी के चारों पद जैन पैनल के खाते में गए।

कार्यकारिणी के पांच में से चार पदों पर भी जैन पैनल ने जीत दर्ज की। केवल एक पद पम्मी पैनल के खाते में गया।

इसके साथ ही क्लब 20 साल बाद परमजीत सिंह उर्फ पम्मी छाबड़ा और मनजीत उर्फ टोनी सचदेवा के वर्चस्व से बाहर निकल आया। वहीं चेयरमैन और सचिव पद पर करीबी हार हुई।

इसके बाद माना जा रहा है कि चार साल के कार्यकाल के दौरान सचदेवा और सचिव संजय गोरानी ने जो नए 100 सदस्य बनाए थे, वे पम्मी गुट को भारी पड़ गए।

हर चुनाव में पम्मी या टोनी ही जीते

बीते 20 साल का रिकॉर्ड रहा है कि चेयरमैन पद पर जीत या तो पम्मी छाबड़ा की हुई या फिर टोनी सचदेवा की। वहीं इस बार वरिष्ठ सदस्य जितेन्द्र उर्फ जीतू जैन ने पम्मी छाबड़ा को 65 वोटों से हरा दिया। मतगणना के पांच राउंड में से चार राउंड में जीतू जैन बढ़त बनाए रहे।

इस तरह चुनाव में जीतते रहे पम्मी या टोनी

  • साल 2006 में चुनाव जीतकर डॉ. हेमंत डोसी चेयरमैन बने थे।
  • साल 2008 में टोनी सचदेवा चेयरमैन बने थे।
  • साल 2010 और 2012 में लगातार दो बार पम्मी छाबड़ा चेयरमैन चुने गए थे। इसके साथ ही वे लगातार दो चुनाव जीतने वाले क्लब के पहले सदस्य बने थे।
  • साल 2014 में टोनी सचदेवा ने चुनाव जीता था।
  • साल 2016 में फिर टोनी सचदेवा चेयरमैन बने थे।
  • साल 2018 में पम्मी छाबड़ा चेयरमैन चुने गए थे। इसके बाद 2020 में कोविड के कारण चुनाव नहीं हुए और उनकी कमेटी का कार्यकाल दो साल बढ़ गया। इस तरह वे 2018 से 2022 तक चेयरमैन रहे।
  • वहीं साल 2022 में टोनी सचदेवा चेयरमैन बने थे।
  • साल 2024 में फिर टोनी सचदेवा चेयरमैन चुने गए थे।
  • अब 2026 में पम्मी छाबड़ा की हार के बाद जितेन्द्र जैन ने चेयरमैन पद की कमान संभाल ली है।

क्लब के संविधान में अहम प्रावधान

क्लब के संविधान में प्रावधान है कि किसी भी पद पर लगातार दो बार चुनाव जीतने के बाद सदस्य तीसरी बार उसी पद का चुनाव नहीं लड़ सकता है। उसे एक कार्यकाल का ब्रेक देना होता है। इसी कारण लगातार दो बार चेयरमैन रहने के बाद वर्ष 2026 में टोनी सचदेवा चेयरमैन पद का चुनाव नहीं लड़े।

1992 में पहली बार चेयरमैन बने थे टोनी

टोनी सचदेवा पहली बार 1992 में चेयरमैन बने थे। उस समय चेयरमैन का कार्यकाल एक साल का था। इसके बाद वे 1998 में फिर चेयरमैन बने, तब कार्यकाल दो साल का हो चुका था।

इसके बाद 2004, 2008, 2014, 2016, 2022 और 2024 में भी टोनी ने चेयरमैन पद का चुनाव जीता।

साल 2026 के चुनाव में ये सभी जीते

चेयरमैन पद पर जितेन्द्र उर्फ जीतू जैन, सचिव पद पर विजय कस्तूरी, सह-सचिव पद पर तेजवीर जुनेजा और कोषाध्यक्ष पद पर रूपल पारिख विजयी रहे। ये सभी जैन पैनल के उम्मीदवार हैं।

कार्यकारिणी के पांच पदों में जैन पैनल के गुनीत सिंह चड्ढा, राजेश तलवार, वैभव दुआ और भारती बरोडिया ने जीत दर्ज की। वहीं पम्मी पैनल से विकास थम्मन चुनाव जीतने वाले एकमात्र उम्मीदवार रहे।

100 वोट पड़ गए भारी

क्लब ने हर साल 25-25 नए सदस्य बनाते हुए कुल 100 सदस्य बनाने का प्रस्ताव पास किया था। टोनी सचदेवा और संजय गोरानी की टीम ने यह सदस्य बनाए।

पम्मी की जीतू जैन से हार 65 वोटों से हुई और अतुल सेठ की सचिव पद पर विजय कस्तूरी से हार केवल 53 वोटों से हुई। ऐसे में माना जा रहा है कि नए सौ सदस्य दोनों को भारी पड़ गए।

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