हाईकोर्ट से राहत के बाद नए मामले में गिरफ्तारी
अधारताल थाना प्रभारी विपिन ताम्रकार के मुताबिक, शमीम कबाड़ी उर्फ मोहम्मद शमीम खान (Shamim Khan) को आदर्श नगर से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस मामले में उसका रिमांड लेने की तैयारी कर रही है।
2019 में पासपोर्ट निरस्त, 2022 में नागपुर से बनवाया नया पासपोर्ट
अधारताल थाना प्रभारी विपिन ताम्रकार ने बताया कि शमीम का पहला पासपोर्ट मध्यप्रदेश से बना था, जिसे उसके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों के चलते वर्ष 2019 में निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद वर्ष 2022 में उसने कथित तौर पर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर नागपुर के क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय से नया पासपोर्ट बनवाया। पुलिस (Jabalpur Police) का आरोप है कि इस प्रक्रिया में उसने अपनी पहचान से जुड़ी कुछ जानकारियां छिपाईं और नए दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। बाद में एक आपराधिक मामले की जांच के दौरान फरार होने के बाद उसने इसी पासपोर्ट से विदेश यात्रा भी की।
धोखाधड़ी और कूटरचना की धाराओं में केस दर्ज
पुलिस के अनुसार, पासपोर्ट से जुड़े दस्तावेजों की जांच के दौरान कुछ तथ्य सामने आए। इसके बाद शमीम के खिलाफ पासपोर्ट अधिनियम की संबंधित धाराओं के साथ ही धोखाधड़ी और अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया। ये धाराएं धोखाधड़ी, मूल्यवान दस्तावेजों की जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल जैसे आरोपों से जुड़ी हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि पासपोर्ट बनवाने के लिए किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया था और इस प्रक्रिया में किसी अन्य व्यक्ति ने उसकी मदद की थी या नहीं।
क्या जबलपुर के दस्तावेजों से बना पासपोर्ट?
शमीम ने पासपोर्ट बनवाने के लिए
जबलपुर के दस्तावेज लगाए थे या किसी दूसरे स्थान के दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था, यह फिलहाल जांच का विषय है। थाना प्रभारी ने बताया कि इस संबंध में अभी पर्याप्त तथ्य जुटाए जाने बाकी हैं। शमीम से पूछताछ के बाद दूसरे संभावित आरोपियों की भूमिका भी सामने आ सकती है। पुलिस ने फिलहाल उसकी गिरफ्तारी की पुष्टि की है। अन्य लोगों की भूमिका सामने आने पर उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
2024 में कबाड़ गोदाम में हुआ था भीषण ब्लास्ट
शमीम कबाड़ी का नाम जबलपुर के खजरी-खिरिया बायपास स्थित रजा मेटल इंडस्ट्रीज के कबाड़ गोदाम में हुए भीषण विस्फोट (Jabalpur Blast Case) के बाद सुर्खियों में आया था। 25 अप्रैल 2024 को हुए इस धमाके में दो लोगों, भोलाराम भूमिया और मोहम्मद खलील, की मौत हो गई थी, जबकि दो अन्य लोग घायल हुए थे। धमाका इतना तेज था कि इसकी आवाज आसपास के कई किलोमीटर के इलाके में सुनाई दी थी। घटनास्थल से बम के खोखे और शेल मिलने के बाद विस्फोटक सामग्री की मौजूदगी को लेकर जांच शुरू हुई थी।
गोला-बारूद के स्क्रैप के असुरक्षित भंडारण का लगा था आरोप
पुलिस की जांच में आरोप लगाया गया था कि गोदाम में आयुध निर्माणी खमरिया की लॉन्ग प्रूफ रेंज से जुड़े नष्ट किए गए गोला-बारूद और विस्फोटक पदार्थ रखे गए थे। इनके असुरक्षित भंडारण और रखरखाव को हादसे की वजह माना गया। इस मामले में अधारताल थाने में अपराध क्रमांक 513/2024 के तहत केस दर्ज हुआ था। मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 304, 120-B और 212 के साथ विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई थीं। जांच के दौरान बम निरोधक दस्ते, आयुध निर्माणी की टीम और एनएसजी ने घटनास्थल से नमूने जुटाए थे।
ब्लास्ट मामले में हाईकोर्ट ने क्यों दी थी राहत?
कबाड़खाना ब्लास्ट मामले में शमीम खान ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर और आपराधिक कार्रवाई को चुनौती दी थी। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने उसकी याचिका स्वीकार करते हुए एफआईआर और उस पर आधारित आपराधिक कार्रवाई निरस्त कर दी थी। अदालत के सामने पेश रिकॉर्ड के अनुसार, संबंधित फैक्ट्री के स्वामित्व, जीएसटी, बिजली और अन्य दस्तावेजों में फहीम खान का नाम दर्ज था। हाईकोर्ट ने माना कि उपलब्ध रिकॉर्ड से शमीम का परिसर और कारोबार से सीधा संबंध स्थापित नहीं हो पाया। केवल पारिवारिक संबंध के आधार पर उसके खिलाफ गैरइरादतन हत्या की धारा लगाना पर्याप्त नहीं माना गया।
दो साल की फरारी के बाद अब पासपोर्ट मामले में पुलिस की पूछताछ
ब्लास्ट मामले में गिरफ्तारी से बचने के दौरान शमीम के विदेश जाने और फिर भारत लौटने का घटनाक्रम अब पासपोर्ट जांच के केंद्र में है। पुलिस के मुताबिक, उसके नए पासपोर्ट की जानकारी पहले ही सामने आ गई थी और इसकी जांच की जा रही थी। अब गिरफ्तारी के बाद पुलिस यह पता लगाएगी कि कथित फर्जी दस्तावेज कहां तैयार हुए थे, पासपोर्ट हासिल करने में किसने मदद की थी और विदेश यात्रा के दौरान किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया था। फिलहाल पुलिस की जांच शमीम के पासपोर्ट और उससे जुड़े दस्तावेजों पर केंद्रित है।