फर्जी बीमा-रजिस्ट्रेशन केस में तारीखों का खेल, EOW जांच में दोषी रोहित खटवानी, फिर भी गिरफ्तारी नहीं
News in short
EOW जांच में फर्जी दस्तावेज और धोखाधड़ी के आरोप सिद्ध, फिर भी आरोपी आज़ाद
जिला अदालत से अग्रिम जमानत पहले ही हो चुकी है खारिज
हाईकोर्ट में अब तक आठ बार हुई सुनवाई, हर बार टली
कभी EOW तो कभी आरोपी पक्ष मांग रहा समय
गिरफ्तारी न होने से जांच एजेंसी की भूमिका पर उठे सवाल
News in detail
जबलपुर के चर्चित फर्जी बीमा और फर्जी रजिस्ट्रेशन मामले में जांच एजेंसी की भूमिका सवालों में घिरती नजर आ रही है। EOW की जांच में आरोपी रोहित खटवानी के खिलाफ आरोप सिद्ध हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद उसकी गिरफ्तारी नहीं हुई है। हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका पर अब तक आठ सुनवाई हो चुकी हैं और हर बार किसी न किसी कारण से मामला टलता जा रहा है।
फर्जी बीमा से खुला घोटाला, जांच में साबित हुआ अपराध
जबलपुर के खटवानी सेल्स एंड सर्विसेज से जुड़ा यह मामला तब सामने आया जब एक वाहन दुर्घटना के बाद बीमा क्लेम के दौरान दस्तावेज फर्जी पाए गए। जांच में सामने आया कि वाहन के बीमा और रजिस्ट्रेशन से जुड़े दस्तावेजों में हेराफेरी की गई थी।
मामले की शिकायत के बाद आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने जांच शुरू की और अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट में रोहित खटवानी को दोषी पाया। फॉरेंसिक जांच में यह भी साबित हुआ कि फर्जी दस्तावेज उसी कंपनी के कंप्यूटर और प्रिंटर से तैयार किए गए थे। लेकिन उसके बाद भी पहले तो उसकी गिरफ्तारी नहीं हुई और अब जब वह हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका लगा चुका तो वहां पर भी ईओडब्ल्यू बैक डोर से उसकी मदद कर रहा है।
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जमानत खारिज, फिर भी गिरफ्तारी नहीं
EOW की जांच के बाद रोहित खटवानी ने जिला अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया था, लेकिन अदालत ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए दिसंबर 2025 में उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी।
सामान्यतः संज्ञेय अपराध में अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाती है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ। आरोपी खुलेआम घूमता रहा और गिरफ्तारी की कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई।
शुरू हुआ ‘तारीखों का सिलसिला’
जिला अदालत से राहत न मिलने के बाद रोहित खटवानी ने 11 दिसंबर 2025 को जबलपुर हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की। इस मामले की पहली सुनवाई 7 जनवरी 2026 को जस्टिस संदीप एन. भट्ट की अदालत में हुई। उस दिन EOW के अधिवक्ता ने यह कहते हुए समय मांगा कि उन्हें केस डायरी अभी प्राप्त हुई है और बहस की तैयारी के लिए समय चाहिए। अदालत ने मामले को 14 जनवरी 2026 के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
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अदालत ने दी आखिरी चेतावनी
14 जनवरी को सुनवाई के दौरान EOW की ओर से फिर समय मांगा गया। इस पर अदालत ने आखिरी अवसर देते हुए मामले को 19 जनवरी 2026 के लिए तय कर दिया। लेकिन 19 जनवरी को आरोपी पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता किसी अन्य अदालत में व्यस्त होने का हवाला देकर सुनवाई टालने की मांग करने लगे।
अदालत ने इस पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जब मामला सूची में क्रमांक दो पर लगा हो, तो इस तरह सुनवाई टालने को प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद अदालत ने अगली सुनवाई 16 फरवरी तय कर दी।
फिर टली सुनवाई, फिर बढ़ी तारीख
16 फरवरी 2026 को अधिवक्ताओं के अदालती कार्यों से विमुक्त रहने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी और अगली तारीख 23 फरवरी तय की गई। 23 फरवरी को आरोपी पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता ने फिर समय मांग लिया और मामला 25 फरवरी के लिए टल गया।
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दो हफ्ते की और मोहलत, फिर भी फैसला नहीं
25 फरवरी को आरोपी के अधिवक्ता ने अदालत से दो सप्ताह का और समय मांगा, जिसके बाद मामला 13 मार्च 2026 के लिए सूचीबद्ध हुआ। इस दिन यह मामला सूची में सबसे ऊपर, यानी क्रमांक एक पर लगा था, लेकिन इस बार भी दोनों पक्षों की ओर से और समय मांगा गया। इसके बाद अदालत ने अगली सुनवाई 31 मार्च 2026 तय कर दी।
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EOW मेहरबान, आरोपी निडर, उठ रहे बड़े सवाल
पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब जांच एजेंसी अपनी रिपोर्ट में आरोपी को दोषी सिद्ध कर चुकी है, तब भी उसकी गिरफ्तारी क्यों नहीं की गई। अदालत में लगातार तारीखें बढ़ती जा रही हैं और हर सुनवाई पर या तो EOW की ओर से समय मांगा जाता है या फिर आरोपी पक्ष सुनवाई टाल देता है।
कानूनी जानकारों का कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे जांच एजेंसी ने आरोपी को अग्रिम जमानत लेने तक का पूरा समय दे रखा है। यही कारण है कि जांच में आरोप सिद्ध होने के बावजूद आरोपी रोहित खटवानी अदालत में तारीख पर तारीख का खेल खेलता नजर आ रहा है और अब इस पूरे मामले में EOW की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।