डिप्टी सीएम देवड़ा के बंगले पर नोटों की बारिश, युवा कांग्रेस का अनोखा प्रदर्शन
Sanjay Dhiman | Aug 26, 2026, 19:39 IST
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मध्य प्रदेश में 600 करोड़ की गड़बड़ी पर युवा कांग्रेस ने डिप्टी सीएम देवड़ा के बंगले पर नोट उड़ाकर प्रदर्शन किया। पुलिस ने हिरासत में लिया, अब तक 59 FIR दर्ज।
मध्य प्रदेश में सरकारी खजाने से 600 करोड़ रुपए गायब हुए। युवा कांग्रेस ने डिप्टी सीएम देवड़ा के बंगले पर प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने प्रतीकात्मक नोट हवा में उड़ाए। पुलिस ने कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। मामले में अब तक 59 FIR दर्ज हो चुकी हैं।
मध्य प्रदेश की राजनीति में बुधवार को अचानक हलचल मच गई। युवा कांग्रेस कार्यकर्ता डिप्टी सीएम के बंगले जा पहुंचे। कार्यकर्ता सरकारी खजाने में हुई गड़बड़ी के खिलाफ गुस्सा जाहिर करना चाहते थे। देखते ही देखते यह प्रदर्शन बड़े विवाद में बदल गया।
बुधवार दोपहर करीब 2 बजे कार्यकर्ता जगदीश देवड़ा के बंगले पहुंचे। उनके हाथों में नकली नोटों की गड्डियां थीं। प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक परमार इस प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे।
कार्यकर्ता नोट लेकर बंगले के अंदर जाना चाहते थे। पुलिस ने उन्हें गेट पर ही रोक लिया। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने गुस्से में नोट हवा में उड़ा दिए।
बंगले के बाहर सड़क पर देर तक नोट बिखरे रहे। आसपास मौजूद लोगों ने इसका वीडियो बनाया। पुलिस ने कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर टीटी नगर थाने भेज दिया।
अभिषेक परमार ने वित्त विभाग पर बड़ा आरोप लगाया। उनका कहना था कि सरकारी खजाने में करीब 600 करोड़ रुपए की गड़बड़ी हुई है। परमार ने कहा कि जांच में सिर्फ छोटे कर्मचारियों को पकड़ा गया।
उन्होंने कहा कि जिम्मेदार बड़े अधिकारी अब भी बचे हुए हैं। परमार ने चेतावनी दी कि वित्त मंत्री पर कार्रवाई न होने पर आंदोलन और तेज होगा। उन्होंने अगले चरण में मंत्री के मुंह पर कालिख पोतने की बात भी कही।
उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने प्रदर्शन पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने भारतीय मुद्रा का अपमान किया है। देवड़ा के मुताबिक नोटों को पैरों के नीचे फेंका गया।
उन्होंने कहा कि यह हरकत कांग्रेस की सोच को उजागर करती है। गड़बड़ी के मुद्दे पर देवड़ा ने सफाई भी दी। उनका कहना था कि यह मामला वित्त विभाग के सॉफ्टवेयर ने खुद पकड़ा।
देवड़ा के मुताबिक वित्त विभाग के सिस्टम ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI – Artificial Intelligence) की मदद से गड़बड़ी पकड़ी। इसके बाद संबंधित मामलों में FIR (First Information Report) दर्ज कराई गई। उन्होंने कहा कि रिकवरी की प्रक्रिया भी लगातार जारी है।
देवड़ा ने भरोसा दिलाया कि दोषी अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा। मामले की जांच कोष एवं लेखा संचालनालय की स्टेट फाइनेंशियल इंटेलिजेंस सेल (SFIC – State Financial Intelligence Cell) कर रही है। रिपोर्टों के अनुसार यह गड़बड़ी पिछले पांच वर्षों में हुई है।
जांच में अब तक 59 FIR दर्ज हो चुकी हैं। 400 से ज्यादा अधिकारी-कर्मचारी जांच के दायरे में हैं। सरकारी राशि कई मामलों में निजी खातों में ट्रांसफर पाई गई।
कुछ मामलों में पैसा अधिकारियों के परिजनों और करीबियों के खातों तक पहुंचा। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 305 करोड़ रुपए के 199 ट्रांजैक्शन संदिग्ध मिले। यह रकम सीधे निजी बैंक खातों में गई।
इसके अलावा करीब 293 करोड़ रुपए में भी गड़बड़ी मिली। यह राशि नियमानुसार ट्रेजरी के पर्सनल डिपॉजिट खातों में रहनी थी। लेकिन इसे दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया गया।
कांग्रेस लगातार वित्त मंत्री और सरकार को घेर रही है। पार्टी का कहना है कि इतनी बड़ी गड़बड़ी निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। विपक्ष प्रशासनिक जवाबदेही की मांग कर रहा है।
वहीं सरकार का कहना है कि गड़बड़ी उसकी अपनी तकनीकी व्यवस्था से पकड़ में आई। सरकार के मुताबिक FIR, जांच और रिकवरी की कार्रवाई लगातार चल रही है। जांच पूरी होने तक मामले में नए तथ्य सामने आते रहने की उम्मीद है।
आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी घमासान और बढ़ सकता है। दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं। आम जनता की नजर अब जांच रिपोर्ट और असली दोषियों पर टिकी है।
600 करोड़ की गड़बड़ी का मामला अब सिर्फ प्रशासनिक नहीं रह गया है। यह मध्य प्रदेश की सियासत का बड़ा मुद्दा बन चुका है। युवा कांग्रेस का यह प्रदर्शन आने वाले समय में और तेज हो सकता है।
विपक्ष इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है। सत्तारूढ़ पार्टी पर पारदर्शिता को लेकर लगातार दबाव बढ़ रहा है। वहीं सरकार अपनी जांच प्रक्रिया को मजबूत सबूत के तौर पर पेश कर रही है।
आम लोगों के लिए यह मामला भरोसे का सवाल भी है। सरकारी खजाने की सुरक्षा हर नागरिक से जुड़ा विषय होता है। ऐसे में जांच की रफ्तार और नतीजों पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।
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मध्य प्रदेश की राजनीति में बुधवार को अचानक हलचल मच गई। युवा कांग्रेस कार्यकर्ता डिप्टी सीएम के बंगले जा पहुंचे। कार्यकर्ता सरकारी खजाने में हुई गड़बड़ी के खिलाफ गुस्सा जाहिर करना चाहते थे। देखते ही देखते यह प्रदर्शन बड़े विवाद में बदल गया।
नोटों से भरा प्रदर्शन
कार्यकर्ता नोट लेकर बंगले के अंदर जाना चाहते थे। पुलिस ने उन्हें गेट पर ही रोक लिया। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने गुस्से में नोट हवा में उड़ा दिए।
बंगले के बाहर सड़क पर देर तक नोट बिखरे रहे। आसपास मौजूद लोगों ने इसका वीडियो बनाया। पुलिस ने कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर टीटी नगर थाने भेज दिया।
कांग्रेस का आरोप
उन्होंने कहा कि जिम्मेदार बड़े अधिकारी अब भी बचे हुए हैं। परमार ने चेतावनी दी कि वित्त मंत्री पर कार्रवाई न होने पर आंदोलन और तेज होगा। उन्होंने अगले चरण में मंत्री के मुंह पर कालिख पोतने की बात भी कही।
देवड़ा का पलटवार
उन्होंने कहा कि यह हरकत कांग्रेस की सोच को उजागर करती है। गड़बड़ी के मुद्दे पर देवड़ा ने सफाई भी दी। उनका कहना था कि यह मामला वित्त विभाग के सॉफ्टवेयर ने खुद पकड़ा।
कैसे पकड़ी गई गड़बड़ी
देवड़ा ने भरोसा दिलाया कि दोषी अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा। मामले की जांच कोष एवं लेखा संचालनालय की स्टेट फाइनेंशियल इंटेलिजेंस सेल (SFIC – State Financial Intelligence Cell) कर रही है। रिपोर्टों के अनुसार यह गड़बड़ी पिछले पांच वर्षों में हुई है।
अब तक क्या सामने आया
कुछ मामलों में पैसा अधिकारियों के परिजनों और करीबियों के खातों तक पहुंचा। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 305 करोड़ रुपए के 199 ट्रांजैक्शन संदिग्ध मिले। यह रकम सीधे निजी बैंक खातों में गई।
इसके अलावा करीब 293 करोड़ रुपए में भी गड़बड़ी मिली। यह राशि नियमानुसार ट्रेजरी के पर्सनल डिपॉजिट खातों में रहनी थी। लेकिन इसे दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया गया।
सरकार बनाम विपक्ष
वहीं सरकार का कहना है कि गड़बड़ी उसकी अपनी तकनीकी व्यवस्था से पकड़ में आई। सरकार के मुताबिक FIR, जांच और रिकवरी की कार्रवाई लगातार चल रही है। जांच पूरी होने तक मामले में नए तथ्य सामने आते रहने की उम्मीद है।
आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी घमासान और बढ़ सकता है। दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं। आम जनता की नजर अब जांच रिपोर्ट और असली दोषियों पर टिकी है।
प्रदेश की राजनीति पर असर
विपक्ष इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है। सत्तारूढ़ पार्टी पर पारदर्शिता को लेकर लगातार दबाव बढ़ रहा है। वहीं सरकार अपनी जांच प्रक्रिया को मजबूत सबूत के तौर पर पेश कर रही है।
आम लोगों के लिए यह मामला भरोसे का सवाल भी है। सरकारी खजाने की सुरक्षा हर नागरिक से जुड़ा विषय होता है। ऐसे में जांच की रफ्तार और नतीजों पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।
यह खबरें भी पढ़ें...
एमपी बीजेपी की ओरछा बैठक में Gen-Z पर फोकस, 2028 से पहले बनेगी नई रणनीति
सोफिया कुरैशी केस में कांग्रेस आक्रामक, जीतू पटवारी ने की कैबिनेट बर्खास्त करने की मांग
खत्म होगा 30 साल पुराना विवाद! अब एमपी विधानसभा में PSC से होंगी अफसरों की भर्तियां
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