5 साल में 2 कंपनी और 12 बार बदली डेडलाइन, फिर भी अधूरा जयपुर का सिविल लाइंस रेलवे ब्रिज
Raghvendra Singh Rathore | Oct 08, 2026, 17:21 IST
अधूरा पड़ा सिविल लाइंस ओवरब्रिज
जयपुर में सिविल लाइंस क्षेत्र में बन रहा ओवरब्रिज अभी भी पांच साल बाद अधूरा है, जिससे स्थानीय लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। निर्माण कंपनियों की अनियोजित देरी के चलते यह कार्य पूरा नहीं हो पाया है। जयपुर विकास प्राधिकरण ने अब इसके समापन की तारीख को दिसंबर 2026 निर्धारित किया है।
Jaipur: जयपुर के सिविल लाइंस में जनता को रेलवे फाटक के जाम से राहत देने के लिए बनाया जा रहा ओवरब्रिज पांच साल बाद भी अधूरा है। दो निर्माण कंपनियां बदल चुकी हैं। दोनों पर देरी के कारण जुर्माना लग चुका है। पुल पूरा करने की तारीख बार-बार आगे बढ़ाई गई, लेकिन लोगों को अब तक राहत नहीं मिली। अब जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने दिसंबर 2026 तक काम पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
करीब 75 करोड़ रुपए की स्वीकृत लागत वाले इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी कीमत आम जनता चुका रही है। पहले के ट्रैफिक अनुमानों के अनुसार, इस मार्ग से रोज करीब 20 हजार वाहन गुजरते थे। रेलवे फाटक बंद होने और निर्माण के चलते लोगों को वैकल्पिक रास्तों से निकलना पड़ रहा है। कई वाहन चालकों को दो से तीन किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है।
The Sootr को मिली ताजा तस्वीरों से भी स्पष्ट है कि पुल पर निर्माण कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है। सवाल यह है कि करोड़ों रुपए की परियोजना में पांच साल बाद भी जनता को राहत क्यों नहीं मिल सकी?
सिविल लाइंस आरओबी की योजना पर वर्ष 2012 से काम चल रहा था। वर्ष 2017 में परियोजना का शिलान्यास हुआ। उस समय करीब 630 मीटर लंबे पुल की अनुमानित लागत 40 करोड़ रुपए बताई गई थी।
बाद में ट्रैफिक की जरूरतों के अनुसार डिजाइन बदला गया। पुल को चार लेन का बनाने और इसकी लंबाई बढ़ाने का फैसला हुआ। दिसंबर 2020 में परियोजना को करीब 75 करोड़ रुपए की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति मिली।
जेडीए ने जनवरी 2021 में निर्माण के लिए 35.77 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, 10 अप्रैल 2021 को निर्माण शुरू हुआ। उस समय परियोजना की कुल लागत 75.05 करोड़ रुपए थी।
जेडीए ने पहले निर्माण का ठेका एमडी इंजीनियर्स एंड कॉन्ट्रैक्टर्स को दिया था। कंपनी को करीब डेढ़ साल में काम पूरा करना था। लेकिन अक्टूबर 2022 तक निर्माण की प्रगति करीब 10 प्रतिशत ही बताई गई। काम बंद होने के बाद जेडीए ने एजेंसी को नोटिस दिए। आखिरकार जनवरी 2023 में उससे काम वापस ले लिया गया।
सरकार ने विधानसभा में बताया कि पहली निर्माण एजेंसी पर 3 करोड़ 32 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया और उसे प्रतिबंधित किया गया।
पहली एजेंसी को हटाने के बाद जेडीए ने शिवम कॉनडेव प्राइवेट लिमिटेड को निर्माण का जिम्मा सौंपा। मई 2023 में कंपनी को 40.06 करोड़ रुपए का वर्क ऑर्डर जारी हुआ। काम पूरा करने की तारीख 11 अगस्त 2024 तय की गई।
यह समयसीमा भी निकल गई। सरकार ने विधानसभा में बताया कि दूसरी कंपनी पर भी देरी के लिए 32 लाख 91 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया।
इसके बाद दिसंबर 2024, वर्ष 2025 और वर्ष 2026 में निर्माण पूरा करने के अलग-अलग लक्ष्य सामने आए। अब जेडीए ने दिसंबर 2026 तक पुल तैयार करने की समयसीमा बताई है।
इस प्रोजेक्ट में देरी की वजह केवल निर्माण एजेंसियां नहीं रहीं। पुल की डिजाइन, रेलवे क्रॉसिंग के पास ऊंचाई तय करने, बीसलपुर पाइपलाइन शिफ्ट करने और जमीन अधिग्रहण से जुड़ी बाधाएं भी सामने आईं।
दूसरी निर्माण कंपनी ने भी जेडीए को पत्र लिखकर जरूरी ड्रॉइंग और तकनीकी मंजूरी नहीं मिलने की समस्या उठाई थी।
जनवरी 2026 में जयपुर विकास आयुक्त सिद्धार्थ महाजन ने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने जमीन अधिग्रहण से जुड़े कानूनी मामलों में प्रभावी पैरवी करने और प्रोजेक्ट की बाधाएं दूर करने के निर्देश दिए।
अब सवाल यह है कि जब पुल की योजना वर्षों पहले बन चुकी थी, तो निर्माण के दौरान डिजाइन और जमीन से जुड़ी समस्याएं क्यों सामने आती रहीं? इन समस्याओं के कारण हुई देरी की जिम्मेदारी किसकी है?
जेडीए के प्रोजेक्ट रिकॉर्ड के अनुसार, सिविल लाइंस रेलवे फाटक 24 घंटे में 100 से ज्यादा बार बंद होने का आंकड़ा दर्ज है। यह रेलवे क्रॉसिंग जयपुर-दिल्ली और जयपुर-सवाई माधोपुर रेलमार्ग पर स्थित है।
इसी परेशानी को दूर करने के लिए जैकब रोड से जमनालाल बजाज मार्ग तक चार लेन का आरओबी बनाया जा रहा है। इसकी प्रस्तावित लंबाई 706 मीटर और चौड़ाई 17.10 मीटर है। पुल तैयार होने के बाद रेलवे फाटक पर रुकने वाले वाहन चालकों को सीधा रास्ता मिलेगा। आसपास की सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव भी कम होने की उम्मीद है।
करीब 700 मीटर लंबे पुल का लगभग 600 मीटर हिस्सा तैयार हो चुका था। करीब 100 मीटर निर्माण बाकी है। रेलवे ट्रैक के ऊपर स्पान लगाने का काम भी अधूरा है। कुल 17 स्पान में से 13 लगाए जाने की जानकारी दी गई थी। रेलवे वाले हिस्से में स्टील गर्डर लगाने का काम महत्वपूर्ण चरण है।
निर्माण पूरा होने से पहले जेडीए ने 1 अक्टूबर 2026 को सिविल लाइंस आरओबी क्षेत्र में रेन वाटर हार्वेस्टिंग और रिचार्ज शाफ्ट बनाने का नया टेंडर जारी किया है।
इसकी अनुमानित लागत 29 लाख 96 हजार 644 रुपए है। इसमें तीन साल तक रखरखाव भी शामिल है। टेंडर जमा करने की अंतिम तारीख 12 अक्टूबर और खोलने की तारीख 16 अक्टूबर तय की गई है। 24.70 करोड़ खर्च होने की जानकारी दी थी, अब नया हिसाब जरूरी
राजस्थान विधानसभा में सरकार ने बताया था कि सिविल लाइंस आरओबी पर उस समय तक 24.70 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके थे। यह पुराना सरकारी आंकड़ा है। अक्टूबर 2026 तक निर्माण पर कुल कितना भुगतान हुआ है, इसका नया विवरण उपलब्ध नहीं है।
दो कंपनियों को काम सौंपने, ठेका बदलने और निर्माण में देरी के बाद परियोजना की वर्तमान कुल लागत क्या है, यह भी जेडीए को स्पष्ट करना होगा। साथ ही दोनों एजेंसियों पर लगाए गए जुर्माने की वसूली की स्थिति भी सामने आनी चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 27 मार्च 2026 को सिविल लाइंस आरओबी में देरी पर राज्य सरकार को घेरा था।
गहलोत ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री आवास से करीब 100 मीटर दूर निर्माणाधीन प्रोजेक्ट लोगों के लिए एक्सीडेंट जोन बन गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मुख्यमंत्री आवास के पास विकास कार्य की यह स्थिति है, तो प्रदेश के दूसरे इलाकों का क्या हाल होगा। गहलोत ने मौजूदा सरकार पर प्रोजेक्ट को लेकर सुस्ती बरतने का आरोप भी लगाया था।
जेडीए की अधिशासी अभियंता अनुपमा के बयान के अनुसार, विभाग का प्रयास निर्माण जल्द पूरा करने का है। परियोजना की आधिकारिक समयसीमा दिसंबर 2026 तक बढ़ाई गई है। सिविल लाइंस आरओबी की देरी अब केवल निर्माण का मामला नहीं है। इसका सीधा संबंध लोगों के समय, ट्रैफिक की परेशानी और सरकारी पैसे के इस्तेमाल से है।
दो निर्माण एजेंसियों पर जुर्माना लगने के बाद भी पुल पूरा नहीं हुआ। ऐसे में सवाल है कि देरी के लिए विभागीय स्तर पर किसकी जिम्मेदारी तय हुई? अब तक कितना पैसा खर्च हुआ और दिसंबर तक पुल पर यातायात शुरू करने के लिए क्या ठोस योजना है? पांच साल से लोग जिस राहत का इंतजार कर रहे हैं, उसका जवाब अब जेडीए को देना होगा।
करीब 75 करोड़ रुपए की स्वीकृत लागत वाले इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी कीमत आम जनता चुका रही है। पहले के ट्रैफिक अनुमानों के अनुसार, इस मार्ग से रोज करीब 20 हजार वाहन गुजरते थे। रेलवे फाटक बंद होने और निर्माण के चलते लोगों को वैकल्पिक रास्तों से निकलना पड़ रहा है। कई वाहन चालकों को दो से तीन किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है।
The Sootr को मिली ताजा तस्वीरों से भी स्पष्ट है कि पुल पर निर्माण कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है। सवाल यह है कि करोड़ों रुपए की परियोजना में पांच साल बाद भी जनता को राहत क्यों नहीं मिल सकी?
2017 में 40 करोड़ का अनुमान, 2021 में 75 करोड़ की लागत से शुरू हुआ काम
बाद में ट्रैफिक की जरूरतों के अनुसार डिजाइन बदला गया। पुल को चार लेन का बनाने और इसकी लंबाई बढ़ाने का फैसला हुआ। दिसंबर 2020 में परियोजना को करीब 75 करोड़ रुपए की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति मिली।
जेडीए ने जनवरी 2021 में निर्माण के लिए 35.77 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, 10 अप्रैल 2021 को निर्माण शुरू हुआ। उस समय परियोजना की कुल लागत 75.05 करोड़ रुपए थी।
पहली कंपनी काम पूरा नहीं कर सकी, 3.32 करोड़ का जुर्माना
सरकार ने विधानसभा में बताया कि पहली निर्माण एजेंसी पर 3 करोड़ 32 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया और उसे प्रतिबंधित किया गया।
दूसरी कंपनी भी डेडलाइन पर काम पूरा नहीं कर सकी
यह समयसीमा भी निकल गई। सरकार ने विधानसभा में बताया कि दूसरी कंपनी पर भी देरी के लिए 32 लाख 91 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया।
इसके बाद दिसंबर 2024, वर्ष 2025 और वर्ष 2026 में निर्माण पूरा करने के अलग-अलग लक्ष्य सामने आए। अब जेडीए ने दिसंबर 2026 तक पुल तैयार करने की समयसीमा बताई है।
ठेकेदार ही नहीं, जेडीए की तैयारी पर भी सवाल
दूसरी निर्माण कंपनी ने भी जेडीए को पत्र लिखकर जरूरी ड्रॉइंग और तकनीकी मंजूरी नहीं मिलने की समस्या उठाई थी।
जनवरी 2026 में जयपुर विकास आयुक्त सिद्धार्थ महाजन ने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने जमीन अधिग्रहण से जुड़े कानूनी मामलों में प्रभावी पैरवी करने और प्रोजेक्ट की बाधाएं दूर करने के निर्देश दिए।
अब सवाल यह है कि जब पुल की योजना वर्षों पहले बन चुकी थी, तो निर्माण के दौरान डिजाइन और जमीन से जुड़ी समस्याएं क्यों सामने आती रहीं? इन समस्याओं के कारण हुई देरी की जिम्मेदारी किसकी है?
100 से ज्यादा बार बंद होता है रेलवे फाटक
इसी परेशानी को दूर करने के लिए जैकब रोड से जमनालाल बजाज मार्ग तक चार लेन का आरओबी बनाया जा रहा है। इसकी प्रस्तावित लंबाई 706 मीटर और चौड़ाई 17.10 मीटर है। पुल तैयार होने के बाद रेलवे फाटक पर रुकने वाले वाहन चालकों को सीधा रास्ता मिलेगा। आसपास की सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव भी कम होने की उम्मीद है।
700 मीटर के पुल में करीब 100 मीटर काम बाकी
अक्टूबर में 29.96 लाख रुपए का नया टेंडर
इसकी अनुमानित लागत 29 लाख 96 हजार 644 रुपए है। इसमें तीन साल तक रखरखाव भी शामिल है। टेंडर जमा करने की अंतिम तारीख 12 अक्टूबर और खोलने की तारीख 16 अक्टूबर तय की गई है। 24.70 करोड़ खर्च होने की जानकारी दी थी, अब नया हिसाब जरूरी
राजस्थान विधानसभा में सरकार ने बताया था कि सिविल लाइंस आरओबी पर उस समय तक 24.70 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके थे। यह पुराना सरकारी आंकड़ा है। अक्टूबर 2026 तक निर्माण पर कुल कितना भुगतान हुआ है, इसका नया विवरण उपलब्ध नहीं है।
दो कंपनियों को काम सौंपने, ठेका बदलने और निर्माण में देरी के बाद परियोजना की वर्तमान कुल लागत क्या है, यह भी जेडीए को स्पष्ट करना होगा। साथ ही दोनों एजेंसियों पर लगाए गए जुर्माने की वसूली की स्थिति भी सामने आनी चाहिए।
गहलोत ने उठाए सवाल
गहलोत ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री आवास से करीब 100 मीटर दूर निर्माणाधीन प्रोजेक्ट लोगों के लिए एक्सीडेंट जोन बन गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मुख्यमंत्री आवास के पास विकास कार्य की यह स्थिति है, तो प्रदेश के दूसरे इलाकों का क्या हाल होगा। गहलोत ने मौजूदा सरकार पर प्रोजेक्ट को लेकर सुस्ती बरतने का आरोप भी लगाया था।
जेडीए का लक्ष्य दिसंबर
दो निर्माण एजेंसियों पर जुर्माना लगने के बाद भी पुल पूरा नहीं हुआ। ऐसे में सवाल है कि देरी के लिए विभागीय स्तर पर किसकी जिम्मेदारी तय हुई? अब तक कितना पैसा खर्च हुआ और दिसंबर तक पुल पर यातायात शुरू करने के लिए क्या ठोस योजना है? पांच साल से लोग जिस राहत का इंतजार कर रहे हैं, उसका जवाब अब जेडीए को देना होगा।
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