राजस्थान में खाद का स्टॉक भरपूर, फिर कालाबाजारी पर 24 FIR क्यों? नरेश मीणा का अनशन जारी
Raghvendra Singh Rathore | Oct 08, 2026, 16:48 IST
नरेश मीणा का अनशन
राजस्थान में रबी की बुआई से पहले खाद की कमी को लेकर किसानों की शिकायतें बढ़ रही हैं। सरकार का दावा है कि पर्याप्त खाद का स्टॉक उपलब्ध है, लेकिन किसान इसे पाने में परेशान हैं। कृषि विभाग ने खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए कार्रवाई की है, जिसमें एफआईआर और लाइसेंस निलंबन शामिल हैं।
राजस्थान में रबी की बुआई से पहले खाद की उपलब्धता को लेकर सरकार के दावों और किसानों की शिकायतों के बीच बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सरकार कह रही है कि प्रदेश में यूरिया और डीएपी की पर्याप्त व्यवस्था है। दूसरी ओर, खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी और अवैध सप्लाई के मामलों में कृषि विभाग ने 24 एफआईआर दर्ज कराई हैं। 115 खाद विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित और तीन के निरस्त किए गए हैं। इन मामलों में अब तक 11 लोगों की गिरफ्तारी हुई है।
इसी बीच किसानों की मांगों को लेकर जयपुर कूच करने वाले नरेश मीणा ने अधिकारियों से बातचीत के बाद अपना कूच समाप्त कर दिया है, लेकिन अनशन जारी रखने की बात कही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सरकार के पास खाद का पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद किसानों को तय कीमत पर खाद उपलब्ध कराने में परेशानी क्यों आ रही है?
कृषि विभाग ने प्रदेश में अब तक 12 हजार 362 खाद बिक्री केंद्रों का निरीक्षण किया है। इस दौरान अलग-अलग तरह की अनियमितताओं पर 115 लाइसेंस निलंबित किए गए, जबकि तीन लाइसेंस निरस्त हुए हैं।
खाद को अवैध तरीके से दूसरी जगह भेजने के मामलों में 1 हजार 223 बैग जब्त किए गए। वहीं गुणवत्ता नियंत्रण से जुड़ी कार्रवाई में यूरिया, डीएपी, एनपीके और एसएसपी सहित विभिन्न खाद के 8 हजार 533 बैग जब्त हुए हैं।
विभाग ने 10 सितंबर से विशेष जांच अभियान शुरू किया था, जो 15 अक्टूबर तक चलेगा। इसमें खाद की दुकानों, गोदामों, बिक्री रिकॉर्ड और सप्लाई की जांच की जा रही है।
प्रदेश में खाद की जमाखोरी, कालाबाजारी और अवैध भंडारण रोकने के लिए 744 उर्वरक निरीक्षक लगाए गए हैं। सीमावर्ती जिलों से खाद दूसरे राज्यों में अवैध तरीके से भेजे जाने पर रोक लगाने के लिए 61 चेक पोस्ट भी बनाई गई हैं।
जिन बिक्री केंद्रों पर किसानों की ज्यादा भीड़ है, वहां कृषि विभाग के कर्मचारियों की मौजूदगी में खाद बांटने की व्यवस्था की गई है। जिलों में कंट्रोल रूम भी बनाए गए हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में दुकानों पर कार्रवाई और एफआईआर दर्ज होने से खाद की सप्लाई और बिक्री पर निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
नरेश मीणा का कहना है कि किसानों को पर्याप्त डीएपी और यूरिया मिलना चाहिए। खाद निर्धारित कीमत पर बेची जाए और किसानों को खाद के साथ दूसरा सामान खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जाए।
उन्होंने दावा किया कि अधिकारियों ने अगले तीन से चार दिनों में किसानों की समस्याओं पर परिणाम देने का भरोसा दिया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में फिलहाल 3.72 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 1.06 लाख मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है। इसके अलावा 97 हजार मीट्रिक टन एनपीके और 2.08 लाख मीट्रिक टन एसएसपी का स्टॉक भी बताया गया है।
अक्टूबर के लिए केंद्र ने राजस्थान को 4.60 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 2 लाख 400 मीट्रिक टन डीएपी आवंटित किया है। राज्य सरकार के मुताबिक शुरुआती स्टॉक को शामिल करते हुए अब तक 4.33 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 1.41 लाख मीट्रिक टन डीएपी की व्यवस्था की गई है।
कृषि एवं उद्यानिकी विभाग की प्रमुख शासन सचिव मंजू राजपाल के अनुसार, केंद्र से मिले आवंटन और जिलों की मांग के आधार पर खाद की सप्लाई तय की जा रही है। विभाग ने सभी जिलों के अधिकारियों को कालाबाजारी, जमाखोरी और दूसरी अनियमितताओं पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने बताया कि खाद बिक्री केंद्रों पर विभागीय कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। जिन दुकानों पर किसानों की ज्यादा भीड़ है, वहां अधिकारियों की निगरानी में खाद वितरित की जा रही है। सीमावर्ती जिलों में खाद की अवैध आवाजाही रोकने के लिए चेक पोस्ट भी बनाई गई हैं।
पहला सवाल खाद की उपलब्धता का है। सरकार पूरे प्रदेश में पर्याप्त स्टॉक बता रही है, लेकिन क्या जरूरत वाले सभी जिलों और गांवों में समय पर खाद पहुंच रही है? दूसरा सवाल कीमत का है। किसानों को खाद के साथ दूसरे उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर किए जाने के आरोप हैं। ऐसे में तय कीमत से ज्यादा वसूली रोकने के लिए की गई कार्रवाई का असर कितना हुआ? तीसरा सवाल निगरानी का है। हजारों दुकानों की जांच और 24 एफआईआर के बाद क्या खाद की कालाबाजारी पर रोक लगी है?
फिलहाल कृषि विभाग की कार्रवाई के आंकड़े सामने हैं, लेकिन 24 एफआईआर की जिलावार सूची, संबंधित विक्रेताओं के नाम और किसानों से अतिरिक्त वसूली की रकम का पूरा विवरण उपलब्ध नहीं है। इन आंकड़ों से ही साफ होगा कि खाद वितरण में सबसे ज्यादा गड़बड़ियां कहां मिलीं और कार्रवाई के बाद किसानों को कितनी राहत मिली।
इसी बीच किसानों की मांगों को लेकर जयपुर कूच करने वाले नरेश मीणा ने अधिकारियों से बातचीत के बाद अपना कूच समाप्त कर दिया है, लेकिन अनशन जारी रखने की बात कही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सरकार के पास खाद का पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद किसानों को तय कीमत पर खाद उपलब्ध कराने में परेशानी क्यों आ रही है?
12 हजार से ज्यादा दुकानों की जांच, 118 लाइसेंस पर कार्रवाई
खाद को अवैध तरीके से दूसरी जगह भेजने के मामलों में 1 हजार 223 बैग जब्त किए गए। वहीं गुणवत्ता नियंत्रण से जुड़ी कार्रवाई में यूरिया, डीएपी, एनपीके और एसएसपी सहित विभिन्न खाद के 8 हजार 533 बैग जब्त हुए हैं।
विभाग ने 10 सितंबर से विशेष जांच अभियान शुरू किया था, जो 15 अक्टूबर तक चलेगा। इसमें खाद की दुकानों, गोदामों, बिक्री रिकॉर्ड और सप्लाई की जांच की जा रही है।
744 इंस्पेक्टर और 61 चेक पोस्ट, फिर भी सामने आईं गड़बड़ियां
जिन बिक्री केंद्रों पर किसानों की ज्यादा भीड़ है, वहां कृषि विभाग के कर्मचारियों की मौजूदगी में खाद बांटने की व्यवस्था की गई है। जिलों में कंट्रोल रूम भी बनाए गए हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में दुकानों पर कार्रवाई और एफआईआर दर्ज होने से खाद की सप्लाई और बिक्री पर निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
नरेश मीणा का जयपुर कूच खत्म
उन्होंने दावा किया कि अधिकारियों ने अगले तीन से चार दिनों में किसानों की समस्याओं पर परिणाम देने का भरोसा दिया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में फिलहाल 3.72 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 1.06 लाख मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है। इसके अलावा 97 हजार मीट्रिक टन एनपीके और 2.08 लाख मीट्रिक टन एसएसपी का स्टॉक भी बताया गया है।
अक्टूबर के लिए केंद्र ने राजस्थान को 4.60 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 2 लाख 400 मीट्रिक टन डीएपी आवंटित किया है। राज्य सरकार के मुताबिक शुरुआती स्टॉक को शामिल करते हुए अब तक 4.33 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 1.41 लाख मीट्रिक टन डीएपी की व्यवस्था की गई है।
अधिकारियों की निगरानी में बांटी जा रही खाद
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने बताया कि खाद बिक्री केंद्रों पर विभागीय कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। जिन दुकानों पर किसानों की ज्यादा भीड़ है, वहां अधिकारियों की निगरानी में खाद वितरित की जा रही है। सीमावर्ती जिलों में खाद की अवैध आवाजाही रोकने के लिए चेक पोस्ट भी बनाई गई हैं।
किसानों की शिकायतों के बीच तीन बड़े सवाल
फिलहाल कृषि विभाग की कार्रवाई के आंकड़े सामने हैं, लेकिन 24 एफआईआर की जिलावार सूची, संबंधित विक्रेताओं के नाम और किसानों से अतिरिक्त वसूली की रकम का पूरा विवरण उपलब्ध नहीं है। इन आंकड़ों से ही साफ होगा कि खाद वितरण में सबसे ज्यादा गड़बड़ियां कहां मिलीं और कार्रवाई के बाद किसानों को कितनी राहत मिली।
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