इंदौर फैमिली कोर्ट का आदेश, जैन समाज को हिंदू मैरिज एक्ट के तहत तलाक का हक नहीं
इंदौर फैमिली कोर्ट का फैसला जैन समाज के लिए चिंता का विषय बन गया है। कोर्ट ने जैन समाज के दंपती के तलाक की याचिका खारिज कर दी, इस आधार पर कि जैन समाज हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक नहीं ले सकता क्योंकि इसे अल्पसंख्यक वर्ग में माना गया है। इसके खिलाफ जैन समाज ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
कोर्ट का निर्णय और जैन समाज की आपत्ति
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'जैन धर्म काफी पुराना'
राजेश जैन ने जैन धर्म को लेकर कहा कि जैन धर्म का इतिहास रामधारी सिंह दिनकर की पुस्तक "संस्कृति" में भी उल्लेखित है और इम्पीरियल गजेटियर ऑफ इंडिया में भी यह लिखा गया है कि जैन धर्म के 23 तीर्थंकर पहले से थे। उन्होंने यह भी कहा कि रामधारी सिंह दिनकर की किताब में मोहनजोदड़ो की खुदाई में मिले सबूत जैन धर्म से जुड़े हैं, जो इसके प्राचीन अस्तित्व को प्रमाणित करते हैं।
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फैमिली कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में दलील
क्या है जैन समाज का मानना?
राजेश जैन ने कहा कि जैन धर्म का अस्तित्व हजारों साल पुराना है और इसे सनातन धर्म का हिस्सा माना जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि वोट मांगते समय नेता जैन समाज को सनातनी कहते हैं, लेकिन कोर्ट इस बात को नहीं मान रहा। यह जैन समाज के साथ अत्याचार है।
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