महेंद्र गोयनका मामले में जस्टिस पारदीवाला ने खुद को किया अलग, केस सुनने से किया इनकार

Pawan Modiya | May 06, 2026, 22:34 IST
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सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे.बी. पारदीवाला ने रायपुर निवासी महेंद्र गोयनका से जुड़े मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। यूरो प्रतीक इस्पात कंपनी पर फर्जी दस्तावेजों से कब्जे का यह मामला कटनी और कोलकाता में दर्ज है।

    5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला

    • सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पारदीवाला ने महेंद्र गोयनका केस सुनने से मना किया।
    • गोयनका पर यूरो प्रतीक इस्पात कंपनी पर फर्जी हस्ताक्षर से कब्जे का आरोप है।
    • कोलकाता और कटनी में धारा 420 और 120B के तहत FIR दर्ज हैं।
    • सहयोगियों की अग्रिम जमानत सुप्रीम कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है।
    • अब मामला किसी अन्य पीठ के सामने सूचीबद्ध किया जाएगा।

    जज ने खुद को किया अलग

    सर्वोच्च न्यायालय यानी सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला ने हाल ही में महेंद्र गोयनका से जुड़े एक मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। इसे कानूनी भाषा में recusal यानी स्वयं को सुनवाई से अलग करना कहते हैं। सुनवाई के दौरान जस्टिस पारदीवाला ने मौखिक टिप्पणी की, "इस केस में कौन हैं महेंद्र गोयनका" और इसके बाद उन्होंने इस मामले की सुनवाई करने से इनकार कर दिया। अब यह मामला सर्वोच्च न्यायालय की किसी अन्य उपयुक्त पीठ के सामने सूचीबद्ध किया जाएगा।



    कौन हैं महेंद्र गोयनका

    महेंद्र गोयनका रायपुर, छत्तीसगढ़ के निवासी हैं। वे जमीन, क्रशर, ग्रेनाइट खदानों और माइनिंग के क्षेत्र में सक्रिय एक विवादित कारोबारी हैं। वे मध्य प्रदेश के विजयराघवगढ़ (कटनी) से भाजपाविधायक संजय पाठक के परिवार की कंपनी यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में एक प्रमुख प्रबंधकीय पद पर काम करते रहे हैं।

    आरोप है कि गोयनका ने फर्जी हस्ताक्षरों और जाली दस्तावेजों के जरिए इस कंपनी सहित कई अन्य कंपनियों पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश की। यह मामला सैकड़ों करोड़ रुपए की कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा बताया जा रहा है।

    कटनी और कोलकाता में FIR

    फर्जी तरीके से हटाए गए डायरेक्टर्स सुरेंद्र सलूजा और हरनीत सिंह लांबा ने कटनी और माधवनगर थाने में चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया। आरोपियों में हिमांशु श्रीवास्तव, सन्मति जैन, सुनील अग्रवाल और कंपनी सेक्रेटरी लाची मित्तल शामिल हैं। इनके अलावा कोलकाता में भी IPC (Indian Penal Code) यानी भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 120B (आपराधिक षड्यंत्र) सहित अन्य धाराओं के तहत FIR (First Information Report) यानी प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज है।

    गोयनका के सहयोगियों पर कटनी में दो अलग-अलग मामलों में धाराओं 420, 120B, 467, 468 और 471 के तहत भी FIR दर्ज हैं।

    जमानत खारिज, फिर भी फरार

    जबलपुर हाईकोर्ट ने आरोपियों की अग्रिम जमानत अर्जी पहले ही खारिज कर दी थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की खंडपीठ ने भी धोखाधड़ी के इन आरोपियों को अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए मामले को गंभीर बताया।

    इसके बावजूद गोयनका के सहयोगी करीब डेढ़ से दो साल से फरार बताए जा रहे हैं। मध्य प्रदेश पुलिस अब तक उन्हें गिरफ्तार नहीं कर पाई है।

    कोलकाता पुलिस का छापा

    कोलकाता पुलिस ने महेंद्र गोयनका के रायपुर स्थित कार्यालय पर छापेमारी भी की। इसके अलावा भोपाल में सहारा स्टेट की जमीन खरीद से जुड़े एक अलग मामले में भी गोयनका का नाम सामने आया है।

    अब क्या होगा

    सुप्रीम कोर्ट में अब इस मामले को किसी दूसरी पीठ के सामने सूचीबद्ध किया जाएगा। जब कोई न्यायाधीश खुद को किसी मामले से अलग करते हैं तो इसका मतलब यह नहीं होता कि मामला कमजोर है। इसका अर्थ यह होता है कि न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए वह जज उस मामले में फैसला नहीं करेंगे। मामले की सुनवाई जारी रहेगी।

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