पद्मश्री साहित्यकार कैलाशचंद्र पंत का 90 साल में निधन. सीएम मोहन यादव ने जताया शोक
Jitendra Shrivastava | Jul 31, 2026, 14:32 IST
Photograph: (THESOOTR)
मध्यप्रदेश के जाने-माने साहित्यकार पद्मश्री कैलाशचंद्र पंत का शुक्रवार सुबह भोपाल में निधन हो गया। वे 90 साल के थे। सीएम मोहन यादव समेत कई नेताओं ने शोक व्यक्त किया। एक अगस्त को अंतिम संस्कार होगा।
पद्मश्री साहित्यकार कैलाश चंद्र पंत का निधन हो गया है। शुक्रवार सुबह भोपाल में उन्होंने अंतिम सांस ली। वे 90 साल के थे और हृदय गति रुकने से उनका निधन हुआ। कुछ महीने पहले ही राष्ट्रपति ने उन्हें पद्मश्री सम्मान दिया था। सीएम मोहन यादव समेत कई नेताओं ने शोक व्यक्त किया है।
हिन्दी साहित्य जगत के जाने-माने नाम पद्मश्री कैलाशचंद्र पंत अब हमारे बीच नहीं रहे। शुक्रवार सुबह भोपाल स्थित अपने घर में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनकी उम्र 90 साल थी।
बताया जा रहा है कि हृदय गति रुक जाने से उनका निधन हुआ। उनके निधन की खबर से मध्यप्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई। यह खबर भोपाल से लेकर उनके पैतृक उत्तराखंड तक पहुंची।
कैलाशचंद्र पंत मूल रूप से उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के खंतोली गांव के रहने वाले थे। उनके निधन की खबर वहां भी दुख का माहौल ले आई। गांव में उन्हें एक गौरवशाली सपूत के रूप में याद किया जा रहा है। पंत अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनकी तीन विवाहित पुत्रियां हैं। कुछ साल पहले उनकी पत्नी का भी निधन हो चुका था।
गणतंत्र दिवस 2026 से एक दिन पहले भारत सरकार ने पद्म पुरस्कारों की घोषणा की थी। इस सूची में कैलाशचंद्र पंत का भी नाम शामिल था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 25 मई 2026 को उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया।
इस मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह भी मौजूद थे। उम्र के इस पड़ाव पर भी पंत खुद चलकर राष्ट्रपति भवन तक पहुंचे थे। हालांकि उसके बाद से उनकी सेहत लगातार कमजोर होती गई।
कैलाशचंद्र पंत के निधन पर मध्यप्रदेश समेत देशभर के नेताओं ने शोक जताया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्हें उनके निधन की खबर से गहरा दुख हुआ है। उन्होंने पंत के लंबे साहित्यिक योगदान को याद किया।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा, साहित्य और पत्रकारिता में पंत का योगदान हमेशा याद रहेगा। दोनों नेताओं ने शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
कैलाशचंद्र पंत का अंतिम संस्कार एक अगस्त शनिवार को भोपाल में किया जाएगा। परिवार और शुभचिंतक अंतिम दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। साहित्य जगत उनके जाने को एक बड़ी क्षति मान रहा है।
पंत का जीवन हिंदी साहित्य और पत्रकारिता को समर्पित रहा। मध्य प्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति में भी वे लंबे समय तक सक्रिय रहे। उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।
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भोपाल में ली अंतिम सांस
बताया जा रहा है कि हृदय गति रुक जाने से उनका निधन हुआ। उनके निधन की खबर से मध्यप्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई। यह खबर भोपाल से लेकर उनके पैतृक उत्तराखंड तक पहुंची।
उत्तराखंड तक फैला शोक
कुछ महीने पहले मिला था सम्मान
इस मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह भी मौजूद थे। उम्र के इस पड़ाव पर भी पंत खुद चलकर राष्ट्रपति भवन तक पहुंचे थे। हालांकि उसके बाद से उनकी सेहत लगातार कमजोर होती गई।
नेताओं ने जताया शोक
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा, साहित्य और पत्रकारिता में पंत का योगदान हमेशा याद रहेगा। दोनों नेताओं ने शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
कल होगा अंतिम संस्कार
पंत का जीवन हिंदी साहित्य और पत्रकारिता को समर्पित रहा। मध्य प्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति में भी वे लंबे समय तक सक्रिय रहे। उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।
FAQ
- पद्मश्री कैलाशचंद्र पंत का निधन कब और कहां हुआ?
कैलाशचंद्र पंत का निधन शुक्रवार सुबह भोपाल में हुआ। वे 90 साल के थे। हृदय गति रुकने से उनका निधन बताया जा रहा है। - कैलाशचंद्र पंत को पद्मश्री कब मिला था?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 25 मई 2026 को उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था। इस दौरान पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह भी मौजूद थे। यह सम्मान गणतंत्र दिवस 2026 की घोषणा में शामिल था। - उनका अंतिम संस्कार कब होगा?
कैलाशचंद्र पंत का अंतिम संस्कार एक अगस्त शनिवार को भोपाल में होगा। परिवार और शुभचिंतक अंतिम दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। उनके पीछे तीन विवाहित पुत्रियां हैं।
छात्रा के साथ डिनर करना चाहते थे प्रोफेसर साहब, फिर एक चिठ्ठी से ढीली पड़ गईं हसरतें
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