मुरैना के काजी बसई गांव की सेना में योगदान की प्रेरक कहानी
Sandeep Kumar | Jan 26, 2025, 16:22 IST
kazibasei-village
मुरैना के काजी बसई गांव ने सेना में अपनी ऐतिहासिक भागीदारी से एक मिसाल कायम की है। इस गांव के लोग कई पीढ़ियों से सेना में सेवा दे रहे हैं और इनकी वीरता और समर्पण को कभी नहीं भुलाया जा सकता।
मुरैना जिले का काजी बसई गांव न सिर्फ अपने ऐतिहासिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां के लोग भारतीय सेना में अपने योगदान के लिए भी गौरव महसूस करते हैं। इस गांव की आबादी करीब 5000 है, जिसमें से 500 से ज्यादा लोग सेना में सेवा दे चुके हैं। चार परिवारों की पांच पीढ़ियां सेना में हैं और गांव के लोगों के दिलों में देशभक्ति और सैन्य सेवा का खास स्थान है।
![f8430be9-775]()
काजी बसई गांव में हर घर का कोई न कोई सदस्य सेना में रहा है। गांव के पहले शहीद सैनिक अब्दुल वसीद थे, जो ग्वालियर में सिंधिया स्टेट की सेना में भर्ती हुए थे। 1914 में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान वे ब्रिटिश सेना के साथ जर्मनी के खिलाफ लड़े थे, लेकिन युद्ध में शहीद हो गए। इस शहीदी ने गांव में सैन्य सेवा के प्रति जो लगाव था, उसे और मजबूत किया।
![3d26e849-337]()
गांव में कई परिवारों ने पीढ़ी दर पीढ़ी सेना में सेवा की है। हाजी मोहम्मद रफी, जो खुद एक सेवानिवृत्त सैनिक हैं, इन परिवारों का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने बताया कि काजी बसई गांव के लोग हमेशा देश की सेवा में तत्पर रहते हैं और उन्हें अपने पूर्वजों की सैन्य परंपरा पर गर्व है।
![2b455bb8-704]()
काजी बसई के लोग दोनों विश्व युद्धों में शामिल हुए थे। 1940 में दूसरे विश्व युद्ध के दौरान यहां के 16 जवान ब्रिटिश सेना के हिस्से के रूप में लड़े थे। इनमें हाजी सलीमुद्दीन, हाजी इस्लामुद्दीन और अब्दुल अली जैसे सैनिक शामिल थे। इसके अलावा, 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भी कई सैनिकों ने अपनी वीरता का प्रदर्शन किया।
![3f78d80d-bd7]()
1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में काजी बसई के सैनिकों ने बांग्लादेश की स्वतंत्रता की लड़ाई में भाग लिया। इस युद्ध में मोहम्मद मुजीबुल्ला और हाजी मोहम्मद रफी जैसे वीर सैनिक शामिल थे, जिन्होंने भारत की सेना के साथ मिलकर पाकिस्तान के खिलाफ संघर्ष किया। इन सैनिकों का योगदान भारतीय सेना के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।
![b0bf3d15-78c]()
काजी बसई के कई सैनिक कश्मीर में गोरिल्ला युद्ध में भी शामिल हुए थे। हाजी मोहम्मद रफी, जो 1965 के युद्ध में विशेष सेवा मेडल और 1971 के युद्ध में राष्ट्रपति मेडल से सम्मानित हुए, ने कश्मीर की अपनी सैन्य यात्रा को याद करते हुए बताया कि कैसे वे और उनके साथी सैनिक कश्मीर के दुर्गम इलाकों में पाकिस्तान के खिलाफ संघर्ष कर रहे थे।
![8039bb10-4d2]()
गांव के चौपालों पर लोग अक्सर सैन्य जीवन के बारे में चर्चा करते हैं। यह केवल एक पारंपरिक वार्ता का हिस्सा नहीं है, बल्कि सैन्य सेवा की एक गहरी संस्कृति है, जो यहां के हर व्यक्ति के जीवन का हिस्सा है। यहां के लोग सैन्य सेवा को एक सम्मान और कर्तव्य के रूप में मानते हैं, और इसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी समझते हैं।
![81c9be66-96e]()
काजी बसई गांव में शहीदों का सम्मान विशेष रूप से किया जाता है। यहां की मस्जिदों में नमाज के बाद लोग अक्सर अपने सैन्य अनुभवों को साझा करते हैं। शहीदों की याद में गांव में विशेष कार्यक्रम और आयोजन किए जाते हैं, जहां सैनिकों की वीरता को सलाम किया जाता है। यह गांव भारतीय सेना की जड़ों से जुड़ी एक प्रेरक कहानी है।
काजी बसई गांव ने भारतीय सेना को अपनी वीरता और सम्मान के साथ कई वीर सपूत दिए हैं। यहां की सैन्य परंपरा न केवल एक समृद्ध इतिहास का हिस्सा है, बल्कि यह एक प्रेरणा भी है, जो हर भारतीय नागरिक को देश की सेवा में अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करती है।
ये खबर भी पढ़िए...MPPSC चेयरमैन मेहरा गणतंत्र दिवस पर बोले- हमारे अधिकारी, कर्मचारी दिन-रात काम कर रहे
ये खबर भी पढ़िए...अशोकनगर के पुलिस जवान ने गाया शिव भजन, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
f8430be9-775
काजी बसई: सैनिकों का गांव
3d26e849-337
सैन्य सेवा के लिए प्रेरित करने वाले परिवार
2b455bb8-704
विश्व युद्ध और भारत-पाकिस्तान युद्ध में योगदान
3f78d80d-bd7
1971 का युद्ध और बांग्लादेश की स्वतंत्रता
b0bf3d15-78c
कश्मीर में गोरिल्ला युद्ध में हिस्सा
8039bb10-4d2
सैन्य अनुभव और गांव की संस्कृति
81c9be66-96e
काजी बसई का शहीदों का सम्मान
काजी बसई: सैन्य परंपरा का प्रतीक
ये खबर भी पढ़िए...MPPSC चेयरमैन मेहरा गणतंत्र दिवस पर बोले- हमारे अधिकारी, कर्मचारी दिन-रात काम कर रहे
ये खबर भी पढ़िए...अशोकनगर के पुलिस जवान ने गाया शिव भजन, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
thesootr links
- मध्य प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- रोचक वेब स्टोरीज देखने के लिए करें क्लिक
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती
By VINAY VERMA