दिल्ली के एक कॉल से कतरे मंत्री लखन पटेल के पर, पशुपालन विभाग से हटाकर आनंद विभाग थमाया
रात के अंधेरे में सरकारी प्रेस खुली। नोटिफिकेशन छपा और राज्यमंत्री लखन पटेल के हाथ से पशुपालन विभाग निकल गया।
14-15 जुलाई की देर रात मध्यप्रदेश सरकार ने गजट नोटिफिकेशन जारी किया और आनन- फानन पटेल को आनंद विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।
दिल्ली से आया फोन और हो गया एक्शन
सूत्रों के मुताबिक यह कार्रवाई दिल्ली की नाराजगी के बाद हुई। फोन पर कहा गया कि तत्काल पटेल को पशुपालन विभाग से हटाया जाए। फोन आने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अफसरों को तलब कर चर्चा की। लखन पटेल को मंत्री पद वापस लेने को कहा। तब अफसरों ने कहा पटेल अभी तो दो ही तरह से हटाए जा सकते हैं। पहला ये कि इनसे इस्तीफा लिया जाए और दूसरा उन्हें मंत्री पद से बर्खास्त किया जाए।
सूत्र बताते हैं कि सीएम ने कहा तत्काल हटाना है, इसलिए बीच का रास्ता निकाला गया कि अभी सिर्फ विभाग बदल दो। इस पर अफसरों ने सुझाव दिया कि पटेल को पशुपालन से हटाकर नाममात्र का विभाग दिया जा सकता है। इसके बाद उन्हें आनंद विभाग का मंत्री बनाने को कहा।
सीएम के आदेश के तत्काल बाद देर रात नोटिफ़िकेशन जारी किया गया। बताया जा रहा है की आगामी मंत्रिमंडल विस्तार में पटेल को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। अब पशुपालन विभाग खुद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने पास रख लिया है।
डिमोशन की तीन थ्योरी
Thesootr को मिली जानकारी के अनुसार इस एपिसोड को पीछे तीन कारण बताए जा रहे हैं।
- 1- गौशालाओं के लेकर संघ की नाराजगी
- 2- नेशलन डेयरी डवलपमेंट बोर्ड के मामले को लेकर
- 3- पटेल को लेकर बेहद गंभीर किस्म की शिकायतें जिनके कारण दिल्ली तक सरकार की किरकिरी हो सकती थी।
बता दें कि राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नाराजगी सिर्फ एक मुद्दे पर नहीं थी।
प्रदेश की गौशालाओं से लगातार शिकायतें आ रही थीं। इस पर CM पहले से नाखुश थे। साथ ही अमूल डेयरी से जुड़ा एक मामला भी दिल्ली में देखा जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि पटेल को लेकर कुल मिलाकर कई मुद्दों पर सवाल उठ रहे थे। हालांकि सरकार ने अभी तक इस बदलाव की कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई है।
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कौन हैं लखन पटेल ?
लखन पटेल ने अपना पहला विधानसभा चुनाव साल 2013 में भाजपा के टिकट पर दमोह जिले की पथरिया सीट से लड़ा था। इस चुनाव में उन्होंने जीत दर्ज की और पहली बार विधायक बने। हालांकि, 2018 के चुनाव में उन्हें बहुजन समाज पार्टी की उम्मीदवार रामबाई के सामने हार का सामना करना पड़ा।
इसके बाद 2023 के विधानसभा चुनाव में लखन पटेल ने शानदार वापसी की और एक बार फिर पथरिया सीट से जीत हासिल कर विधानसभा पहुंचे। इसके बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव के मंत्रिमंडल में उन्हें स्वतंत्र प्रभार वाले राज्यमंत्री के तौर पर जगह दी गई।
लखन पटेल की गिनती मध्य प्रदेश बीजेपी के पुराने और वरिष्ठ नेताओं में होती है। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं।
2013 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें पथरिया सीट से मैदान में उतारा था। इस चुनाव में उनका मुकाबला कांग्रेस के कुंवर पुष्पेंद्र सिंह हजारी से हुआ। पटेल ने 7,315 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। उन्हें 60 हजार 083 वोट मिले थे, जबकि हजारी को 52 हजार 768 वोट मिले थे।
2018 के विधानसभा चुनाव में पटेल फिर बीजेपी के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे, लेकिन इस बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा। बहुजन समाज पार्टी की उम्मीदवार रामबाई गोविंद सिंह ने उन्हें 2,205 वोटों से हरा दिया। पटेल को 37,062 वोट मिले, जबकि रामबाई को 39,267 वोट मिले थे।
इसके बाद 2023 के विधानसभा चुनाव में लखन पटेल ने फिर वापसी की। बीजेपी ने उन्हें दोबारा पथरिया से टिकट दिया और उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार राव ब्रजेंद्र सिंह को 18 हजार159 वोटों से हराकर जीत हासिल की। इस चुनाव में पटेल को 82 हजार 603 वोट मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार को 64 हजार 444 वोट मिले थे।
सरकारी नौकरी छोड़कर राजनीति में आए
मध्य प्रदेश के दमोह जिले की पथरिया विधानसभा सीट से विधायक लखन पटेल ने राजनीति में कदम रखने से पहले बैंकिंग क्षेत्र में लंबा समय काम किया। उन्होंने जबलपुर के पंडित जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय से 1978-79 में कृषि विषय में बीएससी की डिग्री हासिल की।
पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में कई वर्षों तक नौकरी की। बाद में बैंक की नौकरी छोड़कर वे राजनीति में सक्रिय हो गए। अपने राजनीतिक सफर के दौरान लखन पटेल जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
सीएम के पास 11 विभाग
मुख्यमंत्री मोहन यादव के पास अब कुल 11 विभागों की जिम्मेदारी है। इनमें सामान्य प्रशासन, गृह, जेल, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, जनसंपर्क, नर्मदा घाटी विकास, विमानन, खनिज, लोक सेवा प्रबंधन, प्रवासी भारतीय और पशुपालन एवं डेयरी विभाग शामिल हैं।
ये सभी ऐसे विभाग हैं, जिनकी जिम्मेदारी फिलहाल किसी और मंत्री के पास नहीं है। यानी इन विभागों का सीधा जिम्मा मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद संभाल रहे हैं
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