लोकसभा चुनावः सत्ता के केंद्र में आदिवासी, 11 सीटों पर का सीधा प्रभाव
Jitendra Shrivastava | Apr 09, 2024, 23:39 IST
11 सीटों पर का आदिवासियों सीधा प्रभाव।
आरक्षित छह सीटों के अलावा छिंदवाड़ा, जबलपुर, होशंगाबाद, भिण्ड और खंडवा लोकसभा क्षेत्र में भी आदिवासियों के वोट निर्णायक रहते हैं। एक सर्वे के अनुसार, इस लोकसभा चुनाव में एसटी बहुल सीटों पर बीजेपी की स्थिति अच्छी नहीं है
रविकांत दीक्षित, BHOPAL. लोकसभा चुनाव की इस बेला में आदिवासी एक बार फिर केंद्र में आ गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले जबलपुर से महाकौशल क्षेत्र के ट्राइबल बेल्ट को साधने की कोशिश की। दूसरी बार के दौरे में वे बालाघाट पहुंचे। कांग्रेस से राहुल गांधी आदिवासी बहुल मंडला और शहडोल लोकसभा सीट पर पहुंचे हैं। उन्होंने तीन जगह सभा की। अब आने वाली 15 अप्रैल को प्रियंका गांधी सतना में चुनाव प्रचार करेंगी। इससे पहले बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी शहडोल का दौरा कर चुके हैं। दरअसल, मध्यप्रदेश की सियासत में आदिवासियों का अहम रोल है। 11 सीटों पर एसटी वर्ग का सीधा प्रभाव है। दोनों प्रमुख दलों की इस बड़े वर्ग पर हर चुनाव में नजर रहती है। अब राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के एक सर्वे के अनुसार, इस लोकसभा चुनाव में एसटी बहुल सीटों पर बीजेपी की स्थिति अच्छी नहीं है, इसलिए मिशन- 29 यानी सभी 29 सीटें जीतने का दावा कर रही BJP की चिंता बढ़ गई है।
कांग्रेस: छठी अनुसूची का किया वादा
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि मध्यप्रदेश में जहां आदिवासी वर्ग 50 फीसदी से ज्यादा होगा, वहां छठी अनुसूची लागू की जाएगी। यानी कलेक्टर की जगह एक समिति का शासन होगा। इस समिति में सभी वर्ग के लोग होंगे। राहुल ने अपने इस ऐलान से पूरे वर्ग को साधने की कोशिश की है।
भाजपा: महाकौशल के बाद बालाघाट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले जबलपुर में रोड शो कर पूरे महाकौशल बेल्ट को साधा। तीन दिन में वे दूसरी बार मध्यप्रदेश पहुंचे और आदिवासी बहुल बालाघाट में चुनावी सभा को संबोधित किया। बीजेपी के दूसरे बड़े नेता भी लगातार आदिवासी बहुल क्षेत्रों में चुनावी सभाएं एवं रोड शो कर अपने पक्ष में मतदान करने की अपील कर रहे हैं।
खरगोन: बीजेपी के खिलाफ एंटी इनकमबैंसी
खरगोन एसटी वर्ग के लिए ही आरक्षित सीट है। यहां बीजेपी-कांग्रेस के बीच सीधी सियासी भिड़ंत हैं। इस सीट पर बीजेपी ने अपने मौजूदा सांसद गजेंद्र सिंह पटेल पर भरोसा जताया है। कांग्रेस ने पोरलाल खरते को मैदान में उतारा है। सूत्रों के अनुसार, यहां बीजेपी के गजेंद्र सिंह के खिलाफ एंटी इनकमबैंसी है। दूसरा, इस लोकसभा क्षेत्र में एसटी आबादी भी बीजेपी से नाराज है।
शहडोल: सांसद और विधायक के बीच मुकाबला
शहडोल में सियासी मुकाबला सांसद और विधायक के बीच है। यहां बीजेपी ने अपनी मौजूदा सांसद हिमाद्री सिंह को ही टिकट दिया है, जबकि कांग्रेस ने विधायक फुंदेलाल सिंह मार्को को उतारा है। इस सीट पर आदिवासी वर्ग की सबसे ज्यादा संख्या है। इस चुनाव में आदिवासी वर्ग बीजेपी से नाराज है। कांग्रेस इसी नाराजगी को भुनाना चाहती है। लिहाजा, राहुल गांधी ने इस सीट पर सभा कर अपने पक्ष में वोट मांगे। बीजेपी भी इसे लेकर चिंतित है। इसीलिए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी शहडोल का दौरा कर चुके हैं।
धार: दरबार के खिलाफ थी नाराजगी
कहा जाता है कि धार की जनता का मिजाज समझना आसान नहीं है। अब यहां बीजेपी से सावित्री ठाकुर चुनाव लड़ रही हैं तो कांग्रेस ने राधेश्याम मुवेल को प्रत्याशी बनाया है। इससे पहले धार से छतर सिंह दरबार सांसद थे, उनके खिलाफ नाराजगी थी, इसीलिए बीजेपी ने टिकट बदला है। अब देखना होगा कि क्या आदिवासी वर्ग सावित्री का साध देगा। आपको बता दें कि धार लोकसभा सीट पर 7 लाख भिलाला और 5 लाख भील निर्णायक वोटर्स हैं। दोनों प्रत्याशी भी भिलाला समुदाय से आते हैं। भील वोटर्स निर्णायक होंगे।
रतलाम: क्या रतलाम में कांग्रेस को मिलेगी संजीवनी
रतलाम कांग्रेस के लिए संजीवनी बूटी का काम कर सकती है। दरअसल यहां कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेता कांतिलाल भूरिया पर भरोसा जताया है, जबकि बीजेपी ने मंत्री नागर सिंह चौहान की पत्नी अनीता चौहान को टिकट दिया है। गौरतलब है कि वर्ष 2009 तक यह सीट कांग्रेस का गढ़ रही है। फिलहाल लोकसभा की 8 में से 1 विधानसभा सीट पर भारत आदिवासी पार्टी जीती है। कांग्रेस के खाते में तीन सीटें हैं। भूरिया का इस क्षेत्र में अच्छा प्रभाव है। इसका लाभ मिल सकता है। दूसरा गुमान सिंह डामोर को लेकर नाराजगी थी, इसीलिए बीजेपी ने टिकट बदला।
मंडला: विधानसभा चुनाव हार फग्गन मैदान में
मंडला लोकसभा सीट पर सांसद और विधायक के बीच मुकाबला है। यानी बीजेपी ने अपने मौजूदा सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते को ही टिकट दिया है, जबकि कांग्रेस ने डिंडोरी विधायक ओमकार सिंह मरकाम को अवसर दिया है। इस सीट पर सबसे ज्यादा संख्या गोंड आदिवासियों की है। लोकसभा की 8 में से 5 सीटें कांग्रेस के पास हैं। बीजेपी के लिए चिंता की बात यह भी है कि यहां फग्गन सिंह विधानसभा चुनाव हार गए थे, यानी उनके खिलाफ जनता में नाराजगी है। अब नतीजे दिलचस्प होंगे।
बैतूल: पुराने प्रत्याशी फिर आमने-सामने
बैतूल लोकसभा सीट भी एसटी वर्ग के लिए आरक्षित है। बीजेपी और कांग्रेस ने अपने पिछले उम्मीदवारों पर ही भरोसा जताया है। यानी बीजेपी से दुर्गादास उइके मैदान में हैं तो कांग्रेस ने रामू टेकाम दम भर रहे हैं। दुर्गादास ने 2019 के चुनाव में रामू टेकाम को हराया था। वर्तमान में रामू आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हैं। विधानसभा चुनाव में लोकसभा क्षेत्र की 8 में से 6 सीटें यहां बीजेपी जीती है। इसलिए नेता उत्साहित हैं। कुल मिलाकर यहां भी नेताओं को सांसद बनाने में ट्राइबल्स का ही अहम रोल है।
आदिवासियों की सियासत...
कांग्रेस: छठी अनुसूची का किया वादा
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि मध्यप्रदेश में जहां आदिवासी वर्ग 50 फीसदी से ज्यादा होगा, वहां छठी अनुसूची लागू की जाएगी। यानी कलेक्टर की जगह एक समिति का शासन होगा। इस समिति में सभी वर्ग के लोग होंगे। राहुल ने अपने इस ऐलान से पूरे वर्ग को साधने की कोशिश की है।
भाजपा: महाकौशल के बाद बालाघाट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले जबलपुर में रोड शो कर पूरे महाकौशल बेल्ट को साधा। तीन दिन में वे दूसरी बार मध्यप्रदेश पहुंचे और आदिवासी बहुल बालाघाट में चुनावी सभा को संबोधित किया। बीजेपी के दूसरे बड़े नेता भी लगातार आदिवासी बहुल क्षेत्रों में चुनावी सभाएं एवं रोड शो कर अपने पक्ष में मतदान करने की अपील कर रहे हैं।
बताते हैं एसटी रिजर्व सीटों की स्थिति...
खरगोन: बीजेपी के खिलाफ एंटी इनकमबैंसी
खरगोन एसटी वर्ग के लिए ही आरक्षित सीट है। यहां बीजेपी-कांग्रेस के बीच सीधी सियासी भिड़ंत हैं। इस सीट पर बीजेपी ने अपने मौजूदा सांसद गजेंद्र सिंह पटेल पर भरोसा जताया है। कांग्रेस ने पोरलाल खरते को मैदान में उतारा है। सूत्रों के अनुसार, यहां बीजेपी के गजेंद्र सिंह के खिलाफ एंटी इनकमबैंसी है। दूसरा, इस लोकसभा क्षेत्र में एसटी आबादी भी बीजेपी से नाराज है।
शहडोल: सांसद और विधायक के बीच मुकाबला
शहडोल में सियासी मुकाबला सांसद और विधायक के बीच है। यहां बीजेपी ने अपनी मौजूदा सांसद हिमाद्री सिंह को ही टिकट दिया है, जबकि कांग्रेस ने विधायक फुंदेलाल सिंह मार्को को उतारा है। इस सीट पर आदिवासी वर्ग की सबसे ज्यादा संख्या है। इस चुनाव में आदिवासी वर्ग बीजेपी से नाराज है। कांग्रेस इसी नाराजगी को भुनाना चाहती है। लिहाजा, राहुल गांधी ने इस सीट पर सभा कर अपने पक्ष में वोट मांगे। बीजेपी भी इसे लेकर चिंतित है। इसीलिए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी शहडोल का दौरा कर चुके हैं।
धार: दरबार के खिलाफ थी नाराजगी
कहा जाता है कि धार की जनता का मिजाज समझना आसान नहीं है। अब यहां बीजेपी से सावित्री ठाकुर चुनाव लड़ रही हैं तो कांग्रेस ने राधेश्याम मुवेल को प्रत्याशी बनाया है। इससे पहले धार से छतर सिंह दरबार सांसद थे, उनके खिलाफ नाराजगी थी, इसीलिए बीजेपी ने टिकट बदला है। अब देखना होगा कि क्या आदिवासी वर्ग सावित्री का साध देगा। आपको बता दें कि धार लोकसभा सीट पर 7 लाख भिलाला और 5 लाख भील निर्णायक वोटर्स हैं। दोनों प्रत्याशी भी भिलाला समुदाय से आते हैं। भील वोटर्स निर्णायक होंगे।
रतलाम: क्या रतलाम में कांग्रेस को मिलेगी संजीवनी
रतलाम कांग्रेस के लिए संजीवनी बूटी का काम कर सकती है। दरअसल यहां कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेता कांतिलाल भूरिया पर भरोसा जताया है, जबकि बीजेपी ने मंत्री नागर सिंह चौहान की पत्नी अनीता चौहान को टिकट दिया है। गौरतलब है कि वर्ष 2009 तक यह सीट कांग्रेस का गढ़ रही है। फिलहाल लोकसभा की 8 में से 1 विधानसभा सीट पर भारत आदिवासी पार्टी जीती है। कांग्रेस के खाते में तीन सीटें हैं। भूरिया का इस क्षेत्र में अच्छा प्रभाव है। इसका लाभ मिल सकता है। दूसरा गुमान सिंह डामोर को लेकर नाराजगी थी, इसीलिए बीजेपी ने टिकट बदला।
मंडला: विधानसभा चुनाव हार फग्गन मैदान में
मंडला लोकसभा सीट पर सांसद और विधायक के बीच मुकाबला है। यानी बीजेपी ने अपने मौजूदा सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते को ही टिकट दिया है, जबकि कांग्रेस ने डिंडोरी विधायक ओमकार सिंह मरकाम को अवसर दिया है। इस सीट पर सबसे ज्यादा संख्या गोंड आदिवासियों की है। लोकसभा की 8 में से 5 सीटें कांग्रेस के पास हैं। बीजेपी के लिए चिंता की बात यह भी है कि यहां फग्गन सिंह विधानसभा चुनाव हार गए थे, यानी उनके खिलाफ जनता में नाराजगी है। अब नतीजे दिलचस्प होंगे।
बैतूल: पुराने प्रत्याशी फिर आमने-सामने
बैतूल लोकसभा सीट भी एसटी वर्ग के लिए आरक्षित है। बीजेपी और कांग्रेस ने अपने पिछले उम्मीदवारों पर ही भरोसा जताया है। यानी बीजेपी से दुर्गादास उइके मैदान में हैं तो कांग्रेस ने रामू टेकाम दम भर रहे हैं। दुर्गादास ने 2019 के चुनाव में रामू टेकाम को हराया था। वर्तमान में रामू आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हैं। विधानसभा चुनाव में लोकसभा क्षेत्र की 8 में से 6 सीटें यहां बीजेपी जीती है। इसलिए नेता उत्साहित हैं। कुल मिलाकर यहां भी नेताओं को सांसद बनाने में ट्राइबल्स का ही अहम रोल है।
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