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विधानसभा के करीब 50 विधायकों को 40 हजार रुपए किराया दिलवाने के प्रस्ताव में अड़चन आ गई है। संसदीय कार्य विभाग के जरिए विधानसभा के प्रस्ताव पर वित्त विभाग ने ये कहा कि वे इतना ज्यादा किराया नहीं दे सकते। उन्होंने ये भी कहा कि इसमें कम से कम 10 हजार रुपए कम किए जाएं।
इसके अलावा शासन ने भी विधानसभा से पूछा है कि पहले उन विधायकों की सूची दी जाए, जो पुराने एमएलए रेस्ट हाउस में रहते थे। जिनके आवास अब टूट चुके हैं जिससे वे अब किराए पर रहने वाले हैं।
किराया 25 हजार फिर 40 हजार क्यों ?
विधानसभा के प्रस्ताव पर सवाल उठ रहे हैं कि जिस रेस्ट एमएलए हाउस (खंड एक और ओल्ड फैमिली ब्लॉक) में विधायक पहले रहते थे वह जगह भोपाल में किराए पर लेने पर 20 से 25 हजार रुपए में ही मिल जाएगी। 40 हजार रुपए बहुत ज्यादा है।
यहां यह भी बताया जा रहा है कि एमएलए रेस्ट हाउस की 67 साल पुरानी बिल्डिंग को तोड़कर नए आवास (फ्लैट्स) बनाए जा रहे हैं। कुल 300 फ्लैट्स बनने हैं। इनमें से पहले चरण में 102 फ्लैट्स बनाए जा रहे हैं।
वित्त विभाग ने नहीं दी सहमति
पांच महीने पहले जब इन्हें तोड़ा जा रहा था तब विधानसभा की ओर से शासन को कहा गया कि, जो विधायक वहां रह रहे थे उन्हें नए भवन बनने तक हर महीने 40 हजार रुपए किराया दिया जाएगा। विधानसभा की सदस्य सुविधा समिति ने किराए की राशि तय की थी। इसके बाद ये फाइल संसदीय कार्य विभाग को भेजी थी। वित्त विभाग ने इस पर पूरी तरह से सहमति नहीं दी थी।
अब संसदीय कार्य विभाग ने विधानसभा से कहा है कि पहले उन विधायकों की सूची दी जाए जो पुरानी और टूटी-फूटी बिल्डिंग में रह रहे थे। इसके साथ ही यह भी बताया जाए कि कितने विधायकों को दूसरे सरकारी आवास दे दिए गए हैं। ये भी बताएं कि अब कितने किराए पर रहेंगे। अब संसदीय कार्य विभाग विधानसभा से जवाब का इंतजार कर रहा है।
सरकार पर 2.40 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च
विधानसभा के मौजूदा प्रस्ताव और 50 विधायकों के हिसाब से 40 हजार रुपए किराया तय किया जाता है, तो सरकार को हर साल 2.40 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च आएगा। यह प्रोजेक्ट तीन से चार साल तक चलता है तो यह राशि करीब 9 से 10 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगी। वित्त विभाग के हिसाब से यदि यह राशि तय होती है तो सरकार हर साल 60 लाख रुपए तक बचा सकेगी।
एक और वजह है कि यदि पहली बार 40 हजार रुपए का किराया तय किया गया, तो आगे जिन विधायकों को टूटने वाले भवनों में रह रहे विधायकों को भी उतनी ही राशि देनी पड़ेगी।
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