एमपी में कोयले से बनेगी गैस, बिजली-उर्वरक उद्योगों को फायदा, 37,500 करोड़ की योजना मंजूर
Kaushiki | Jun 02, 2026, 10:18 IST
madhya pradesh coal
मध्यप्रदेश सरकार कोयले से गैस बनाने की नीति लागू करने जा रही है। एमपीआईडीसी इस काम की नोडल एजेंसी होगी। प्रदेश में 33 अरब टन कोयला भंडार है। इससे बिजली, उर्वरक, रसायन और मेथानॉल उद्योगों को रफ्तार मिलेगी।
समझें क्या है पूरा मामला
- एमपी सरकार कोयले से गैस बनाने की नई नीति ला रही है।
- एमपीआईडीसी को इस काम की नोडल एजेंसी बनाया गया है।
- प्रदेश के 7 जिलों में करीब 33 अरब टन कोयला भंडार है।
- इस गैस का उपयोग बिजली, उर्वरक, रसायन और मेथानॉल में होगा।
- केंद्र सरकार की 37 हजार 500 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन योजना पहले से मंजूर है।
Govt approves ₹37,500-cr incentive to promote coal gasification projects, ETEnergyworld
मप्र की नई ऊर्जा नीति
ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने इस योजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एमपीआईडीसी यानी मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम को इस काम की नोडल एजेंसी बनाया गया है। अन्य राज्यों में चल रहे कोल गैसीफिकेशन के अध्ययन के बाद मप्र के लिए एक ठोस नीति तैयार की जाएगी।
MP energy policy
7 जिलों में विशाल कोयला भंडार
सोहागपुर में लगभग 4.06 अरब टन यानी 4064 मिलियन टन कोयला है। सोहागपुर क्षेत्र में एसईसीएल (South Eastern Coalfields Limited) की सक्रिय खदानें भी मौजूद हैं।
अनूपुर में करोड़ों टन और शहडोल में सोहागपुर कोलफील्ड का हिस्सा है। बैतूल में लगभग 1 अरब टन और छिंदवाड़ा में करीब 50 करोड़ टन का अनुमानित संसाधन है।
क्यों अहम है यह नीति?
केंद्र सरकार ने 100 मिलियन टन कोयले के गैसीफिकेशन का लक्ष्य रखा है। इसके लिए 37 हजार 500 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन योजना भी पहले ही मंजूर की जा चुकी है। मप्र के पास इतना बड़ा कोयला भंडार होने से प्रदेश को इस योजना का बड़ा फायदा मिल सकता है।
MP energy policy
उद्योगों को मिलेगी रफ्तार
सिंगरौली, सोहागपुर, उमरिया, अनूपुर, बैतूल और छिंदवाड़ा जैसे जिलों में कोयले के बड़े भंडार हैं। इन इलाकों में नए औद्योगिक निवेश की संभावना भी बढ़ेगी। स्थानीय रोजगार के नए मौके खुल सकते हैं।
आगे की राह
ऊर्जा विभाग मध्य प्रदेश शासन ने इसे प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। माना जा रहा है कि यह नीति प्रदेश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगी।
FAQ
- कोल गैसीफिकेशन क्या होता है?
कोल गैसीफिकेशन एक तकनीकी प्रक्रिया है जिसमें कोयले को सीधे जलाने की बजाय उसे भाप और ऑक्सीजन के साथ रासायनिक प्रक्रिया से गैस में बदला जाता है। इस गैस को सिनगैस (Syngas) कहते हैं। इसका उपयोग बिजली उत्पादन, उर्वरक बनाने, रसायन और मेथानॉल जैसे उद्योगों में होता है। यह तकनीक कोयले के पारंपरिक उपयोग से ज्यादा कुशल मानी जाती है। - मध्यप्रदेश में कोयले का सबसे बड़ा भंडार कहां है?
मध्यप्रदेश में सबसे बड़ा कोयला भंडार सिंगरौली जिले में है, जहां अनुमानित 9.12 अरब टन यानी 9121 मिलियन टन कोयला है। इसके बाद सोहागपुर में 4.06 अरब टन भंडार है। प्रदेश के कुल 7 जिलों में करीब 33 अरब टन कोयले का भंडार अनुमानित है। इन जिलों में सिंगरौली, सोहागपुर, अनूपुर, शहडोल, उमरिया, बैतूल और छिंदवाड़ा शामिल हैं।
आईएएस सुबोध सिंह ऊर्जा विभाग के बने नए मुखिया, अब टेक्नोलॉजी से सुधरेगी व्यवस्था
ऊर्जा संकट की आहट के बीच सरकार का नया प्लान: ग्रीन बिल्डिंग, पानी प्रबंधन और पारंपरिक तकनीक पर जोर
सौर ऊर्जा के दावे फेल, यूनिवर्सिटी हर महीने भर रही 50 लाख तक का बिजली बिल
गर्मी के कारण बढ़ रहा हार्ट अटैक का खतरा, डॉक्टरों ने जारी की चेतावनी
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
By Sanjay Dhiman