एमपी में बिजली उपभोक्ताओं पर बढ़ा भार: 3 महीने में 1.29% बढ़ा ईंधन सरचार्ज, 200 यूनिट खपत पर 1,800 रुपए तक पहुंचेगा बिल

Aman Vaishnav | Oct 01, 2026, 11:58 IST
भोपाल के बिजली उपभोक्ता पर महंगाई की दोहरी मार, ईंधन सरचार्ज बढ़ा , बिल में जुड़ रही ज्यादा रकम
भोपाल में बिजली उपभोक्ता पर महंगाई की दोहरी मार पड़ी है। ईंधन सरचार्ज 47 पैसे बढ़ाकर 5.06 फीसदी कर दिया गया है। तीन महीने पहले यह 3.77 फीसदी था। इससे पहले ही 4.8 फीसदी की सालाना बिजली टैरिफ वृद्धि लागू है। 200 यूनिट वाले उपभोक्ता का electricity bill 1,600 से करीब 1,800 रुपए तक जा सकता है। ऐसी बढ़ोतरी जारी रही तो 9 से 10 फीसदी तक बोझ बढ़ेगा।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • ईंधन सरचार्ज 47 पैसे बढ़ाकर 5.06 फीसदी कर दिया गया है।
  • यह सरचार्ज तीन महीने पहले 3.77 फीसदी था।
  • यह बढ़ोतरी पहले से लागू 4.8 फीसदी की सालाना टैरिफ वृद्धि के अतिरिक्त है।
  • 200 यूनिट वाले बिल पर करीब 200 रुपए ज्यादा देने पड़ सकते हैं।
  • एक हजार रुपए का बिल बढ़कर करीब 1,051 रुपए हो जाएगा।

तीन माह में बिजली महंगी कितनी?

रिपोर्ट के मुताबिक बिजली बिलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ईंधन सरचार्ज यानी fuel surcharge बिल में जुड़ने वाला अतिरिक्त शुल्क है। हाल ही में इसमें 47 पैसे की वृद्धि हुई है।



अब यह 5.06 फीसदी पर पहुंच गया है। बता दें कि सिर्फ तीन महीने पहले यह सरचार्ज 3.77 फीसदी था। तब से बिजली महंगी होती गई और सरचार्ज हर महीने करीब आधा फीसदी बढ़ा।



बिलिंग चक्र के हिसाब से सरचार्ज का सफर

जुलाई से अगस्त के बिलिंग चक्र (बिल की अवधि) में सरचार्ज 3.77 फीसदी था। अगस्त से सितंबर के चक्र में यह 4.59 फीसदी हुआ। 24 सितंबर से 23 अक्टूबर के चक्र में यह 5.06 फीसदी है। तीन महीने में कुल अंतर 1.29 फीसदी का रहा।



बिजली टैरिफ वृद्धि पर सरचार्ज का बोझ

यह सरचार्ज अकेली बढ़ोतरी नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक 4.8 फीसदी की सालाना बिजली टैरिफ वृद्धि पहले से लागू है। टैरिफ यानी बिजली की प्रति यूनिट दर। नया सरचार्ज उसके अतिरिक्त है। इसलिए रिपोर्ट ने इसे महंगाई की दोहरी मार बताया है।



ईंधन सरचार्ज को एफसीपीपीए सरचार्ज भी कहा जाता है। एफसीपीपीए (FCPPA – Fuel Cost and Power Purchase Adjustment) यानी लागत का समायोजन। रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। इसका सीधा असर MP electricity bill पर पड़ रहा है।



बिजली बिल बढ़ोतरी से जेब पर असर

इस बिजली बिल की बढ़ोतरी का हिसाब सीधा है। अभी 200 यूनिट खपत वाले उपभोक्ता लगभग 1,600 रुपए चुकाते हैं। उन्हें अब लगभग 1,800 रुपए तक देने पड़ सकते हैं। यानी करीब 200 रुपए ज्यादा।



इसी तरह एक हजार रुपए का बिजली बिल अब बढ़कर लगभग 1,051 रुपए हो जाएगा। 3.77 फीसदी पर इसी बिल में करीब 38 रुपए जुड़ते थे। अब 5.06 फीसदी पर करीब 51 रुपए जुड़ेंगे। सरचार्ज प्रतिशत में लगता है, इसलिए बड़ा बिल बड़ी रकम जोड़ता है। सवाल यह है कि यह सिलसिला कहां रुकेगा?



जानकारों का अनुमान: 9 रुपए प्रति यूनिट

जानकारों का कहना है कि औसत टैरिफ अभी 8 रुपए प्रति यूनिट है। आने वाले एक साल में यह बढ़कर 9 रुपए प्रति यूनिट तक पहुंच जाएगा। यानी एक साल में प्रति यूनिट दर एक रुपए बढ़ने का अनुमान है। साल में चार से पांच फीसदी की ऐसी ही वृद्धि होती रही। जानकारों के मुताबिक तब उपभोक्ताओं पर 9 से 10 फीसदी तक अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा।



आयोग ने घटाई कंपनियों की मांग

अब जरा पीछे चलते हैं। वर्ष 2026-27 के लिए नियामक आयोग के सामने बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया था। मध्य प्रदेश बिजली कंपनी जैसी वितरण कंपनियों की मांग 10.19 फीसदी की थी। सवाल उठता है कि मांग घटने के बाद भी बिल क्यों बढ़ रहे हैं?



मांग 10.19 फीसदी, मंजूरी सिर्फ 4.8 फीसदी

आयोग ने 10.19 फीसदी की मांग नामंजूर कर दी। उसने सालाना टैरिफ वृद्धि सिर्फ 4.8 फीसदी मंजूर की। यानी आयोग ने electricity tariff hike को मांग की आधी से भी कम रखा। रिपोर्ट के मुताबिक अब सरचार्ज जैसी अप्रत्यक्ष बढ़ोतरियों से बोझ बढ़ रहा है।



बिल देखते समय याद रखें ये आंकड़े

पहला आंकड़ा 5.06 फीसदी है। यह मौजूदा ईंधन सरचार्ज है। दूसरा आंकड़ा 4.8 फीसदी है। यह सालाना टैरिफ वृद्धि है। तीसरा आंकड़ा 8 रुपए प्रति यूनिट है। यह औसत टैरिफ है, जो एक साल में 9 रुपए तक पहुंच सकता है।



इन तीनों आंकड़ों को साथ रखकर देखिए। सरचार्ज 5.06 फीसदी, टैरिफ वृद्धि 4.8 फीसदी। दोनों एक साथ बिल पर असर डालते हैं। भोपाल की रिपोर्ट एक बात साफ करती है। टैरिफ के साथ सरचार्ज भी लगातार बढ़ रहा है।



FAQ



  1. मध्यप्रदेश में ईंधन सरचार्ज अब कितना हो गया है?
  2. मध्यप्रदेश में 200 यूनिट वाले बिजली उपभोक्ता का बिल कितना बढ़ सकता है?
  3. मध्यप्रदेश में आने वाले समय में बिजली टैरिफ में कितनी वृद्धि की संभावना है?
    जानकारों के अनुसार, औसत टैरिफ एक साल में 8 रुपए से बढ़कर 9 रुपए प्रति यूनिट तक पहुँच सकता है, जिससे उपभोक्ताओं पर 9 से 10 फीसदी तक अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा।
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