सिवनी जंबो सीताफल को मिला जीआई टैग, किसानों को ऐसे होगा फायदा
Manya Jain | Jun 23, 2026, 16:00 IST
madhya pradesh seoni jumbo sitafal gi tag
मध्यप्रदेश के सिवनी जिले के जंबो सीताफल को जीआई टैग मिला है। 800 ग्राम तक वजनी यह फल अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान बनाएगा। इसका स्वाद दूसरे सीताफलों से बेहतर माना जाता है। सिवनी के हजारों किसानों को इसका सीधा आर्थिक फायदा भी मिलेगा।
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्यप्रदेश के सिवनी जिले के जंबो सीताफल को भौगोलिक संकेतक यानी जीआई टैग मिल गया है।
- यह सीताफल अपने बड़े आकार और मीठे स्वाद के लिए पूरे देश में मशहूर है।
- भूतबंधानी क्षेत्र में उगने वाले कुछ फलों का वजन 800 ग्राम से एक किलो तक पहुंच जाता है।
- जीआई टैग मिलने से अब इस फल की नकल नहीं की जा सकेगी।
- सिवनी के हजारों किसानों को इससे सीधा आर्थिक फायदा मिलेगा।
सिवनी का सीताफल है खास क्यों
यह फल प्राकृतिक रूप से उगता है। इसमें कोई खास रासायनिक खाद नहीं डाली जाती। इसीलिए इसका स्वाद दूसरे सीताफलों से बेहतर माना जाता है।
जीआई टैग क्या होता है और क्यों जरूरी है
एक बार टैग मिलने के बाद दूसरा कोई उस नाम का इस्तेमाल नहीं कर सकता। इससे असली उत्पाद की पहचान सुरक्षित रहती है और किसानों को बाजार में ज्यादा दाम मिलते हैं।
2023 में किया था आवेदन
तीन साल की मेहनत के बाद अब यह मान्यता मिली है। यह उपलब्धि जिले के किसानों और प्रशासन दोनों के लिए बड़ी खुशखबरी है।
695 हेक्टेयर में होती है खेती
यह फल दिल्ली, मुंबई, नागपुर, रायपुर और वाराणसी जैसे बड़े शहरों में बिकता है। मांग देशभर में है और अब जीआई टैग से विदेशों में भी रास्ता खुलेगा।
सिर्फ फल नहीं, पूरी वैल्यू चेन तैयार
इसके पत्ते और छिलके जैविक खाद और दवाइयां बनाने में उपयोगी हैं। जिले में दो एफपीओ (FPO – Farmer Producer Organisation) और तीन पल्प प्रोसेसिंग प्लांट पहले से काम कर रहे हैं।
किसानों की आमदनी बढ़ेगी, रोजगार भी मिलेगा
प्रोसेसिंग गतिविधियों के बढ़ने से स्थानीय स्तर पर नए रोजगार भी मिलेंगे। यह टैग किसानों की पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूत करेगा।
कलेक्टर ने दी बधाई
उनका कहना था कि इससे क्षेत्रीय आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। अब सिवनी का सीताफल देश-विदेश के बाजारों में अपनी असली पहचान के साथ पहुंचेगा।
FAQ
- सिवनी के सीताफल को जीआई टैग कब और कैसे मिला?
वर्ष 2023 में भूतबंधानी सीताफल क्रॉप प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के जरिए आवेदन किया गया था। कलेक्टर और उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में यह प्रक्रिया पूरी हुई। तीन साल बाद 2026 में यह मान्यता मिली है। - जीआई टैग से किसानों को क्या फायदा होगा?
जीआई टैग मिलने से सिवनी के सीताफल की नकल नहीं हो सकेगी। बाजार में इसकी अलग पहचान और बेहतर दाम मिलेंगे। प्रोसेसिंग और निर्यात बढ़ने से स्थानीय रोजगार भी बढ़ेगा। - सिवनी में कितने किसान सीताफल उगाते हैं?
जिले में करीब 695 हेक्टेयर में सीताफल की खेती होती है। हर साल करीब 6090 मीट्रिक टन उत्पादन होता है। दो एफपीओ और तीन पल्प प्रोसेसिंग प्लांट भी काम कर रहे हैं।
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