Minister Pradyuman Singh Tomar (2)
हे मोहन! मध्यप्रदेश को फिजूलखर्ची से कब मिलेगी आजादी? पानी की तरह बह रहा जनता का पैसा
Ravi Awasthi | Aug 15, 2025, 17:44 IST
Photograph: (The Sootr)
मध्यप्रदेश में सरकारी बंगलों पर फिजूलखर्ची की एक बड़ी समस्या सामने आई है, जहां नेताओं और अधिकारियों ने लाखों रुपये अपने आवासों की सजावट में खर्च किए हैं। 78 साल बाद भी सत्ता के गलियारों में अंग्रेजी दौर की ठाठ-बाट वाली मानसिकता बनी हुई है।
BHOPAL. आजादी को 78 साल बीत गए, लेकिन मध्यप्रदेश के सत्ता के गलियारों में अब भी अंग्रेजी दौर की ठाठ-बाट वाली सोच जिंदा है। जिस प्रदेश पर चार लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज लदा हो, वहां सरकारी बंगलों की सजावट पर करोड़ों उड़ाना किसी शगल से कम नहीं।
हम बात कर रहे हैं राजधानी भोपाल की। यहां चंद नेताओं और अफसरों के 'शौक' पूरे करने के लिए खजाने से ऐसे खर्च हुए हैं, जिनसे एक पूरा का पूरा बंगला खड़ा हो सकता था। विधानसभा में हाल ही में सामने आई ये कहानी बताती है कि विकास के नाम पर मिलने वाला बजट, असल में किन रंगों और दीवारों पर चढ़ जाता है।
भोपाल में सरकारी आवासों को अपने शौक के मुताबिक संवारने के लिए लाखों रुपए खजाने से खर्च कराने वालों की यूं तो लंबी फेहरिस्त है, लेकिन यहां 'द सूत्र' ने उन चंद बंगलों को चुना है, जिन्हें संवारने पर ही बीते ढाई साल में ही 50-50 लाख रुपए से ज्यादा फूंक दिए गए हैं।
आजादी की इस वर्षगांठ पर 'द सूत्र' सीधा सवाल पूछता है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी, आखिर इस फिजूलखर्ची पर कब लगाम लगेगी? क्योंकि जिस रकम को महज बंगलों की देखभाल पर उड़ाया जा रहा है, उतने पैसों में तो स्कूल बन सकते हैं, अस्पताल सुधर सकते हैं, कर्ज का बोझ भी कुछ हद का उतारा जा सकता है।
मंत्री
![Minister Pradyuman Singh Tomar (2)]()
प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को अपने सरकारी बंगले में नया निजी दफ्तर चाहिए था। लिहाजा उनके प्रस्ताव पर पीडब्ल्यूडी ने करीब 82 लाख रुपए खर्च कर इसे तैयार किया। अब तोमर को कौन नहीं जानता। लो प्रोफाइल बनने की कोशिश करते हैं। ऊर्जा मंत्री हैं तो बिजली की बचत को लेकर भी स्वयं को संवेदनशील बताते हैं। वे अपने सरकारी आवास पर कूलर, पंखे, एसी इस्तेमाल नहीं करने की बात भी वह कह चुके हैं।
मंत्री
![Minister Govind Singh Rajput]()
खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के शौक को जान लीजिए। राजपूत यूं तो पिछली सरकार में भी मंत्री थे। उन्हें पूर्व में आवंटित बंगले में कोई बदलाव भी नहीं हुआ, लेकिन अब उनके मिजाज में बदलाव आया है। पूरे दिन लोगों से मेल मुलाकात और विभागीय कामकाज की मशक्कत को देखते हुए उन्होंने सुकून के लिए शयनकक्ष बनवाया है। उनके प्रस्ताव पर पीडब्लयूडी ने उनके बंगले पर सुविधायुक्त शयनकक्ष तैयार करने से लेकर दीगर साज-सजावट पर करीब 44 लाख रुपए खर्च कर दिए।
वित्त मंत्री
![Finance Minister Jagdish Deora]()
भारी भरकम बजट से बंगला संवारने वाले कैबिनेट मंत्रियों की लिस्ट में प्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा भी शामिल हैं। वित्त मंत्री को आम तौर पर सरकारी खर्च में मितव्ययता बरतने के लिए जाना जाता है, लेकिन राज्य की वित्तीय व्यवस्था संभाल रहे उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के आवास क्रमांक सी-5 को संवारने पर बीते ढाई साल में करीब 65 लाख रुपए खर्च किए गए हैं।
![Minister of State Pratima Bagri]()
पहली बार विधायक चुनने के साथ ही राज्य मंत्री बनीं प्रतिमा बागरी भी अपने सरकारी बंगले की सजावट को लेकर संवेदनशील नजर आती हैं। मोहन यादव के मंत्रिमंडल में सबसे कम उम्र की सदस्य प्रतिमा को बतौर मंत्री 74 बंगला क्षेत्र में डी-11 आवास आवंटित किया गया है। उन्होंने बंगले में कदम रखने से पहले इसे सजाने-संवारने का प्रस्ताव रखा। इस पर पीडब्ल्यूडी ने मंत्री की पसंद को ध्यान में रखते हुए करीब 71 लाख रुपए खर्च कर बंगले का हुलिया ही बदल दिया।
![Minister of State Narendra Patel]()
कुछ ऐसा ही बदलाव पहली बार के विधायक व मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल के काशियाना बंगला बी-2 में भी किया गया। पटेल युवा हैं, खान-पान के शौकीन भी हैं। इसे ध्यान में रखते हुए पीडब्ल्यूडी ने एक कदम आगे बढ़कर इस बंगले में करीब 65 लाख रुपए की लागत से मॉड्यूलर किचन व साज-सज्जा के दीगर काम कराए।
पूर्व विधायक
![Akash Vijayvargiya]()
सरकारी बंगलों को संवारने में यहां रहने वालों की पसंद का विशेष ख्याल लोक निर्माण विभाग रखता रहा है। अब शिवाजी नगर के सी—21 निवासी पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय गौसेवक हैं। इसके चलते उनके आवास पर गौशाला बनाने के साथ ही वीआईपी टॉयलेट व अन्य कामों पर खजाने से करीब 91 लाख रुपए इन ढाई सालों में खर्च किए गए।
विधायक
![MLA Ramesh Mendola]()
इंदौर के दिग्गज विधायक रमेश मेंदोला का बंगला नंबर सी-22 को संवारने में सरकार ने बीते करीब ढाई साल 57 लाख रुपए खर्च किए। इन पैसों में बंगले में पेंट्री, टॉयलेट निर्माण समेत साज सज्जा के अन्य काम हुए हैं।
अपने बंगलों को पसंद के मुताबिक नया लुक दिलाने में सिर्फ नेता ही नहीं कुछ अफसर भी अपने रुतबे का फायदा उठाने में पीछे नहीं हैं। भोपाल कलेक्टर आईएएस कौशलेंद्र विक्रम सिंह के 74 बंगला क्षेत्र स्थित आवास क्रमांक डी-11 को ही ले लीजिए।
इस बंगले मरम्मत और सजावट पर खजाने से करीब 76 लाख रुपए खर्च किए गए हैं। पहले 40 लाख रुपए की लागत से बंगले की मरम्मत हुई। फिर करीब 36 लाख रुपए की लागत से इसकी सजावट की गई। भारतीय प्रशासनिक सेवा के एक अन्य अधिकारी चंद्रप्रकाश ठाकुर कौशलेंद्र के पड़ोसी हैं। उनके आवास क्रमांक डी-18 को भी करीब 71 लाख 41 हजार रुपए खर्च कर संवारा गया है।
मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग का मुख्यालय कहने को इंदौर में है, लेकिन आयोग अपना एक कार्यालय भोपाल के 74 बंगला क्षेत्र के आवास क्रमांक बी-14 में भी चलाता है। इसे नया लुक देने पर सरकार ने करीब एक करोड़ रुपए साल 2023 से अब तक खर्च किए। सोचिए एक करोड़ में तो नया बंगला मय जमीन के मिल जाता।
ऐसे ही कुछ अराजनैतिक संगठनों को भी राजधानी में सरकारी बंगले आवंटित हैं। इनमें एक है श्री भारतीय किसान संघ...। शिवाजी नगर में संघ के आवास क्रमांक डी 103/4 को संवारने में करीब 64 लाख खजाने से खर्च किए गए तो 74 बंगला क्षेत्र में अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के आवास क्रमांक बी-26 को नया लुक देने पर लाखों रुपए खर्च किए गए हैं।
बंगले, मकान सरकारी हैं तो इनके रखरखाव का जिम्मा भी सरकार का है। लोक निर्माण विभाग के बजट में हर साल इसकी व्यवस्था होती है। कहने को राजधानी में आधा दर्जन श्रेणियों के करीब चार हजार आवास हैं,लेकिन बजट का करीब 70 फीसदी हिस्सा चंद मंत्रियों और अफसरों के बंगलों को उनकी पसंद के मुताबिक संवारने पर खर्च किया जा रहा है।
यह हम नहीं कह रहे, बल्कि हाल ही में विधानसभा के मानसून सत्र में लोक निर्माण विभाग के मंत्री राकेश सिंह ने स्वयं इन खर्चों का खुलासा किया है। कांग्रेस विधायक डॉ. हीरालाल अलावा के सवाल के लिखित जवाब में जो सच सामने आया, यह उसी की बानगी भर है।
जिस प्रदेश पर चार लाख करोड़ से ज्यादा का कर्ज है, जहां विकास कार्यों के लिए सरकार कर्ज पर कर्ज ले रही है, वहां सरकारी बंगलों की सजावट पर करोड़ों उड़ाना महज शगल नहीं, बल्कि जनता के साथ खुला मजाक है।
यह रकम अगर अस्पतालों, स्कूलों या रोजगार सृजन पर लगती तो कई जिंदगियां संवर सकती थीं। लेकिन अफसोस, सत्ता के गलियारों में साज-सज्जा की चमक-दमक ने जनता की जरूरतों पर स्याही फेर दी है। सरकारी धन की बर्बादी की इस मानसिकता से भी आजादी की जरूरत है।
मध्यप्रदेश सरकार की फिजूलखर्ची | मध्यप्रदेश सरकार | मंत्रियों और विधायकों के बंगले | MP सरकार पर कर्ज | मुख्यमंत्री मोहन यादव | सीएम मोहन यादव | सरकारी बंगलों पर खर्च। MP सरकार पर कर्ज
अगर आपको ये खबर अच्छी लगी हो तो 👉 दूसरे ग्रुप्स, 🤝दोस्तों, परिवारजनों के साथ शेयर करें📢🔃🤝💬👩👦👨👩👧👧👩
हम बात कर रहे हैं राजधानी भोपाल की। यहां चंद नेताओं और अफसरों के 'शौक' पूरे करने के लिए खजाने से ऐसे खर्च हुए हैं, जिनसे एक पूरा का पूरा बंगला खड़ा हो सकता था। विधानसभा में हाल ही में सामने आई ये कहानी बताती है कि विकास के नाम पर मिलने वाला बजट, असल में किन रंगों और दीवारों पर चढ़ जाता है।
भोपाल में सरकारी आवासों को अपने शौक के मुताबिक संवारने के लिए लाखों रुपए खजाने से खर्च कराने वालों की यूं तो लंबी फेहरिस्त है, लेकिन यहां 'द सूत्र' ने उन चंद बंगलों को चुना है, जिन्हें संवारने पर ही बीते ढाई साल में ही 50-50 लाख रुपए से ज्यादा फूंक दिए गए हैं।
आजादी की इस वर्षगांठ पर 'द सूत्र' सीधा सवाल पूछता है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी, आखिर इस फिजूलखर्ची पर कब लगाम लगेगी? क्योंकि जिस रकम को महज बंगलों की देखभाल पर उड़ाया जा रहा है, उतने पैसों में तो स्कूल बन सकते हैं, अस्पताल सुधर सकते हैं, कर्ज का बोझ भी कुछ हद का उतारा जा सकता है।
पढ़िए ये खास खबर...
पहले ये नाम देखिए, किसने कितने रुपए खर्च किए
|
मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर : एसी कूलर नहीं चलाएंगे, पर बंगले पर खर्चे 82 लाख
प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को अपने सरकारी बंगले में नया निजी दफ्तर चाहिए था। लिहाजा उनके प्रस्ताव पर पीडब्ल्यूडी ने करीब 82 लाख रुपए खर्च कर इसे तैयार किया। अब तोमर को कौन नहीं जानता। लो प्रोफाइल बनने की कोशिश करते हैं। ऊर्जा मंत्री हैं तो बिजली की बचत को लेकर भी स्वयं को संवेदनशील बताते हैं। वे अपने सरकारी आवास पर कूलर, पंखे, एसी इस्तेमाल नहीं करने की बात भी वह कह चुके हैं।
मंत्री गोविंद सिंह राजपूत : शयन कक्ष और दूसरे काम के लिए 44 लाख खर्च
Minister Govind Singh Rajput
खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के शौक को जान लीजिए। राजपूत यूं तो पिछली सरकार में भी मंत्री थे। उन्हें पूर्व में आवंटित बंगले में कोई बदलाव भी नहीं हुआ, लेकिन अब उनके मिजाज में बदलाव आया है। पूरे दिन लोगों से मेल मुलाकात और विभागीय कामकाज की मशक्कत को देखते हुए उन्होंने सुकून के लिए शयनकक्ष बनवाया है। उनके प्रस्ताव पर पीडब्लयूडी ने उनके बंगले पर सुविधायुक्त शयनकक्ष तैयार करने से लेकर दीगर साज-सजावट पर करीब 44 लाख रुपए खर्च कर दिए।
वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा : ढाई साल के दरमियान 65 लाख रुपए खर्च
Finance Minister Jagdish Deora
भारी भरकम बजट से बंगला संवारने वाले कैबिनेट मंत्रियों की लिस्ट में प्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा भी शामिल हैं। वित्त मंत्री को आम तौर पर सरकारी खर्च में मितव्ययता बरतने के लिए जाना जाता है, लेकिन राज्य की वित्तीय व्यवस्था संभाल रहे उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के आवास क्रमांक सी-5 को संवारने पर बीते ढाई साल में करीब 65 लाख रुपए खर्च किए गए हैं।
राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी: 71 लाख रुपए से बंगले को सजाया और संवारा
Minister of State Pratima Bagri
पहली बार विधायक चुनने के साथ ही राज्य मंत्री बनीं प्रतिमा बागरी भी अपने सरकारी बंगले की सजावट को लेकर संवेदनशील नजर आती हैं। मोहन यादव के मंत्रिमंडल में सबसे कम उम्र की सदस्य प्रतिमा को बतौर मंत्री 74 बंगला क्षेत्र में डी-11 आवास आवंटित किया गया है। उन्होंने बंगले में कदम रखने से पहले इसे सजाने-संवारने का प्रस्ताव रखा। इस पर पीडब्ल्यूडी ने मंत्री की पसंद को ध्यान में रखते हुए करीब 71 लाख रुपए खर्च कर बंगले का हुलिया ही बदल दिया।
राज्य मंत्री नरेंद्र पटेल: मॉड्यूलर किचन के नाम पर 65 लाख का खर्च
Minister of State Narendra Patel
कुछ ऐसा ही बदलाव पहली बार के विधायक व मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल के काशियाना बंगला बी-2 में भी किया गया। पटेल युवा हैं, खान-पान के शौकीन भी हैं। इसे ध्यान में रखते हुए पीडब्ल्यूडी ने एक कदम आगे बढ़कर इस बंगले में करीब 65 लाख रुपए की लागत से मॉड्यूलर किचन व साज-सज्जा के दीगर काम कराए।
पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय : गौशाला बनाने में खर्च हुए 91 लाख
Akash Vijayvargiya
सरकारी बंगलों को संवारने में यहां रहने वालों की पसंद का विशेष ख्याल लोक निर्माण विभाग रखता रहा है। अब शिवाजी नगर के सी—21 निवासी पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय गौसेवक हैं। इसके चलते उनके आवास पर गौशाला बनाने के साथ ही वीआईपी टॉयलेट व अन्य कामों पर खजाने से करीब 91 लाख रुपए इन ढाई सालों में खर्च किए गए।
विधायक रमेश मेंदोला : 57 लाख रुपए से पेंट्री, टॉयलेट आदि बनवाई
MLA Ramesh Mendola
इंदौर के दिग्गज विधायक रमेश मेंदोला का बंगला नंबर सी-22 को संवारने में सरकार ने बीते करीब ढाई साल 57 लाख रुपए खर्च किए। इन पैसों में बंगले में पेंट्री, टॉयलेट निर्माण समेत साज सज्जा के अन्य काम हुए हैं।
अफसरों के अलग ठाठ, कलेक्टर के बंगले में 76 लाख लगाए
इस बंगले मरम्मत और सजावट पर खजाने से करीब 76 लाख रुपए खर्च किए गए हैं। पहले 40 लाख रुपए की लागत से बंगले की मरम्मत हुई। फिर करीब 36 लाख रुपए की लागत से इसकी सजावट की गई। भारतीय प्रशासनिक सेवा के एक अन्य अधिकारी चंद्रप्रकाश ठाकुर कौशलेंद्र के पड़ोसी हैं। उनके आवास क्रमांक डी-18 को भी करीब 71 लाख 41 हजार रुपए खर्च कर संवारा गया है।
दफ्तरों के भी वारे-न्यारे
ऐसे ही कुछ अराजनैतिक संगठनों को भी राजधानी में सरकारी बंगले आवंटित हैं। इनमें एक है श्री भारतीय किसान संघ...। शिवाजी नगर में संघ के आवास क्रमांक डी 103/4 को संवारने में करीब 64 लाख खजाने से खर्च किए गए तो 74 बंगला क्षेत्र में अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के आवास क्रमांक बी-26 को नया लुक देने पर लाखों रुपए खर्च किए गए हैं।
ये तो महज बानगी है...
यह हम नहीं कह रहे, बल्कि हाल ही में विधानसभा के मानसून सत्र में लोक निर्माण विभाग के मंत्री राकेश सिंह ने स्वयं इन खर्चों का खुलासा किया है। कांग्रेस विधायक डॉ. हीरालाल अलावा के सवाल के लिखित जवाब में जो सच सामने आया, यह उसी की बानगी भर है।
द सूत्र व्यू...
यह रकम अगर अस्पतालों, स्कूलों या रोजगार सृजन पर लगती तो कई जिंदगियां संवर सकती थीं। लेकिन अफसोस, सत्ता के गलियारों में साज-सज्जा की चमक-दमक ने जनता की जरूरतों पर स्याही फेर दी है। सरकारी धन की बर्बादी की इस मानसिकता से भी आजादी की जरूरत है।
मध्यप्रदेश सरकार की फिजूलखर्ची | मध्यप्रदेश सरकार | मंत्रियों और विधायकों के बंगले | MP सरकार पर कर्ज | मुख्यमंत्री मोहन यादव | सीएम मोहन यादव | सरकारी बंगलों पर खर्च। MP सरकार पर कर्ज
thesootr links
- मध्यप्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- छत्तीसगढ़की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- राजस्थान की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- रोचक वेब स्टोरीज देखने के लिए करें क्लिक
- जॉब्स औरएजुकेशन की खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें
- निशुल्क वैवाहिक विज्ञापन और क्लासिफाइड देखने के लिए क्लिक करें
अगर आपको ये खबर अच्छी लगी हो तो 👉 दूसरे ग्रुप्स, 🤝दोस्तों, परिवारजनों के साथ शेयर करें📢🔃🤝💬👩👦👨👩👧👧👩
जबलपुर में भाजपा की बड़ी पदयात्रा, सीएम मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल दिखाएंगे ताकत, एक लाख लोगों के जुटने का दावा
By Ramanand Tiwari
प्रखरश्री दीदी ने जज की परीक्षा पास कर छोड़ा सांसारिक मोह; पहले पूरा किया माता-पिता का सपना, अब चुना संन्यास
By Amresh Kushwaha
एमपी में एप्को पर आर्थिक संकट के सवाल, 8 करोड़ का अनुदान रुका तो कर्मचारियों के भविष्य पर बढ़ी चिंता
By Ramanand Tiwari
पत्नी की निजी जानकारी के लिए RTI का इस्तेमाल गलत, राजस्थान हाई कोर्ट ने बरकरार रखा तलाक
By Mukesh Sharma
मध्यप्रदेश में IAS के 68 पद खाली, 4 अफसरों को दिल्ली जाने से रोका; आखिर कब पूरी होगी अधिकारियों की कमी?
By Ramanand Tiwari
मध्यप्रदेश में RTI के हजारों आवेदन अटके, 10 हजार 350 लोगों को अब तक नहीं मिली जानकारी, सरकारी जवाबदेही पर सवाल
By Ramanand Tiwari
महादेव सट्टा ऐप का मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर भारत लाया गया, करोड़ों के सट्टे और हवाला नेटवर्क की जांच तेज
By VINAY VERMA