/sootr/media/media_files/2026/03/01/mahakal-temple-2026-03-01-18-16-11.jpg)
News in Short
- महाकाल मंदिर में संध्या और शयन आरती के लिए 250 रुपए का शुल्क।
- भक्तों और धर्मस्व मंत्री ने नए शुल्क का विरोध किया।
- ऑनलाइन बुकिंग से व्यवस्था होगी, लेकिन असमर्थ श्रद्धालुओं के लिए कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं।
- महापौर ने आरोप लगाया कि इस फैसले की जानकारी नहीं दी गई।
- भक्तों का कहना है कि भगवान के दरबार में सभी समान होने चाहिए।
News in Detail
उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में संध्या और शयन आरती के लिए 250 रुपए का पास जरूरी होगा। मंदिर समिति ने भस्म आरती की तर्ज पर नई व्यवस्था शुरू की है। इससे रोजाना 6 लाख रुपए की अतिरिक्त आय होगी। हर महीने 1.80 करोड़ और साल में 22 करोड़ अतिरिक्त मिलेंगे। भक्तों ने इस फैसले का विरोध शुरू कर दिया है। धर्मस्व मंत्री भी इसके खिलाफ खड़े हो गए हैं। वहीं प्रशासन का कहना है कि इससे भीड़ नियंत्रित की जाएगी।
उज्जैन के महाकाल मंदिर में रंग-गुलाल खेलने पर लगा बैन, गर्भगृह हादसे से लिया सबक
आरती के लिए बुकिंग ऑनलाइन
मंदिर समिति का फैसला प्रशासनिक आदेश है। इसमें जनप्रतिनिधि, पंडित या भक्त मंडल से चर्चा नहीं की गई। पहले जो लोग भस्म आरती नहीं कर पाते थे, वे निशुल्क संध्या और शयन आरती करते थे। अब जिनके पास 250 रुपए नहीं होंगे, वे तीनों आरती में शामिल नहीं हो पाएंगे। उनके लिए केवल चलित दर्शन की व्यवस्था है। महाकाल मंदिर से जुड़े लोग प्रशासन के फैसले के खिलाफ हैं, लेकिन डर के कारण बोल नहीं रहे। आरती की बुकिंग पूरी तरह ऑनलाइन है। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन में असमर्थ लोगों के लिए कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है। मंदिर में हैल्प डेस्क लगाई गई है।
| आरती का नाम | दर्शन समय | रोजाना पास | शुल्क (रु.) | आमदनी (रु.) |
|---|---|---|---|---|
| भस्म आरती | सुबह 4 बजे | 1200 | 200 | 2,40,000 |
| संध्या आरती | शाम 6 बजे | 1200 | 250 | 3,00,000 |
| शयन आरती | रात 10 बजे | 1200 | 250 | 3,00,000 |
| कुल | 3600 | 700 | 8,40,000 |
उज्जैन के बाबा महाकाल मंदिर के पास कितनी है चल-अचल संपत्ति, कैसे उठा यह मुद्दा?
भगवान के दरबार में राजा और प्रजा समान
खरगोन के इंजीनियर राजेंद्र पाटीदार महाकाल की संध्या और शयन आरती में वर्षों से शामिल होते रहे हैं। पाटीदार ने कहा कि 250 रुपए शुल्क देने वालों को मंदिर के नीचे हॉल में जगह मिली। बाकी श्रद्धालुओं को ऊपरी हॉल और बाहरी प्रांगण से बाहर कर दिया गया। यह दृश्य दुखद है। भगवान के दरबार में राजा और प्रजा समान होने चाहिए। महाकाल के नियम सभी प्रजा के लिए समान होने चाहिए।
महाकाल मंदिर के पुजारी पं. विनय शर्मा ने कहा, प्रशासन और मंदिर समिति ने पुजारियों से परामर्श नहीं लिया। नई व्यवस्था में 25% सीटें गरीब और बाहरी श्रद्धालुओं के लिए ऑफलाइन आरक्षित की जाएं। जिनकी ऑनलाइन बुकिंग तकनीकी कारणों या जानकारी के अभाव में न हो पाए। उन्होंने कहा, जो श्रद्धालु बार-बार तीर्थस्थल आते हैं, उन्हें शांतिपूर्ण दर्शन मिलना चाहिए।
दो मार्च को होली खेलेंगे बाबा महाकाल, 4 मार्च से बदलेगा बाबा की आरती का समय
महाकाल में आरती दर्शन के लिए देने होंगे पैसे, भस्मारती की तर्ज पर होगी ऑनलाइन बुकिंग
महापौर ने लगाए ये आरोप
उज्जैन के महापौर मुकेश टटवाल ने कहा, महाकाल मंदिर समिति के एक्ट के अनुसार महापौर समिति का सदस्य होता है। कलेक्टर अध्यक्ष होते हैं। इस शुल्क के निर्णय पर कोई बैठक नहीं हुई। मुझे इस विषय में कोई जानकारी नहीं दी गई। समिति में ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं आया। उन्होंने कहा, बाहर से आने वाले और स्थानीय लोग बिना तकलीफ दर्शन कर सकें, यह ठीक है। लेकिन निर्णय लेते समय मुझे बैठक में नहीं बुलाया गया। मंदिर समिति की कोई बैठक नहीं हुई। शिवरात्रि वाली बैठक का ध्यान नहीं, केवल एक बजट बैठक हुई।
वहीं उज्जैन नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष रवि राय ने कहा, महाकाल सरल हैं, एक लोटा जल से प्रसन्न होते हैं। दुर्भाग्य है कि उनके दरबार में नए आय साधन ढूंढे जा रहे हैं। मंदिर समिति स्वीकार करती है कि दान-पेटी और सोना-चांदी से 170-180 करोड़ की आय हो रही है। फिर श्रद्धालुओं पर शुल्क क्यों? उन्होंने कहा, कर्मचारियों का खर्च बढ़ा, लेकिन भक्तों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रहीं।
/sootr/media/agency_attachments/dJb27ZM6lvzNPboAXq48.png)
Follow Us