भाद्रपद शुक्ल सप्तमी को बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार, शेषनाग मुकुट और मस्तक पर त्रिनेत्र-चंद्र से सजे बाबा
Kaushiki | Aug 30, 2025, 08:35 IST
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30 अगस्त को भाद्रपद शुक्ल सप्तमी पर, विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल का भस्म आरती और दिव्य श्रृंगार किया गया। हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया।
बाबा महाकालभस्म आरती:आज (30 अगस्त) भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि शनिवार को उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सुबह 4 बजे कपाट खोले गए।
इस विशेष दिन पर भगवान महाकाल का दिव्य श्रृंगार किया गया, जिसमें उनके मस्तक पर त्रिनेत्र और चंद्र सुशोभित किए गए। इस अलौकिक दृश्य को देखने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु अल सुबह से ही मंदिर परिसर में एकत्र हो गए थे।
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सबसे पहले, भगवान महाकाल का जल से अभिषेक किया गया जिसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक पूजन किया गया। यह पूजन विधि भगवान को प्रसन्न करने और उनकी दिव्यता को बढ़ाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
अभिषेक के बाद, मंत्रोच्चारण के साथ भगवान को भस्म अर्पित की गई। यह भस्म आरती महाकाल मंदिर की सबसे अनूठी और प्रसिद्ध परंपरा है, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं।
भस्म आरती के बाद, भगवान महाकाल का भव्य श्रृंगार किया गया। इस दौरान उन्हें शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल और रुद्राक्ष की माला धारण कराई गई।
सुगंधित फूलों से बनी मालाओं ने उनके स्वरूप को और भी मनमोहक बना दिया। विशेष रूप से, बाबा को फल और विभिन्न प्रकार के मिष्ठान का भोग लगाया गया।
उनका आभूषणों से आकर्षक श्रृंगार भक्तों को मोहित कर रहा था। इस अलौकिक श्रृंगार को देखकर ऐसा लग रहा था मानो स्वयं कैलाश से भोले बाबा भक्तों को आशीर्वाद देने आए हों।
हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने इस महाकालेश्वर दर्शन का लाभ उठाया। पूरा मंदिर परिसर "जय महाकाल" के जयकारों से गूंज रहा था, जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया।
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इस विशेष दिन पर भगवान महाकाल का दिव्य श्रृंगार किया गया, जिसमें उनके मस्तक पर त्रिनेत्र और चंद्र सुशोभित किए गए। इस अलौकिक दृश्य को देखने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु अल सुबह से ही मंदिर परिसर में एकत्र हो गए थे।
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बाबा का जल से अभिषेक
अभिषेक के बाद, मंत्रोच्चारण के साथ भगवान को भस्म अर्पित की गई। यह भस्म आरती महाकाल मंदिर की सबसे अनूठी और प्रसिद्ध परंपरा है, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं।
शनिवार को महाकाल का भव्य श्रृंगार
सुगंधित फूलों से बनी मालाओं ने उनके स्वरूप को और भी मनमोहक बना दिया। विशेष रूप से, बाबा को फल और विभिन्न प्रकार के मिष्ठान का भोग लगाया गया।
उनका आभूषणों से आकर्षक श्रृंगार भक्तों को मोहित कर रहा था। इस अलौकिक श्रृंगार को देखकर ऐसा लग रहा था मानो स्वयं कैलाश से भोले बाबा भक्तों को आशीर्वाद देने आए हों।
हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने इस महाकालेश्वर दर्शन का लाभ उठाया। पूरा मंदिर परिसर "जय महाकाल" के जयकारों से गूंज रहा था, जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया।
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