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महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती दर्शन
मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकाल भस्म आरती की दर्शन व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब भक्तों को बुकिंग के साथ ही उनका बैठने का स्थान भी पता चल जाएगा, जिससे दर्शन का अनुभव अधिक शांतिपूर्ण और व्यवस्थित होगा।
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बैठने की जगह अब पहले से तय होगी
अब भक्तों को भस्म आरती की बुकिंग के साथ ही यह पता चल जाएगा कि उन्हें आरती के दौरान किस मंडपम (नंदी, गणेश या कार्तिकेय) में बैठना है। इससे पहले से चली आ रही अनिश्चितता खत्म हो जाएगी।
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'पहले आओ, पहले पाओ' का सिद्धांत
उज्जैन महाकाल मंदिर की नई व्यवस्था इसी सिद्धांत पर आधारित होगी। जो भक्त पहले आवेदन करेंगे, उन्हें आगे की पंक्ति में बैठने का मौका मिलेगा, जिससे सभी को समान अवसर मिलेगा।
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विवादों और धक्का-मुक्की पर रोक
भक्तों को अपनी बैठने की जगह पहले से पता होने से आगे बैठने को लेकर होने वाले विवादों और धक्का-मुक्की की स्थिति पर पूरी तरह से लगाम लगेगी।
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वीआईपी कल्चर होगा खत्म
यह नई व्यवस्था इस धारणा को खत्म कर देगी कि केवल वीआईपी ही सबसे आगे बैठकर दर्शन कर सकते हैं। यह कदम सभी बाबा महाकाल के भक्तों के लिए समानता सुनिश्चित करेगा।
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वर्चुअल अनुमति और नंबर जारी होंगे
मंदिर समिति श्रद्धालुओं को एक वर्चुअल अनुमति के साथ-साथ एक नंबर भी जारी करेगी, जो उनकी बैठने की जगह को दर्शाएगा।
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भक्तों को मिलेगी सुविधा और मानसिक शांति
इस बदलाव से भक्तों को मानसिक शांति मिलेगी क्योंकि उन्हें अपनी सीट की चिंता नहीं करनी पड़ेगी, जिससे वे शांतिपूर्ण तरीके से दर्शन कर पाएंगे।
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तकनीकी नवाचारों का हिस्सा
उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह के मुताबिक, यह व्यवस्था मंदिर में किए जा रहे अन्य तकनीकी नवाचारों का ही एक हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भक्तों के अनुभव को बेहतर बनाना है।