MP में 10 साल बाद प्रमोशन का नया गणित, 85% पदोन्नति आरक्षित वर्ग के नाम!

Amresh Kushwaha | Jul 04, 2026, 09:24 IST
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एमपी में पदोन्नति का नया गणित
एमपी में पदोन्नति का नया गणित

मध्यप्रदेश मंत्रालय में क्लास-1 अफसरों की पदोन्नति में आरक्षित वर्ग को 85% पद मिलेंगे। अंडर सेक्रेटरी के 15 में से 14 पद एससी-एसटी वर्ग के पास हैं। डीपीसी एक-दो दिन में संभावित है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्यप्रदेश मंत्रालय में 10 साल बाद पदोन्नति प्रक्रिया शुरू हुई है।
  • क्लास-1 अफसरों के प्रमोशन में आरक्षित वर्ग को बड़ा फायदा मिलेगा।
  • डीपीसी में 85% पद एससी-एसटी वर्ग के अफसरों को मिलेंगे।
  • अंडर सेक्रेटरी के 15 पदों में से 14 पर एससी-एसटी अफसर हैं।
  • डीपीसी एक-दो दिन में हो सकती है, आदेश जल्द जारी होंगे।
मध्यप्रदेश के मंत्रालय संवर्ग में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। लंबे समय बाद पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू हुई है। पूरे दस साल बाद यह प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। इसमें आरक्षित वर्ग के अफसरों को सबसे ज्यादा फायदा मिलने वाला है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, क्लास-1 अफसरों के प्रमोशन का पूरा समीकरण बदल गया है। डीपीसी यानी विभागीय पदोन्नति समिति एक-दो दिन में हो सकती है। इसे अंग्रेजी में डीपीसी (Departmental Promotion Committee) कहा जाता है। इस बैठक के नतीजे कई अफसरों का भविष्य तय करेंगे।

85% पद आरक्षित वर्ग को

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंत्रालय में तीन बड़े पदों पर डीपीसी होनी है। यह डीपीसी अपर सचिव, उप सचिव और अवर सचिव के पदों के लिए है। इन तीनों पदों पर कुल पदोन्नति में से 85% पद आरक्षित वर्ग को मिलेंगे। यह पद एससी-एसटी वर्ग के अफसरों के लिए तय हैं। एससी-एसटी का मतलब अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति होता है।

इस बार आरक्षित वर्ग को बड़ी तरजीह मिल रही है। सामान्य वर्ग के अफसरों के लिए मौके काफी सीमित रह गए हैं। कई अफसर इस समीकरण को लेकर मंत्रालय में चर्चा कर रहे हैं।

अंडर सेक्रेटरी में असंतुलन

मंत्रालय में अभी अंडर सेक्रेटरी यानी अवर सचिव के 15 पद भरे हुए हैं। इनमें से 14 अफसर एससी-एसटी वर्ग से हैं। सिर्फ एक अफसर सामान्य वर्ग से है। इस पद पर आरक्षित वर्ग साफ तौर पर हावी हो गया है। पिछले कुछ सालों में यह संतुलन धीरे-धीरे बदला है।

उप सचिव के 13 पद फिलहाल पूरी तरह खाली पड़े हैं। इन पदों पर अभी तक एक भी अफसर तैनात नहीं है। आने वाली डीपीसी में इन खाली पदों को भरने की तैयारी है।

रोस्टर से तय होते पद

डीपीसी की प्रक्रिया में सीनियरिटी और आरक्षण रोस्टर दोनों देखे जाते हैं। रोस्टर से ही तय होता है कि कौन सा पद किस वर्ग को मिलेगा। मंत्रालय में क्लास-1 अफसर सबसे बड़े पदों पर काम करते हैं। क्लास-2 अफसर इनसे एक स्तर नीचे काम करते हैं। दोनों वर्गों की पदोन्नति के नियम अलग-अलग होते हैं।

खाली पदों की तस्वीर

मंत्रालय संवर्ग में कई पद खाली चल रहे हैं। अतिरिक्त सचिव के पदों पर तीन डीपीसी होनी हैं। उप सचिव के 13 पद स्वीकृत हैं। वहीं, इनमें से एक भी पद भरा नहीं है।

अवर सचिव के कुल 57 पद स्वीकृत हैं। इनमें से सिर्फ 15 पदों पर अफसर कार्यरत हैं। बाकी 42 पदों पर डीपीसी के जरिए पदोन्नति होनी है। स्टाफ ऑफिसर के 18 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 10 भरे हुए हैं। आठ पदों पर अभी भी डीपीसी बाकी है।

सेक्शन ऑफिसर यानी एसओ के 145 पद स्वीकृत हैं। इनमें से केवल 38 पद ही भरे हुए हैं। बाकी बचे 107 पदों पर पदोन्नति होनी है। यह आंकड़े बताते हैं कि मंत्रालय में खाली पदों की संख्या काफी बड़ी है।

पद का नामस्वीकृत पद (Sanctioned)भरे हुए पद (Filled)खाली पद (Vacant) / टिप्पणी
अतिरिक्त सचिव——3 डीपीसी (DPC) होनी बाकी हैं
उप सचिव13013 (एक भी पद भरा नहीं है)
अवर सचिव571542 (डीपीसी के जरिए पदोन्नति होनी है)
स्टाफ ऑफिसर181008 (डीपीसी होना बाकी है)
सेक्शन ऑफिसर (SO)14538107 (पदोन्नति होनी बाकी है)

ग्रेड में भी बड़ी पदोन्नति

मंत्रालय में कुल करीब 950 अफसर और कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें से 463 अफसरों और कर्मचारियों की पदोन्नति पहले ही हो चुकी है। शुक्रवार को सहायक ग्रेड-2 के 162 कर्मियों को पदोन्नत किया गया है। इन्हें एएसओ (Assistant Section Officer) के पद पर प्रमोशन दिया गया है। एएसओ का मतलब सहायक अनुभाग अधिकारी होता है।

इसके अलावा सहायक ग्रेड-3 से भी बड़ी पदोन्नति हुई है। सहायक ग्रेड-3 से सहायक ग्रेड-2 में 301 कर्मियों को प्रमोशन मिला है। इन सभी पदोन्नति के आदेश शुक्रवार को ही जारी कर दिए गए हैं। यानी इन कर्मचारियों को अब नए पद पर काम मिलेगा।

क्लास-1 और क्लास-2 अफसरों की डीपीसी अलग विभाग करेगा। यह जिम्मेदारी सामान्य प्रशासन विभाग को दी गई है। इसे संक्षेप में जीएडी (General Administration Department) भी कहा जाता है। सहायक संवर्ग के पदों पर पदोन्नति की प्रक्रिया अलग से चलती है। इसका मतलब है कि सभी वर्गों के लिए अलग रास्ता तय किया गया है।

दस साल का इंतजार

मंत्रालय में यह पदोन्नति प्रक्रिया दस साल बाद शुरू हुई है। इस लंबे अंतराल में कई अफसर प्रमोशन के इंतजार में रहे। कुछ अफसर बिना पदोन्नति के ही रिटायरमेंट के करीब पहुंच गए हैं। इसलिए इस बार की डीपीसी को अहम माना जा रहा है। सभी वर्गों के अफसर इसके नतीजों का इंतजार कर रहे हैं।

आगे क्या होगा

अपर सचिव, उप सचिव और अवर सचिव पदों की डीपीसी जल्द होगी। यह बैठक एक-दो दिन के भीतर हो सकती है। इसके तुरंत बाद पदोन्नति के आदेश जारी होने की उम्मीद है। इस पूरी प्रक्रिया पर अफसरों और कर्मचारियों की नजर टिकी हुई है।

कई अफसर सालों से प्रमोशन का इंतजार कर रहे थे। अब यह इंतजार जल्द खत्म हो सकता है। मंत्रालय के गलियारों में इस खबर को लेकर हलचल है। आने वाले दिनों में और भी साफ तस्वीर सामने आएगी।

बदलाव का असर

इस पूरी कवायद से मंत्रालय के कामकाज पर भी असर पड़ेगा। खाली पदों के भरने से रोजमर्रा का काम तेज हो सकता है। फाइलों के निपटारे की रफ्तार भी बढ़ने की उम्मीद है। नए अफसरों को बड़ी जिम्मेदारी मिलने से कामकाज में सुधार आएगा।

FAQ

  1. मध्यप्रदेश मंत्रालय में डीपीसी क्या है?
    डीपीसी यानी डिपार्टमेंटल प्रोमोशन कमेटी वह समिति है जो सरकारी अफसरों की पदोन्नति तय करती है। इस बैठक में पदोन्नति के लिए योग्य अफसरों के नामों पर विचार होगा और उसके बाद पदोन्नति के आदेश जारी किए जाएंगे।
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