एमपी में मौलाना महमूद मदनी के बिगड़े बोल, जुल्म के खिलाफ हर बार होगा जिहाद, बीजेपी ने किया पलटवार

Sandeep Kumar | Nov 29, 2025, 20:05 IST
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भोपाल में जमीयत उलेमा-ए-हिंद की बैठक हुई। मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि इस्लाम और मुसलमानों के खिलाफ नफरत बढ़ रही है। भाजपा ने इस बयान को देश को बांटने वाला कहा।

BHOPAL. भोपाल में जमीयत उलेमा-ए-हिंद की गवर्निंग बॉडी बैठक हुई। इस दौरान मौलाना महमूद मदनी ने विवादित बयान दिया हैं। उन्होंने कहा जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा। इस्लाम में जिहाद का मतलब अन्याय और ज़ुल्म के खिलाफ संघर्ष है।



मदनी ने कहा कि इस्लाम और मुसलमानों के खिलाफ नफरत बढ़ रही है। जिहाद शब्द को जानबूझकर आतंक और हिंसा से जोड़ा जा रहा है। लव जिहाद, लैंड जिहाद, थूक जिहाद जैसे शब्द मुसलमानों को बदनाम करने के लिए बनाए गए हैं।



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मुसलमानों को टारगेट किया जा रहा

महमूद मदनी ने कहा कि मुसलमानों को लगातार टारगेट किया जा रहा है। उनके धार्मिक पहनावे, पहचान और जीवनशैली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। मुसलमान इस देश के बराबरी के नागरिक हैं। शिक्षा, रोजगार और सामाजिक बराबरी के अधिकार कमजोर हो रहे हैं।



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बीजेपी ने साधा मदनी पर निशाना

जमीयत उलेमा-ए-हिंद प्रमुख मौलाना महमूद मदनी के बयान पर भाजपा ने पलटवार किया। बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने कहा कि मदनी का बयान भड़काऊ और देश को बांटने वाला है। जिहाद के नाम पर भारत और विदेश में आतंक फैलाया गया है। मदनी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को सुप्रीम कहलाने का अधिकार नहीं है। इस बयान पर सुप्रीम कोर्ट को स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई करनी चाहिए।



सहकारिता, खेल और युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान की हवा-पानी में जीकर वंदे मातरम पर सवाल उठाना संवैधानिक अपमान है।



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न्यायपालिका पर मदनी ने उठाए सवाल

मौलाना मदनी ने न्यायपालिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अदालतों को निष्पक्ष रहना चाहिए। कुछ फैसलों से संदेह उत्पन्न हुआ है। सुप्रीम कोर्ट तभी सुप्रीम कहलाएगा जब वह संविधान की पाबंदी करेगा। उन्होंने दावा किया कि देश की बड़ी आबादी खामोश है। अगर यह तबका नफरत फैलाने वालों के साथ गया, तो देश के लिए खतरा हो सकता है।



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वक्फ मुसलमानों की अमानत

मुसलमानों को असुरक्षित महसूस कराया जा रहा है। मुसलमानों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई, मॉब लिंचिंग और आर्थिक बहिष्कार हो रहा है। नफरती अभियानों का माहौल बनाया जा रहा है। धर्मांतरण कानूनों के जरिए मुसलमानों की दावत और तालीम पर रोक लगाई गई है। कुछ संगठनों को खुली छूट दी गई है। वक्फ संपत्तियों पर सरकार का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वक्फ मुसलमानों की अमानत है।



जिंदा कौम समझौता नहीं करती

मुर्दा कौम हालात के आगे सरेंडर कर देती है। जिंदा कौम अपने हक और पहचान पर समझौता नहीं करती। उन्होंने नौजवानों से मायूसी छोड़ने की अपील की। साथ ही संवैधानिक अधिकारों के लिए जागरूक रहने की सलाह दी।





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