आईएएस संतोष वर्मा की एक और मुश्किल बढ़ी, हाईकोर्ट के लिए ये क्या बोल दिया

आईएएस संतोष वर्मा का एक और वीडियो सामने आया, जिसमें वह हाईकोर्ट पर भेदभाव का आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने एमपी सिविल जज भर्ती परीक्षा में एससी-एसटी उम्मीदवारों के चयन नहीं होने पर सवाल उठाए। उन्होंने इसे भर्ती में भेदभाव करार दिया।

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The Sootr
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Photograph: (The Sootr)

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BHOPAL. अजाक्स के प्रांत अध्यक्ष आईएएस संतोष वर्मा की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं। अब उनका एक और वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में संतोष वर्मा हाईकोर्ट को ही कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। यह मामला सिविल भर्ती परीक्षा में एससी-एसटी कैंडिडेट्स के नहीं चुने जाने का है। इसमें प्रमोटी आईएएस वर्मा सीधे-सीधे हाईकोर्ट पर ही भर्ती में भेदभाव का आरोप लगा रहे हैं।

'एससी-एसटी में नहीं मिले योग्य उम्मीदवार'

आइए पहले जानते हैं कि आखिर उन्होंने एमपी सिविल जज भर्ती परीक्षा को लेकर क्या कहा था। एक आयोजन में अजाक्स अध्यक्ष संतोष वर्मा ने कहा कि अभी जो सिविल जज की परीक्षा हुई। उसमें हमारे एससी-एसटी के लोग सेलेक्ट नहीं हुए। उनको योग्य उम्मीदवार नहीं मिले। हमारे समाज का व्यक्ति ऑल इंडिया सर्विसेज में आईएएस बन सकता है। आईपीएस बन सकता है, राज्य प्रशासनिक सेवा में डिप्टी कलेक्टर बन सकता है। डीएसपी बन सकता है, लेकिन सिविल जज नहीं बन सकता है। क्यों नहीं बन सकता सिविल जज।

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सिविल जज को लेकर क्या विशेषता है?

उन्होंने सवाल किया कि आखिर ऐसी सिविल जज को लेकर क्या विशेषता है। हमारा व्यक्ति नहीं बन सकता है। हमारा बेटा, हमारे समाज का बच्चा आखिर क्यों नहीं बन सकता सिविल जज? हमारे समाज के बच्चे-बिटिया क्लेट क्लियर करने के बाद बड़े-बड़े शहरों में जाकर वकालत की डिग्री हासिल करते हैं। एलएलबी करते हैं, एलएलएम करते हैं। उसके बाद एग्जाम देकर बड़े बड़े सर्विसेज में सेलेक्ट भी हो जाते हैं। उनके पासिंग मार्क्स 75 परसेंट से ऊपर हैं। लेकिन सिविल जज की ऐसी कौन सी एग्जाम होती है जिसमें हमारा बच्चा 40 परसेंट-50 परसेंट मार्क्स नहीं ला पाता है। 

हाईकोर्ट पर ही उठा दिया सवाल

आपने उसके लिए कट ऑफ मार्क्स रख दिया 50 परसेंट। और आपने तय कर लिया कि हमको इनको 49.95 नंबर देना है। 50 नंबर नहीं देना है। आपने तय कर लिया है कि इंटरव्यू में इनको 20 नंबर नहीं देना है। इसको साढ़े 19 नंबर देना है। तो भाई कौन सिविल जज बना देगा हमारे बच्चों को? ये कौन सा आरक्षण है? ये कौन सा नियम है? और ये कौन कर रहा है। ये हमारा हाईकोर्ट कर रहा है। जिससे हम न्याय की उम्मीद करते हैं। जिससे हम बाबा साहेब के संविदान के हिसाब से चलने की गारंटी मांगते हैं। ये वहीं से हो रहा है। जिस तरह से जूडिशियरी से... न्यायपालिका से आपका बीज समाप्त किया जा रहा है। जब हमारा बेटा सिविल जज बनेगा, तभी तो वो हाईकोर्ट का जज बनेगा। नहीं तो कोई चांस नहीं है। तो आपने यदि बीज ही नष्ट कर दिया तो आप करोगे क्या? न्याय की उम्मीद किससे करोगे? 

हाईकोर्ट ने दिए हैं रिजल्ट में सुधार कर दोबारा जारी करने के निर्देश

बता दें कि मध्य प्रदेश सिविल जज भर्ती परीक्षा विवादों में आ गई थी। इसमें SC-ST कैंडिडेट्स का सेलेक्शन नहीं हुआ था। इसके बाद विपक्षी दलों ने इसे लेकर सवाल किए थे। साथ ही कहा था कि आरक्षण नियमों का पालन नहीं हुआ।

इसके बाद मामला एमपी हाईकोर्ट में चला गया। इसमें हाईकोर्ट ने सरकार से सख्ती से सवाल किया कि ऐसा क्यों हुआ। साथ ही निर्देश दिया कि वे दोबारा इन कैंडिडेट्स के परीक्षा परिणाम में सुधार कर जारी करें। 

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