मध्यप्रदेश में एल्डरमैन की बहुप्रतीक्षित सूची आखिरकार जारी, 492 मनोनीत पार्षदों की नियुक्ति, चंबल होल्ड
News In Short
- मध्यप्रदेश सरकार ने 123 नगर परिषदों में 492 एल्डरमैन (मनोनीत पार्षद) की नियुक्ति की आधिकारिक सूची जारी की।
- हर नगर परिषद में अधिकतम 4 एल्डरमैन रखे गए हैं, जिन्हें सरकार नियुक्त करती है, जनता सीधे नहीं चुनती।
- चंबल और बुंदेलखंड क्षेत्र की सूची अभी होल्ड पर है क्योंकि कई नामों पर सहमति नहीं बन पाई।
- जल्द ही दूसरी सूची आने के संकेत हैं और अध्यक्ष-उपाध्यक्ष पदों पर भी नियुक्तियां हो सकती हैं।
News In Detail
एल्डरमैन नियुक्ति: लंबा इंतजार खत्म
मध्यप्रदेश में नगरीय निकायों को लेकर काफी समय से इंतजार था। कई बार नाम तय हुए, लेकिन सूची जारी नहीं हो सकी। राजनीतिक और संगठनात्मक स्तर पर मंथन होता रहा। आखिरकार रविवार को सरकार ने मुहर लगा दी और 492 एल्डरमैन की नियुक्ति की आधिकारिक घोषणा हो गई।
नगरीय प्रशासन विभाग (Urban Administration Department) की ओर से जारी आधिकारिक आदेश में 123 नगर परिषदों के नाम शामिल हैं। 25 से ज्यादा जिलों को इस पहली सूची में कवर किया गया है।
किन जिलों में हुई नियुक्ति?
पहले चरण में सागर, रीवा, शहडोल, उमरिया, कटनी, डिंडोरी, नरसिंहपुर, बालाघाट और सिवनी जैसे जिले शामिल हैं। इनके अलावा छिंदवाड़ा, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल, खरगोन, धार, देवास, रतलाम, मंदसौर और नीमच भी सूची में हैं।
विस्तृत नामों की पूरी सूची नगरीय प्रशासन विभाग की ओर से अलग से जारी की गई है। प्रशासनिक हलकों में इसे बड़ा फैसला माना जा रहा है।
एल्डरमैन की देखें सूची-
एल्डरमैन होते कौन हैं?
एल्डरमैन को हिंदी में मनोनीत पार्षद कहते हैं। इन्हें जनता वोट देकर नहीं चुनती, बल्कि सरकार खुद नियुक्त करती है। इनकी भूमिका नगर परिषद की बैठकों में भाग लेना, विकास योजनाओं पर सुझाव देना और स्थानीय मुद्दों को उठाना है। प्रशासनिक फैसलों में ये सलाहकार और भागीदार दोनों की तरह काम करते हैं।
कार्यकाल की बात करें तो यह नगर परिषद के कार्यकाल तक या अगली अधिसूचना (Notification) जारी होने तक प्रभावी रहेगा।
चंबल-बुंदेलखंड की सूची होल्ड क्यों?
पूरी तस्वीर अभी साफ नहीं हुई है। चंबल और बुंदेलखंड क्षेत्र की नगर परिषदों के नाम अभी तय नहीं हो सके। कई जगह स्थानीय नेताओं और संगठन के बीच नामों पर सहमति नहीं बन पाई, इसलिए वहां की सूची रोकनी पड़ी।
सूत्रों के मुताबिक जल्द ही दूसरी सूची जारी होने की संभावना है। इससे साफ है कि नियुक्ति की प्रक्रिया अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
आगे क्या होने वाला है?
अब सरकार का फोकस नगर निगमों और नगर पालिका मंडलों पर रहेगा। संकेत मिल रहे हैं कि परिषदों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों पर भी जल्द नियुक्तियां हो सकती हैं। राजनीतिक संतुलन साधने की कवायद और तेज होगी।
यह कदम सिर्फ नियुक्ति तक सीमित नहीं है। इससे यह भी साफ होता है कि सरकार अब नगरीय निकायों को सक्रिय करने के मोड में आ गई है। स्थानीय स्तर पर विकास के फैसलों की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
FAQ
- एल्डरमैन और सामान्य पार्षद में क्या फर्क होता है?
सामान्य पार्षद को जनता सीधे वोट देकर चुनती है, जबकि एल्डरमैन (मनोनीत पार्षद) को सरकार नियुक्त करती है। एल्डरमैन का मुख्य काम नगर परिषद की बैठकों में भाग लेना, विकास कार्यों पर सुझाव देना और स्थानीय समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाना है। इनके पास मतदान का अधिकार हो भी सकता है और नहीं भी, यह राज्य के कानून पर निर्भर करता है।
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