इंदौर-भोपाल एक्सप्रेस-वे और ग्रीनफील्ड कॉरिडोर: MP में 60 मिनट एक्सेस प्लान
Anjali Dwivedi | Jun 19, 2026, 18:15 IST
60 मिनट एक्सेस प्लान
मध्य प्रदेश सरकार 16 हजार वर्ग किमी उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन में 60 मिनट एक्सेस का लक्ष्य लेकर चल रही है। इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर और इंदौर-भोपाल एक्सप्रेस-वे पर काम शुरू हो चुका है।
मध्य प्रदेश सरकार ने उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन के लिए एक बड़ा लक्ष्य तय किया है। सोलह हजार वर्ग किमी के इस इलाके में कोई भी नागरिक एक घंटे के भीतर किसी भी प्रमुख आर्थिक केंद्र तक पहुंच सके। इसे 60 मिनट एक्सेस कहा जा रहा है।
इंदौर-उज्जैन के बीच ग्रीनफील्ड कॉरिडोर और इंदौर-भोपाल एक्सप्रेस-वे पर काम शुरू हो चुका है। मेट्रो का विस्तार उज्जैन तक और रेलवे स्टेशनों पर बेहतर कनेक्टिविटी भी इस योजना का हिस्सा है।
मध्य प्रदेश में कनेक्टिविटी की एक नई परिभाषा लिखी जा रही है। उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन की सफलता का सबसे बड़ा आधार अब कनेक्टिविटी को बनाया जाएगा।
सरकार का लक्ष्य है कि 16 हजार वर्ग किमी के इस क्षेत्र में कोई भी नागरिक महज एक घंटे के भीतर किसी भी मुख्य आर्थिक केंद्र तक पहुंच सके। इसे 60 मिनट एक्सेस नाम दिया गया है। यह सिर्फ एक सड़क योजना नहीं है, बल्कि इसमें सड़क, मेट्रो और रेल, तीनों को एक साथ मजबूत किया जाएगा।
इस लक्ष्य को पाने के लिए दो मेगा प्रोजेक्ट पर काम पहले ही शुरू हो चुका है। पहला है इंदौर-उज्जैन के बीच ग्रीनफील्ड कॉरिडोर (भोपाल-इंदौर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर) और दूसरा इंदौर-भोपाल Expressway है।
ये दोनों प्रोजेक्ट इस पूरे क्षेत्र को आपस में जोड़ने का काम करेंगे। इनसे रतलाम जैसे औद्योगिक शहरों तक पहुंचना आसान होगा और इंदौर-पीथमपुर-उज्जैन इकोनॉमिक कॉरिडोर की कनेक्टिविटी भी नई ऊंचाई पर जाएगी।
यह योजना अकेली नहीं है। दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर यानी DMIC के पश्चिमी किनारे पर स्थित होने के कारण इस क्षेत्र को लॉजिस्टिक्स की रणनीतिक ताकत मिलती है। एयरो-सिटी के निर्माण से मालवा सीधे वैश्विक बाजारों से जुड़ जाएगा।
इसके अलावा इंदौर-पीथमपुर-उज्जैन इकोनॉमिक कॉरिडोर की कनेक्टिविटी से क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स नेटवर्क मजबूत होगा और नए आर्थिक अवसर पैदा होंगे।
इस पूरे प्लान में केवल सड़कें नहीं हैं। क्षेत्रीय विकास को गति देने के लिए सार्वजनिक परिवहन के हर मोर्चे पर काम होगा। मेट्रो का विस्तार उज्जैन तक करने की योजना है।
रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंड और मेट्रो स्टेशनों को इस तरह जोड़ा जाएगा कि यात्री को पैदल या इंतजार में समय न गंवाना पड़े। औद्योगिक क्लस्टर और आवासीय क्षेत्रों के बीच ऐसी कनेक्टिविटी बनेगी कि लाखों कर्मचारी और छात्र बिना किसी देरी के अपने कार्यस्थल तक पहुंच सकें।
यह प्लान केवल इंदौर-उज्जैन तक सीमित नहीं है। परियोजना में शामिल शहरों के चारों ओर रिंग रोड्स का जाल कनेक्टिविटी को और मजबूत बनाएगा। इंदौर, उज्जैन, धार, देवास और शाजापुर को जोड़ने वाले मार्गों को सिग्नल-फ्री और हाई-स्पीड बनाया जाएगा।
डीएमआईसी के साथ इस पूरी कनेक्टिविटी से भोपाल मेट्रोपॉलिटन भी जुड़ेगा। इंदौर-पीथमपुर-उज्जैन इकोनॉमिक कॉरिडोर की कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई पर ले जाने की कोशिश है। यह पूरी योजना मालवा को सिर्फ एक क्षेत्र नहीं, बल्कि देश का एक प्रमुख आर्थिक इंजन बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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इंदौर-उज्जैन के बीच ग्रीनफील्ड कॉरिडोर और इंदौर-भोपाल एक्सप्रेस-वे पर काम शुरू हो चुका है। मेट्रो का विस्तार उज्जैन तक और रेलवे स्टेशनों पर बेहतर कनेक्टिविटी भी इस योजना का हिस्सा है।
क्या है 60 मिनट एक्सेस योजना?
सरकार का लक्ष्य है कि 16 हजार वर्ग किमी के इस क्षेत्र में कोई भी नागरिक महज एक घंटे के भीतर किसी भी मुख्य आर्थिक केंद्र तक पहुंच सके। इसे 60 मिनट एक्सेस नाम दिया गया है। यह सिर्फ एक सड़क योजना नहीं है, बल्कि इसमें सड़क, मेट्रो और रेल, तीनों को एक साथ मजबूत किया जाएगा।
कौन से बड़े प्रोजेक्ट पर काम शुरू?
ये दोनों प्रोजेक्ट इस पूरे क्षेत्र को आपस में जोड़ने का काम करेंगे। इनसे रतलाम जैसे औद्योगिक शहरों तक पहुंचना आसान होगा और इंदौर-पीथमपुर-उज्जैन इकोनॉमिक कॉरिडोर की कनेक्टिविटी भी नई ऊंचाई पर जाएगी।
दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से जुड़ाव
इसके अलावा इंदौर-पीथमपुर-उज्जैन इकोनॉमिक कॉरिडोर की कनेक्टिविटी से क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स नेटवर्क मजबूत होगा और नए आर्थिक अवसर पैदा होंगे।
मेट्रो और रेल से भी बदलेगा सफर
रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंड और मेट्रो स्टेशनों को इस तरह जोड़ा जाएगा कि यात्री को पैदल या इंतजार में समय न गंवाना पड़े। औद्योगिक क्लस्टर और आवासीय क्षेत्रों के बीच ऐसी कनेक्टिविटी बनेगी कि लाखों कर्मचारी और छात्र बिना किसी देरी के अपने कार्यस्थल तक पहुंच सकें।
भोपाल, देवास, शाजापुर भी जुड़ेंगे
डीएमआईसी के साथ इस पूरी कनेक्टिविटी से भोपाल मेट्रोपॉलिटन भी जुड़ेगा। इंदौर-पीथमपुर-उज्जैन इकोनॉमिक कॉरिडोर की कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई पर ले जाने की कोशिश है। यह पूरी योजना मालवा को सिर्फ एक क्षेत्र नहीं, बल्कि देश का एक प्रमुख आर्थिक इंजन बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
FAQ
- 60 मिनट एक्सेस योजना क्या है?
मध्य प्रदेश सरकार चाहती है कि उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन के 16 हजार वर्ग किमी क्षेत्र में हर नागरिक एक घंटे के अंदर किसी भी प्रमुख आर्थिक केंद्र तक पहुंच सके। इसके लिए ग्रीनफील्ड कॉरिडोर, एक्सप्रेस-वे, मेट्रो विस्तार और बेहतर रेल कनेक्टिविटी पर काम हो रहा है। - इंदौर-उज्जैन-भोपाल कनेक्टिविटी में कौन से प्रोजेक्ट शामिल हैं?
इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर, इंदौर-भोपाल एक्सप्रेस-वे, मेट्रो का उज्जैन तक विस्तार, और रेलवे-बस-मेट्रो स्टेशनों की एकीकृत कनेक्टिविटी इस योजना के प्रमुख हिस्से हैं। इंदौर-पीथमपुर-उज्जैन इकोनॉमिक कॉरिडोर और एयरो-सिटी भी इस विजन का हिस्सा हैं।
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