एमपी टीईटी विवाद: 70 हजार शिक्षकों को पात्रता परीक्षा से बचाने सरकार जाएगी SC
Amresh Kushwaha | Jul 05, 2026, 08:44 IST
एमपी टीईटी विवाद
मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग 70 हजार शिक्षकों को टीईटी से राहत दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दाखिल करने की तैयारी में है। कोर्ट पहले ही टीईटी को अनिवार्य बता चुका है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- एमपी सरकार 70 हजार शिक्षकों को टीईटी से राहत दिलाना चाहती है।
- ये शिक्षक साल 2005 से 2009 के बीच भर्ती हुए थे।
- सरकार जल्द सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दाखिल करेगी।
- सुप्रीम कोर्ट पहले ही टीईटी को अनिवार्य बता चुका है।
- कोर्ट ने परीक्षा की समयसीमा अगस्त 2028 तक बढ़ाई है।
व्यापमं से हुई थी भर्ती
यह परीक्षा उन शिक्षकों के लिए है जिनकी नियुक्ति 1998 से 2009 के बीच हुई थी। यानी आरटीई (Right to Education) कानून लागू होने से पहले जिनकी भर्ती हुई थी। इस आदेश से प्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षक प्रभावित होंगे। यह संख्या काफी बड़ी है।
अब जिन 70 हजार शिक्षकों को राहत दिलाने की कोशिश हो रही है, उनकी भर्ती अलग तरीके से हुई थी। साल 2005-06 में पहली बार व्यापमं (व्यावसायिक परीक्षा मंडल) के जरिए शिक्षकों की भर्ती परीक्षा हुई थी।
इसके बाद 2008-09 में भी व्यापमं से ही भर्ती हुई थी। यह परीक्षा टीईटी नहीं थी। यह एनसीटीई (National Council for Teacher Education) के मानकों के हिसाब से भी नहीं हुई थी। इसके बाद 2010-11 और 2012-13 में गुरुजी और अनुदेशकों की भर्ती हुई थी। बाद में इन्हें भी अध्यापक बना दिया गया था।
e51b3dd7-233
70 हजार शिक्षकों की उम्मीद
विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस याचिका में राहत मिलने की संभावना कम है। फिर भी शिक्षकों के हित को देखते हुए यह कोशिश की जा रही है। यदि कोर्ट राहत देता है तो पात्रता परीक्षा के दायरे में आने वाले करीब आधे शिक्षकों को फायदा मिल सकता है। मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है। इस वजह से अधिकारी खुलकर कोई टिप्पणी नहीं कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट का रुख सख्त
कोर्ट ने पहले टीईटी पास करने की समयसीमा 31 अगस्त 2027 तय की थी। बाद में इसे बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दिया गया। यानी शिक्षकों को थोड़ी और मोहलत मिल गई है। वहीं, परीक्षा से पूरी तरह छूट किसी को नहीं दी गई है।
पहले भी याचिकाएं खारिज
टीईटी को लेकर सुप्रीम कोर्ट अब तक 65 से ज्यादा पुनर्विचार याचिकाएं खारिज कर चुका है। ये याचिकाएं राज्य सरकारों, शिक्षक संगठनों और खुद शिक्षकों ने दाखिल की थीं। सभी ने 2025 के फैसले पर फिर से विचार करने की मांग की थी। वहीं, कोर्ट अपने फैसले पर टिका रहा।
कोर्ट ने दी थोड़ी राहत
अब स्कूल शिक्षा विभाग के सामने तय समय में टीईटी कराने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। विभाग इसकी तैयारी में जुट गया है।
टीईटी क्यों जरूरी बताया
कोर्ट ने यह भी कहा कि राइट ऑफ चिल्ड्रन टू फ्री एंड कंपल्सरी एजुकेशन यानी आरटीई एक्ट में पहले से यह व्यवस्था है। इसके तहत सेवा में मौजूद शिक्षकों को भी तय समय में न्यूनतम योग्यता हासिल करनी होती है। कानून लागू होने के समय जो शिक्षक सेवा में थे, उनके लिए अलग प्रावधान बनाया गया था। उन्हें योग्यता हासिल करने के लिए समय भी दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि इससे साफ है कि संसद चाहती थी कि सभी शिक्षक न्यूनतम मानक पूरे करें।
कोर्ट ने एक और अहम बात कही। कोर्ट ने कहा कि एनसीटीई की अधिसूचनाएं या छोटे नियम मूल कानून से ऊपर नहीं हो सकते। इसलिए किसी छूट के आधार पर टीईटी की जरूरत को खत्म नहीं किया जा सकता। सुनवाई के दौरान कोर्ट की बेंच ने एक बड़ी बात कही थी।
केवल टीचर्स की नौकरी जाने की आशंका के आधार पर फैसला निष्प्रभावी नहीं किया जा सकता, क्योंकि इससे बिना टीईटी योग्यता वाले शिक्षक नौकरी में बने रहेंगे और इसका असर आने वाली पीढ़ियों की शिक्षा पर पड़ेगा। यह टिप्पणी खुद सुप्रीम कोर्ट ने टीईटी से जुड़ी अर्जियों पर की थी।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी दलील दी थी कि 2011 के संशोधन से पहले नियुक्त शिक्षकों को करियर के बीच में टीईटी पास करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। उनका कहना था कि इससे सेवा शर्तों में अनुचित बदलाव होगा। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यह दलील भी खारिज कर दी। अब देखना यह होगा कि 70 हजार शिक्षकों के लिए दाखिल होने वाली नई याचिका पर कोर्ट क्या रुख अपनाता है।
TET परीक्षा क्या है
Teacher Eligibility Test
यह खबर क्यों जरूरी है...
FAQ
- एमपी में किन शिक्षकों को टीईटी देना जरूरी है?
जिन शिक्षकों की नियुक्ति 1998 से 2009 के बीच हुई थी और जिनकी सेवा पांच साल से ज्यादा बची है, उन्हें टीईटी पास करना जरूरी है। - टीईटी पास करने की आखिरी तारीख क्या है?
सुप्रीम कोर्ट ने टीईटी पास करने की समयसीमा 31 अगस्त 2027 से बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी है।
टीईटी से पहले शिक्षकों में नई चर्चा, पास कराने के दावों पर सवाल, आंदोलन पर मंथन
टीईटी के इंतजार में युवा, नियमितिकरण के इंतजार में संविदा, सरकार के सामने दो चुनौतियां ?
टीईटी अनिवार्यता पर भड़का शिक्षक संगठन, बोला- पुराने शिक्षकों के साथ हो रहा अन्याय
एमपी के 70 हजार शिक्षकों को देनी होगी टीईटी परीक्षा, चार मौके मिलेंगे, शिक्षकों को राहत दिलाएगी सरकार
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
By Sanjay Dhiman