Teacher Eligibility Test
एमपी के 70 हजार शिक्षकों को देनी होगी टीईटी परीक्षा, चार मौके मिलेंगे, शिक्षकों को राहत दिलाएगी सरकार
Aman Vaishnav | Apr 15, 2026, 08:39 IST
mp teachers tet exam supreme court petition
मध्य प्रदेश के शिक्षकों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। प्रदेश के लगभग तीन लाख शिक्षकों में से 70 हजार शिक्षक TET के दायरे में हैं। वहीं सरकार इन शिक्षकों को राहत दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएगी।
मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर अब स्थिति साफ हो गई है। राज्य के लगभग तीन लाख शिक्षकों में से केवल 70 हजार शिक्षकों को ही टीईटी देना होगा।
बिना टीईटी के नियुक्त शिक्षकों को इस परीक्षा से बाहर रखने के लिए मध्य प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका लगाने की तैयारी कर रही है। इस संबंध में मध्यप्रदेश लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त अभिषेक सिंह ने सोमवार 13 अप्रैल को शिक्षक संगठनों के साथ चर्चा की थी।
अफसरों के शुरुआती रिव्यू में यह सामने आया कि लगभग 70 हजार शिक्षक टीईटी के दायरे में आएंगे। इस समय स्कूल शिक्षा विभाग में दो योजनाओं पर काम हो रहा है।
पहला प्लान यह है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका डालेगी। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के वकीलों से बातचीत हो रही है। उनके जवाब के बाद ही अगले कदम का फैसला किया जाएगा।
दूसरा प्लान यह है कि अगर सुप्रीम कोर्ट में याचिका अस्वीकार हो जाती है, तो फिर टीईटी परीक्षा करवाई जाएगी। इस मामले पर आयुक्त आज, 15 अप्रैल को बाकी शिक्षक संगठनों से भी बातचीत करेंगे।
एमपी स्कूल शिक्षा विभागअगले दो साल में शिक्षकों को टीईटी देने के लिए 4 मौके देगा। इसके लिए स्पेशल कोचिंग कराई जाएगी और मॉडल पेपर भी दिए जाएंगे। इसके बाद भी कोई शिक्षक परीक्षा पास नहीं कर पाता, तो उसके लिए एक स्पेशल टीईटी आयोजित की जाएगी।
TET यानी शिक्षक पात्रता परीक्षा एक नेशनल लेवल का टेस्ट है। यह परीक्षा तय करती है कि आप कक्षा एक से 8 तक के बच्चों को पढ़ाने के काबिल हैं या नहीं। साल 2010 में NCTE ने सरकारी स्कूल में टीचर बनने के लिए इस टेस्ट को पास करना जरूरी कर दिया था। बिना इसे पास किए अब कोई भी प्राइमरी टीचर नहीं बन सकता।
![Teacher Eligibility Test]()
साल 2009 में शिक्षा का अधिकार कानून (RTE Act) आया। इसके तहत शिक्षकों की योग्यता तय करने का जिम्मा एनसीटीई (NCTE) को मिला। 23 अगस्त 2010 को एक नियम बना। इसमें कक्षा एक से आठ तक के टीचरों के लिए TET पास करना अनिवार्य कर दिया गया।
ऐसे में जो शिक्षक पहले से तैनात थे, उन्हें परीक्षा पास करने के लिए पहले पांच साल और फिर बाद में चार साल का और समय दिया गया। यानी कुल 9 साल मिले, लेकिन कई शिक्षकों ने परीक्षा नहीं दी।
हालांकि जून 2025 में मद्रास हाई कोर्ट ने एक राहत दी थी। कोर्ट ने कहा था कि जिनकी भर्ती 29 जुलाई 2011 से पहले हुई है, उन्हें नौकरी बचाने के लिए TET की जरूरत नहीं है। हालांकि, प्रमोशन के लिए इसे जरूरी रखा गया था।
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बिना टीईटी के नियुक्त शिक्षकों को इस परीक्षा से बाहर रखने के लिए मध्य प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका लगाने की तैयारी कर रही है। इस संबंध में मध्यप्रदेश लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त अभिषेक सिंह ने सोमवार 13 अप्रैल को शिक्षक संगठनों के साथ चर्चा की थी।
सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका
पहला प्लान यह है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका डालेगी। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के वकीलों से बातचीत हो रही है। उनके जवाब के बाद ही अगले कदम का फैसला किया जाएगा।
दूसरा प्लान यह है कि अगर सुप्रीम कोर्ट में याचिका अस्वीकार हो जाती है, तो फिर टीईटी परीक्षा करवाई जाएगी। इस मामले पर आयुक्त आज, 15 अप्रैल को बाकी शिक्षक संगठनों से भी बातचीत करेंगे।
TET पास न करने पर क्या होगा?
मध्यप्रदेश में टीईटी को लेकर स्थिति साफ
लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त अभिषेक सिंह के अनुसार, मध्यप्रदेश में टीईटी को लेकर अब स्थिति साफ हो रही है। उन्होंने शिक्षक संगठनों से बात की। हम सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका के लिए वकीलों से सलाह ले रहे हैं लेकिन साथ ही परीक्षा की तैयारी भी करवा रहे हैं।
TET परीक्षा क्या है
TET अनिवार्यता कब से
ऐसे में जो शिक्षक पहले से तैनात थे, उन्हें परीक्षा पास करने के लिए पहले पांच साल और फिर बाद में चार साल का और समय दिया गया। यानी कुल 9 साल मिले, लेकिन कई शिक्षकों ने परीक्षा नहीं दी।
हालांकि जून 2025 में मद्रास हाई कोर्ट ने एक राहत दी थी। कोर्ट ने कहा था कि जिनकी भर्ती 29 जुलाई 2011 से पहले हुई है, उन्हें नौकरी बचाने के लिए TET की जरूरत नहीं है। हालांकि, प्रमोशन के लिए इसे जरूरी रखा गया था।
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