दूषित पानी के बाद एमपी में हवा जहरीली, 5 साल से 143 शहरों में छाया प्रदूषण का संकट

Aman Vaishnav | Jan 10, 2026, 12:23 IST
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mp air pollution crea report 143 cities
mp air pollution crea report 143 cities

मध्यप्रदेश देश का ग्रीन हार्ट होने के बावजूद अब सांसों के संकट से जूझ रहा है। प्रदेश के 143 शहरों में हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। आखिर क्यों फेल हो रहे हैं प्रदूषण नियंत्रण के उपाय? पूरी खबर आखिरी तक पढ़ें।

NEWS IN SHORT

  • मध्यप्रदेश का 77 हजार 73 वर्ग किमी वनावरण भी प्रदूषण नहीं रोक पा रहा है ।
  • लगातार 5 वर्षों से 143 शहरों में पीएम-2.5 का स्तर मानक से ज्यादा है।
  • जहरीली हवा के मामले में मध्यप्रदेश अब देश का चौथा बड़ा राज्य है।
  • अधिकांश प्रदूषित शहर राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) से बाहर हैं।
  • सर्दियों के अलावा अब सालभर बनी रहती है हवा में प्रदूषण की समस्या।

NEWS IN DETAIL

ग्रीन हार्ट में घुला जहर

मध्य प्रदेश को देश का ग्रीन हार्ट कहा जाता है क्योंकि यहां 77 हजार 073 वर्ग किलोमीटर में जंगल फैले हैं, जो क्षेत्रफल के हिसाब से पूरे भारत में सबसे ज्यादा है। हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े जंगल होने के बावजूद यहां के शहरों की हवा जहरीली होती जा रही है। यानी ये विशाल जंगल भी शहरों में बढ़ते प्रदूषण को रोकने में नाकाम साबित हो रहे हैं।

पांच साल का खतरनाक रिकॉर्ड

सीआरईए की ताजा रिपोर्ट ने चौंकाने वाले आंकड़े दिए हैं। साल 2019 से 2024 के बीच प्रदूषण लगातार बढ़ा है। कोविड वर्ष 2020 को छोड़कर हर साल आंकड़े डराने वाले रहे। इन 5 वर्षों में पीएम-2.5 का स्तर हमेशा मानक से ऊपर रहा।

प्रदूषण के मुख्य हॉटस्पॉट

सिंगरौली, सतना, कटनी और देवास जैसे औद्योगिक क्षेत्र गंभीर हैं। यहां के कारखानों से निकलने वाला धुआं बड़ी समस्या है। सड़क निर्माण और खनन कार्यों में धूल नियंत्रण का अभाव है। भोपाल सहित छोटे शहरों में वाहनों की संख्या बेतहाशा बढ़ी है।

एनसीएपी (NCAP) के दायरे से बाहर

प्रदेश के 143 प्रदूषित शहर राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम में नहीं हैं। इसका मतलब है कि यहां कोई केंद्रित एक्शन प्लान नहीं है। इन शहरों को केंद्र सरकार से विशेष फंड नहीं मिलता। निगरानी और लक्ष्य तय न होने से स्थिति बिगड़ रही है।

मौसमी नहीं, अब बारहमासी समस्या

वायु प्रदूषण अब केवल दिल्ली या सर्दियों की समस्या नहीं है। मध्यप्रदेश के कई शहर क्रॉनिक यानी स्थायी प्रदूषित जोन में हैं। कचरा जलाने और पराली की घटनाएं इसे और गंभीर बनाती हैं। प्रशासन के कदम अक्सर केवल सर्दियों तक ही सीमित रहते हैं।

एनजीटी की सख्ती और सरकारी विफलता

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) कई बार सख्त फटकार लगा चुका है। नगर निगमों और सरकार को बार-बार जवाबदेह ठहराया गया। समितियां बनीं और रिपोर्टें भी सौंपी गईं। लेकिन जमीन पर कोई स्थायी समाधान नजर नहीं आ रहा है।

एमपी के चॉप 8 शहरों का AQI जानने के लिए इस लिं पर क्लिक करें।

मध्यप्रदेश की हवा पर NGT सख्त, भोपाल-इंदौर समेत 8 शहरों में प्रदूषण को बताया गंभीर संकट

सूत्र Knowledge

मध्यप्रदेश के 143 शहरों में पीएम-2.5 का स्तर मानक से ऊपर है। इनसे बचने के लिए इन बातों का विशेष ध्यान रखें।

  • बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग करें।
  • प्रदूषण के असर को कम करने के लिए विटामिन-सी (आंवला, संतरा), विटामिन-ई और ओमेगा-3 से भरपूर आहार लें।
  • प्रदूषण केवल बाहर नहीं, घर के अंदर भी होता है। घर में ऐसे पौधे लगाएं जो हवा को शुद्ध करते हैं।

आगे क्या

  • भविष्य में सांस की बीमारियां, हृदय रोग और एलर्जी के मामले तेजी से सामने आएंगे।
  • राज्य सरकार पर दबाव बढ़ेगा कि एमपी के 143 शहरों को भी क्लीन एयर प्लान में शामिल करने की मांग करे।
  • सिंगरौली, सतना और कटनी जैसे 'हॉटस्पॉट' में अब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) को अपनी निगरानी बढ़ानी होगी।

निष्कर्ष

मध्यप्रदेश में वनावरण अधिक होने के बावजूद शहरी नियोजन में कमी दिखी है। प्रदूषण नियंत्रण के उपाय केवल कागजों और सर्दियों के आदेशों तक सीमित हैं। जब तक इन 143 शहरों को विशेष कार्ययोजना में शामिल नहीं किया जाता, राहत मिलना मुश्किल है।

नीचे दी गई लिंक से जानें आपे शहर का प्रदूषण:

  • मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB): mppcb.mp.gov.in (यहां प्रदेश के शहरों का डेटा मिलता है)
  • लाइव एयर क्वालिटी इंडेक्स (MP-AQI): erc.mp.gov.in/EnvAlert/AQI (मध्यप्रदेश के शहरों का रीयल-टाइम डेटा)
  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB): cpcb.nic.in या airquality.cpcb.gov.in (पूरे देश का एयर क्वालिटी इंडेक्स)
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