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BHOPAL. बीजेपी विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह ने सीधे सवाल उठाते हुए भर्ती प्रक्रिया को निरस्त करने और तत्काल जांच की मांग की है। सरकार की ओर से कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया है।
भर्ती विवाद: आखिर आरोप क्या हैं?
बीजेपी विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह का कहना है कि विश्वविद्यालय में भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही। उनके अनुसार,
चार साल तक भर्ती क्यों नहीं की गई?
शासन से अनुमति क्यों नहीं ली गई?
दो दिन में 26 पद कैसे भर दिए गए? जब आपत्ति दर्ज थी, तो प्रक्रिया आगे कैसे बढ़ी?
कुशवाह ने इसे गंभीर अनियमितता बताते हुए पूरी भर्ती रद्द करने की मांग की है।
हम भी समिति में थे, फिर यह कैसे हुआ?
विधानसभा में बोलते हुए कुशवाह ने कहा कि वह खुद संबंधित समिति के सदस्य हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब तीन-तीन विधायकों ने आपत्ति दर्ज कराई थी, तब भी भर्ती प्रक्रिया कैसे पूरी कर ली गई?
उनका आरोप है कि दो दिन के भीतर पूरी प्रक्रिया पूरी कर दी गई, जो संदेह पैदा करती है। उन्होंने साफ कहा कि यह भ्रष्टाचार नहीं तो क्या है?
सरकार का जवाब: कोई गड़बड़ी नहीं
कृषि मंत्री ने सदन में स्पष्ट किया कि भर्ती नियमों के अनुसार की गई है। उन्होंने बताया कि विधिवत विज्ञापन जारी किया गया था। साक्षात्कार प्रक्रिया पूरी की गई थी। बैठकों में किसी ने औपचारिक आपत्ति दर्ज नहीं कराई थी।
कृषि मंत्री ने आगे कहा कि मामले के दस्तावेज हाईकोर्ट में प्रस्तुत किए जा चुके हैं। मामला न्यायालय में विचाराधीन है। मंत्री ने यह भी कहा कि कुछ नियमों में संशोधन किए गए हैं, लेकिन किसी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई।
2022 की भर्ती 2026 में क्यों?
विवाद का एक बड़ा बिंदु भर्ती के समय को लेकर है। कुशवाह का कहना है कि यह भर्ती वर्ष 2022 में होनी थी, तो फिर 2026 में यह प्रक्रिया किस आधार पर की गई?
उन्होंने आरोप लगाया कि शासन की अनुमति नहीं ली गई और सदन में स्पष्ट जवाब भी नहीं दिया जा रहा है। उनके मुताबिक, मामले में लीपापोती की जा रही है।
सदन में गांधी और राम के नाम पर भी टकराव
भर्ती विवाद के बीच सदन का माहौल तब और गरमा गया जब महात्मा गांधी और भगवान राम के नाम को लेकर बहस छिड़ गई।
अमरपाटन से कांग्रेस विधायक राजेंद्र कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि महात्मा गांधी पर फिर हमला किया गया।
साथ ही, राम के नाम को राजनीति में घसीटा गया। इस पर बीजेपी विधायक सीताशरण शर्मा ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग न किया जाए। इसके बाद सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई और सदन में हंगामा शुरू हो गया।
मनरेगा नाम को लेकर भी विवाद
कांग्रेस विधायक ने मनरेगा के नाम को लेकर भी टिप्पणी की। सत्ता पक्ष के विधायकों ने पलटवार करते हुए कहा कि राम का अपमान हमेशा कांग्रेस ने किया है।
ग्वालियर कृषि विश्वविद्यालय की 26 पदों की भर्ती विवादों में
बीजेपी विधायक ने ही सरकार पर लगाए गंभीर आरोप भर्ती प्रक्रिया निरस्त करने और जांच की मांग
कृषि मंत्री ने सभी आरोपों को किया खारिज
मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन
गांधी और राम के नाम पर सदन में हंगामा
राजनीतिक संकेत क्या हैं?
यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि सवाल विपक्ष ने नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ दल के विधायक ने उठाए हैं। यदि जांच होती है तो यह सरकार की कार्यप्रणाली पर सीधा असर डाल सकती है।
वहीं, अगर आरोप निराधार साबित होते हैं तो यह आंतरिक राजनीतिक खींचतान का संकेत भी माना जा सकता है। फिलहाल, विधानसभा में उठा यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।
जब कलेक्टर से भिड़े थे विधायक
अगस्त 2025 में विधायक कुशवाह का भिंड के कलेक्टर रहे संजीव श्रीवास्तव से विवाद हो गया था। दोनों के बीच का विवाद काफी समय तक चर्चा में बना रहा था।
दरअसल, जिले में खाद संकट को लेकर कुशवाह कलेक्टर के बंगले के बाहर धरने पर बैठे थे और कलेक्टर से बाहर आकर बात करने की मांग कर रहे थे। जब कलेक्टर बाहर नहीं आए, तो कुशवाह भड़क गए।
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