एमपी विधानसभा में बवाल: अडाणी समझौता मुद्दे पर भिड़े विजयवर्गीय-सिंघार, 6 बार कार्यवाही स्थगित

Ramanand Tiwari | Feb 19, 2026, 21:00 IST
mp assembly
एमपी विधानसभा में अडाणी समझौते को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बीच तीखी नोकझोंक हुई। इस दौरान दोनों नेताओं ने अमर्यादित भाषा का उपयोग किया, इसके कारण कार्यवाही 6 बार स्थगित हो गई।

News in Short

  • मध्यप्रदेश विधानसभा में कैलाश विजयवर्गीय और उमंग सिंघार के बीच बहस हुई।
  • सिंघार ने अडाणी समूह से कथित समझौते का मुद्दा उठाया।
  • विजयवर्गीय ने सिंघार के आरोपों पर सबूत मांगे और बहस तेज हो गई।
  • अडाणी का नाम लेने पर आपत्ति जताई गई, जिससे हंगामा बढ़ा।
  • कांग्रेस ने मंत्री से माफी की मांग की और कार्यवाही छह बार स्थगित की गई।

News in Detail

मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन गुरुवार को सदन का माहौल गरमा गया। राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार और अडाणी समूह के बीच कथित समझौते का मुद्दा उठाया, जिस पर संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कड़ा विरोध जताया। तीखी नोकझोंक इतनी बढ़ी कि एक ही दिन में विधानसभा की कार्यवाही छह बार स्थगित करनी पड़ी।



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क्यों भड़का विवाद? जानिए पूरा मामला

राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार बोल रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली खरीद समझौते के नाम पर अगले 25 साल में अडाणी समूह को एक लाख से सवा लाख करोड़ रुपए दिए जाएंगे।



इस बयान पर संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए सबूत मांगा। सिंघार ने जवाब दिया कि उनके पास प्रमाण हैं और वे सदन में पेश कर सकते हैं।



यहीं से बहस तेज हो गई और दोनों नेताओं के बीच तीखी शब्दों की अदला-बदली शुरू हो गई। असंसदीय शब्द की टिप्पणी से और तनाव बढ़ा। बहस के दौरान मंत्री विजयवर्गीय ने नेता प्रतिपक्ष के लिए यह टिप्पणी की। जिस पर विपक्षी विधायक भड़क गए। सदन में शोर-शराबा बढ़ गया। स्थिति संभालने के लिए कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। एक दिन में कुल 6 बार सदन की कार्यवाही रोकी गई, जिससे कामकाज प्रभावित हुआ।



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अडाणी का नाम लेने पर आपत्ति क्यों?

चर्चा के दौरान सिंघार द्वारा अडाणी समूह का नाम लेने पर मंत्री विश्वास सारंग ने आपत्ति जताई। उनका तर्क था कि जो व्यक्ति या पक्ष सदन में मौजूद नहीं है, उसका नाम नहीं लिया जाना चाहिए। विधानसभा अध्यक्ष ने भी सदन की परंपरा का हवाला देते हुए संयम बरतने के निर्देश दिए। हालांकि, नेता प्रतिपक्ष अपने आरोपों पर कायम रहे और कहा कि वे हर बात प्रमाण के साथ रखते हैं।



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सदन में आमने-सामने आए विधायक

बहस बढ़ने के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक अपनी-अपनी सीटों से खड़े हो गए। कुछ समय तक नारेबाजी और हंगामा चलता रहा। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि अध्यक्ष को बार-बार हस्तक्षेप करना पड़ा।



कांग्रेस का आरोप: नेता प्रतिपक्ष का अपमान

कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर कांग्रेस विधायकों ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को बोलने से रोका गया और उनके साथ अभद्र व्यवहार हुआ। कांग्रेस का कहना था कि एक आदिवासी नेता पर अमर्यादित टिप्पणी करना उनका अपमान है। विपक्ष ने मांग की कि संसदीय कार्य मंत्री माफी मांगें, वरना विरोध जारी रहेगा।



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पूरा घटनाक्रम एक नजर में

  • बजट सत्र का चौथा दिन, राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा।
  • उमंग सिंघार ने अडाणी से कथित समझौते का मुद्दा उठाया।
  • 25 साल में एक लाख से सवा लाख करोड़ भुगतान का आरोप।


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