भोपाल में किराए के लाइसेंस पर चल रहीं दवा दुकानें, बिना जानकारी दवा बेच रहे सेल्समैन
Kaushiki | Sept 25, 2026, 13:30 IST
Medical Store License
भोपाल में मेडिकल स्टोर से जुड़ी एक गंभीर खामी सामने आई है। शहर के कुछ मेडिकल स्टोर बिना असली फार्मासिस्ट के चल रहे हैं। लाइसेंस में फार्मासिस्ट का नाम दर्ज है, लेकिन दुकान पर कोई और व्यक्ति दवा देता है। यह जानकारी मध्यप्रदेश फार्मासिस्ट एसोसिएशन ने दी है।
Medical Store License: मध्यप्रदेश के भोपाल शहर के मेडिकल स्टोर से दवा लेते समय आपको अब बहुत सावधान रहने की जरूरत है। शहर में बड़े पैमाने पर दवा दुकानों पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां कागजों पर तो फार्मासिस्ट मौजूद हैं, लेकिन काउंटर पर दवाइयां अनट्रेंड एम्पलाई दे रहे हैं। ये लापरवाही मरीजों की जान पर भारी पड़ सकती है।
मध्य प्रदेश फार्मासिस्ट एसोसिएशन की रिपोर्ट से इस बड़े खतरे का खुलासा हुआ है। शहर के करीब 65% मेडिकल स्टोर किराए के लाइसेंस के सहारे चल रहे हैं। असली फार्मासिस्ट दुकान पर बैठने के बजाय कंपनियों में नौकरी कर रहे हैं।
वे महज 25 सौ से तीन हजार रुपए महीने के किराए पर अपना लाइसेंस दे रहे हैं। वहीं काउंटर पर बैठे कम सीखे सेल्समैन मरीजों को दवा की खुराक और उसके इस्तेमाल का तरीका बता रहे हैं।
भोपाल में कुल पांच हजार रजिस्टर्ड मेडिकल स्टोर चल रहे हैं। इनमें से लगभग 15 सौ रिटेल फार्मासिस्ट की केटेगरी में आते हैं। एसोसिएशन का दावा है कि इनमें से अधिकांश में ऑरिजिनल फार्मासिस्ट गायब रहते हैं।
दुकानदार अपना खर्च बचाने के लिए असली फार्मासिस्ट नहीं रखते हैं। नियमित फार्मासिस्ट रखने पर हर महीने 20 से 25 हजार रुपए खर्च होते हैं। इसी बचत के चक्कर में मरीजों की सेहत से सीधा समझौता किया जा रहा है।
फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने शिकायतों के बाद जांच तेज कर दी है। जांच के दौरान सुल्तानिया रोड स्थित एक मेडिकल स्टोर का मामला सामने आया। वहां फार्मासिस्ट किसी कंपनी में नौकरी कर रहा था और दुकान किराए पर चल रही थी।
कार्रवाई करते हुए एफडीए ने उस दुकान का लाइसेंस तीन महीने के लिए निलंबित कर दिया। इसी तरह कोलार रोड की एक दुकान पर भी ऐसा ही फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। वहां भी फार्मासिस्ट को हर महीने 25 सौ रुपए किराए के मिलते थे।
कम पढ़े-लिखे सेल्समैन को दवाओं की सही जानकारी नहीं होती है। वे मरीजों को आधी-अधूरी और गलत जानकारी के साथ दवा पकड़ा देते हैं। दवा की खुराक, खाने की अवधि और तरीका गलत होने से उल्टा असर हो सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, गलत दवा लेने से मरीज को गंभीर एलर्जी हो सकती है। कई मामलों में गलत डोज से किडनी और लिवर को नुकसान पहुंचता है। इसलिए योग्य फार्मासिस्ट की मौजूदगी बहुत जरूरी मानी जाती है।
मेडिकल स्टोर से खरीदी गई दवा की सही खुराक, कितने दिन लेनी है और किस तरीके से लेनी है, यह जानकारी मरीज की सेहत के लिए बेहद अहम होती है। लेकिन भोपाल में बड़ी संख्या में दुकानों पर यह जिम्मेदारी ऐसे कर्मचारियों के हाथ में है, जो ट्रेन फार्मासिस्ट नहीं हैं।
ड्रग एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और उससे जुड़े नियम 1945 के तहत हर खुदरा दवा दुकान में रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट की अपॉइंटमेंट जरूरी है। नियम 65(2) के मुताबिक, सभी दवाएं रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट की निगरानी में ही बेची जानी चाहिए। सिर्फ कागज पर नाम रजिस्टर होना नियम पूरा करने के लिए सफिशिएंट नहीं है। खुदरा लाइसेंस के लिए दवा की केटेगरी के मुताबिक फॉर्म-20 और फॉर्म-21 लागू होते हैं। मेडिकल स्टोर की बड़ी लापरवाही medical store
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मध्य प्रदेश फार्मासिस्ट एसोसिएशन की रिपोर्ट से इस बड़े खतरे का खुलासा हुआ है। शहर के करीब 65% मेडिकल स्टोर किराए के लाइसेंस के सहारे चल रहे हैं। असली फार्मासिस्ट दुकान पर बैठने के बजाय कंपनियों में नौकरी कर रहे हैं।
वे महज 25 सौ से तीन हजार रुपए महीने के किराए पर अपना लाइसेंस दे रहे हैं। वहीं काउंटर पर बैठे कम सीखे सेल्समैन मरीजों को दवा की खुराक और उसके इस्तेमाल का तरीका बता रहे हैं।
किराए पर लाइसेंस लेकर चल रही दुकानें
दुकानदार अपना खर्च बचाने के लिए असली फार्मासिस्ट नहीं रखते हैं। नियमित फार्मासिस्ट रखने पर हर महीने 20 से 25 हजार रुपए खर्च होते हैं। इसी बचत के चक्कर में मरीजों की सेहत से सीधा समझौता किया जा रहा है।
एफडीए की जांच में खुली बड़ी पोल
कार्रवाई करते हुए एफडीए ने उस दुकान का लाइसेंस तीन महीने के लिए निलंबित कर दिया। इसी तरह कोलार रोड की एक दुकान पर भी ऐसा ही फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। वहां भी फार्मासिस्ट को हर महीने 25 सौ रुपए किराए के मिलते थे।
मरीजों की जान के साथ हो रहा खिलवाड़
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, गलत दवा लेने से मरीज को गंभीर एलर्जी हो सकती है। कई मामलों में गलत डोज से किडनी और लिवर को नुकसान पहुंचता है। इसलिए योग्य फार्मासिस्ट की मौजूदगी बहुत जरूरी मानी जाती है।
क्यों जरूरी है असली फार्मासिस्ट
ड्रग एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और उससे जुड़े नियम 1945 के तहत हर खुदरा दवा दुकान में रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट की अपॉइंटमेंट जरूरी है। नियम 65(2) के मुताबिक, सभी दवाएं रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट की निगरानी में ही बेची जानी चाहिए। सिर्फ कागज पर नाम रजिस्टर होना नियम पूरा करने के लिए सफिशिएंट नहीं है। खुदरा लाइसेंस के लिए दवा की केटेगरी के मुताबिक फॉर्म-20 और फॉर्म-21 लागू होते हैं। मेडिकल स्टोर की बड़ी लापरवाही medical store
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MP के 9 मेडिकल कॉलेजों को निजी हाथों में देने के फैसले पर सरकार का यू-टर्न, खुद ही करेगी संचालन
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