एमपी में सस्ते बजट में पोषण का दावा, कुपोषण से जंग में सरकारी सिस्टम फेल?

Ramanand Tiwari | May 22, 2026, 23:58 IST
Inflation Bites into Children Meals
MP में टेकहोम राशन योजना 40 लाख बच्चों और गर्भवती महिलाओं तक पोषण पहुंचाती है। महंगाई बढ़ने से आठ साल पुरानी दरों पर राशन तैयार करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

मध्य प्रदेश में बच्चों, गर्भवती महिलाओं और किशोरी बालिकाओं के लिए टेक होम राशन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। दावा पोषण सुधारने का किया गया है। लेकिन आठ साल पुरानी दरों पर तैयार राशन अब महंगाई के दौर में संतुलित पोषण देने में पिछड़ रहा है। तेल, दूध पाउडर, बेसन और शक्कर जैसी सामग्री के दाम कई गुना बढ़ गए हैं। केंद्र से मिलने वाली राशि लगभग पुराने स्तर पर ही अटकी हुई है। इसका असर राशन की गुणवत्ता और कुपोषण नियंत्रण की रफ्तार पर पड़ रहा है।



पोषण की व्यवस्था पर आर्थिक दबाव

प्रदेश में महिला एवं बाल विकास विभाग के जरिए हर महीने करीब 13 से 14 हजार टन टेक होम राशन तैयार कराया जाता है। इसका लाभ करीब 40 लाख बच्चों, गर्भवती महिलाओं और किशोरी बालिकाओं को मिलता है। यह राशन स्व-सहायता समूहों और सरकारी संयंत्रों के माध्यम से तैयार होता है। लेकिन बढ़ती महंगाई के कारण अब इस व्यवस्था को चलाना मुश्किल होता जा रहा है।



8 साल पुरानी दरों पर बन रहा राशन

जानकारी के मुताबिक टेक होम राशन तैयार करने की जो लागत तय की गई थी, उसमें पिछले आठ वर्षों से कोई बड़ा संशोधन नहीं हुआ है। इस दौरान खाद्य सामग्री के दाम लगातार बढ़े हैं। सरसों तेल के दाम लगभग तीन गुना तक बढ़े। दूध पाउडर और बेसन महंगे हुए। सोया फ्लोर और शक्कर की लागत बढ़ी। परिवहन और पैकेजिंग खर्च भी बढ़ गया। इसके बावजूद संयंत्रों को पुरानी दरों पर ही राशन तैयार करना पड़ रहा है।



हर महीने करोड़ों का घाटा

सूत्रों के अनुसार टेक होम राशन तैयार करने वाले संयंत्रों को हर महीने करीब 10 करोड़ रुपए तक का अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। कई इकाइयों ने विभागीय स्तर पर यह संकेत भी दिए हैं कि मौजूदा दरों पर गुणवत्तापूर्ण राशन तैयार करना लगातार कठिन होता जा रहा है। यही वजह है कि अब पोषण गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।



कुपोषण के आंकड़े बढ़ा रहे चिंता

प्रदेश में अब भी बड़ी संख्या में बच्चे कुपोषण से जूझ रहे हैं। प्रदेश में 1.36 लाख बच्चे कुपोषित हैं। इनमें 29 हजार 830 बच्चे गंभीर कुपोषण श्रेणी में आते हैं। टेक होम राशन योजना का सबसे बड़ा लक्ष्य इन्हीं बच्चों तक पोषण पहुंचाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पोषण सामग्री की गुणवत्ता प्रभावित होती है तो कुपोषण के खिलाफ लड़ाई कमजोर पड़ सकती है। मध्य प्रदेश में टेक होम राशन का सालाना कारोबार करीब 700 करोड़ रुपए का माना जाता है।



600 करोड़ रुपए रॉ-मटेरियल पर खर्च किए जाते हैं। दूध पाउडर, तेल, बेसन, सोया उत्पाद और शक्कर प्रमुख सामग्री हैं। गेहूं और चावल की सप्लाई सरकार के जरिए अलग से होती है। महंगाई बढ़ने के बाद भी बजट संरचना लगभग स्थिर रहने से पूरी सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया है।



ये मॉडल अब बना चर्चा का विषय

मध्य प्रदेश में टेक होम राशन योजना के लिए केंद्र और राज्य सरकार 50-50 प्रतिशत राशि साझा करते हैं। लेकिन कई अन्य राज्यों में अतिरिक्त “टॉप-अप फंड” भी दिया जाता है, जिससे बढ़ती लागत की भरपाई हो सके। बताया जा रहा है कि महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम ने दूसरे राज्यों की व्यवस्थाओं का अध्ययन भी किया है, ताकि मध्य प्रदेश में नया मॉडल तैयार किया जा सके।



फिर उठी निजी कंपनियों की एंट्री की चर्चा

टेक होम राशन को लेकर अब एक बार फिर निजी कंपनियों की भूमिका पर मंथन शुरू हो गया है। सूत्रों के अनुसार महिला बाल विकास, पंचायत और स्वास्थ्य विभाग के बीच कई दौर की चर्चा हो चुकी है। हालांकि पहले टेक होम राशन घोटाले के बाद जबलपुर हाईकोर्ट ने व्यवस्था को निजी कंपनियों से हटाकर सरकारी एजेंसियों और स्व-सहायता समूहों के जरिए संचालित करने के निर्देश दिए थे। अब सवाल यह है कि क्या सरकार फिर से निजी मॉडल की ओर बढ़ेगी या स्व-सहायता समूहों को मजबूत किया जाएगा।



केंद्र को भेजा गया प्रस्ताव

महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने संकेत दिए हैं कि टेक होम राशन की लागत बढ़ने का मुद्दा केंद्र सरकार के सामने उठाया गया है। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों में लागत प्रतिपूर्ति के मॉडल का अध्ययन किया जा रहा है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि स्व-सहायता समूहों और अन्य व्यवस्थाओं के जरिए बेहतर गुणवत्ता और वित्तीय संतुलन कैसे बनाया जा सकता है।



बताया जा रहा है कि आगामी बैठकों में टेक होम राशन की दरों में संशोधन पर विचार संभव है। प्रदेश में पोषण योजनाओं पर हर साल सैकड़ों करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं, लेकिन यदि महंगाई के मुताबिक बजट अपडेट नहीं हुआ तो क्या कुपोषण के खिलाफ लड़ाई सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगी?



क्या है टेक होम राशन?

टीएचआर पोषण को टेक होम राशन कहा जाता है। आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चों के लिए सूखा राशन वितरित किया जाता है। यह सूखा राशन चिन्हित किशोरियों को भी उपलब्ध होता है। इसे टेक होम राशन कहते हैं।



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