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Photograph: (the sootr)
News in Short
- विपक्ष ने सिंगरौली की धिरौली कोयला परियोजना में मुआवजा घोटाला का आरोप लगाया।
- नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पूरे मामले की JPC जांच कराने की मांग की।
- आरोप है कि बिना पूर्ण जमीन अधिग्रहण किए ही कंपनी ने खनन कार्य शुरू किया।
- थाना प्रभारी की पत्नी के खाते में 14 लाख रिश्वत जाने का खुलासा हुआ।
- हंगामे के कारण कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट किया और कार्यवाही रुकी।
News in Detail
BHOPAL. मध्य प्रदेश की राजनीति में इस वक्त सिंगरौली की 'धिरौली कोयला परियोजना' एक बड़ा मुद्दा बन गई है। बजट सत्र 2026 के नौवें दिन सदन के अंदर सरकार और विपक्ष के बीच जमकर बहस हुई। मामला आदिवासियों की जमीन, उनके मुआवजे और विस्थापन से जुड़ा है। विपक्ष का सीधा आरोप है कि सरकार ने कोयला कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए गरीब आदिवासियों के हितों की अनदेखी की है।
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने तीखे सवाल दागे। उन्होंने पूछा कि आखिर बिना पूरा अधिग्रहण किए जमीन कोयला विभाग को कैसे दे दी गई? यह सवाल इसलिए भी गहरा है क्योंकि 8 गांवों में से केवल 5 गांवों की जमीन का अधिग्रहण कागजों पर दिख रहा है, जबकि काम पूरे इलाके में शुरू होने की खबरें हैं।
मुआवजे का गणित: 50 लाख या सिर्फ 2 लाख?
राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने सदन में दावा किया कि सरकार आदिवासियों को बसाने के लिए 3.68 अरब रुपए खर्च करेगी। उन्होंने यहां तक कह दिया कि हर आदिवासी परिवार को कम से कम 50 लाख रुपए मिलेंगे। लेकिन विपक्ष ने आंकड़ों पर सवाल उठाए। उमंग सिंघार ने कहा कि अगर 12,098 परिवारों के बीच यह राशि बांटी जाती है, तो एक परिवार के हिस्से में सिर्फ 2 लाख रुपए ही आएंगे।
मंत्री वर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि मुआवजा केवल उन्हें मिलेगा जिनकी जमीन वैध है। अतिक्रमण करने वालों को फूटी कौड़ी भी नहीं दी जाएगी। इसी बात पर विपक्ष भड़क गया और आरोप लगाया कि सर्वे में धांधली करके कई पात्र आदिवासियों को 'अतिक्रमणकारी' घोषित कर दिया गया है।
थाना प्रभारी की पत्नी के खाते में 14 लाख का क्या है राज?
हंगामे के बीच एक चौंकाने वाला खुलासा भी हुआ। नेता प्रतिपक्ष ने सदन में सबूत रखते हुए दावा किया कि एक थाना प्रभारी, जितेंद्र भदौरिया की पत्नी के खाते में 14 लाख रुपए की रिश्वत ट्रांसफर की गई है। आरोप है कि यह पैसा कोयला परियोजना से जुड़ी गड़बड़ियों को दबाने के लिए दिया गया। विपक्ष ने इस पूरे मामले की 'संयुक्त संसदीय समिति' (JPC) से जांच कराने की मांग की है। कांग्रेस विधायकों का कहना है कि जब तक दूध का दूध और पानी का पानी नहीं हो जाता, तब तक खदान का काम रोक देना चाहिए।
सरकार का पक्ष: "अन्याय किसी के साथ नहीं होगा"
दूसरी तरफ, प्रभारी मंत्री संपतिया उइके ने सफाई दी कि अभी कोयले का खनन शुरू नहीं हुआ है, सिर्फ मिट्टी हटाने का काम चल रहा है। राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि विपक्ष बेवजह हंगामा कर रहा है। सरकार आदिवासियों को न केवल मुआवजा देगी, बल्कि उन्हें नौकरी और व्यवसाय के अवसर भी प्रदान करेगी।
हंगामे और नारेबाजी के बीच कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी, लेकिन आदिवासियों के विस्थापन का यह दर्द अब सड़क से सदन तक गूँज रहा है।
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