एमपी के कोचिंग सेंटरों में सुरक्षा राम भरोसे, प्रशासन को हादसे का इंतजार!
Aman Vaishnav | Jun 23, 2026, 13:00 IST
कोचिंग सेंटर में सुरक्षा के इंतजाम
हाल ही में लखनऊ कोचिंग में एक बड़ा हादसा हुआ। इस हादसे में 15 लोगों की मौत हुई। इसके बाद मध्य प्रदेश के कई कोचिंग सेंटरों की अग्नि सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
समझें क्या है पूरा मामला...
- लखनऊ के कोचिंग संस्थान में आग लगने से 15 छात्रों की मौत हुई।
- इसके बाद मध्यप्रदेश के चार बड़े शहरों में फायर सेफ्टी की जांच शुरू हुई।
- भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में कोचिंग संस्थान बिना फायर सेफ्टी के चल रहे हैं।
- लाखों विद्यार्थी रोजाना इन्हीं असुरक्षित इमारतों में पढ़ने जाते हैं।
- नगर निगम हर बार जांच शुरू करता है, लेकिन कुछ दिनों में अभियान ठंडा पड़ जाता है।
लखनऊ हादसे ने खोली MP की आंखें
वहीं हम मध्यप्रदेश की बात करें तो प्रदेश के भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर चारों शहरों में नगर निगम ने जांच की बात कही। लेकिन जमीन पर हालात बेहद चिंताजनक हैं।
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भोपाल: ढाई लाख बच्चे खतरे में
यहां की सबसे बड़ी खामियां
नगर निगम के अपर आयुक्त तन्मय वशिष्ठ शर्मा ने बताया कि मंगलवार 22 जून से विशेष निरीक्षण अभियान शुरू होगा। नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
बता दें कि जुलाई 2024 में जिला प्रशासन ने छह कोचिंग संस्थानों के बेसमेंट में चल रही कक्षाओं को सील किया था। लेकिन बाद में इन्हीं बेसमेंट में लाइब्रेरी और दूसरे काम शुरू हो गए।
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ग्वालियर: सिर्फ तीन के पास फायर एनओसी
जांच शुरू होती है, फिर बंद हो जाती है
वहीं 12 जून के बाद से यह जांच अभियान भी ठप पड़ा हुआ है। पिछले 10 दिनों में कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
शहर के अभिभावक भी आमतौर पर कोचिंग की लोकप्रियता देखकर बच्चों का दाखिला करा देते हैं। इमारत की सुरक्षा जांचना वे जरूरी नहीं समझते।
ग्वालियर नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय ने बताया कि संवेदनशील संस्थानों में जांच जारी रहेगी। उल्लंघन पर कार्रवाई होगी।
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इंदौर में 2,500 कोचिंग, पर जांच सिर्फ सात की
हालात यह हैं कि इनमें से अधिकांश इमारतों में आग से बचाव का कोई इंतजाम ही नहीं है।
पिछले दो महीनों का हिसाब
उन सात कोचिंग को भी पहले सील किया गया, फिर बाद में खोल दिया गया। निगम की यह कार्यशैली ही सबसे बड़ी चिंता का विषय बन गई है।
जबलपुर में हजार कोचिंग, रिकॉर्ड में सिर्फ 280
इनमें इंजीनियरिंग, NEET, IAS जैसी परीक्षाओं की तैयारी होती है। लेकिन इतने सारे कोचिंग में से सिर्फ आठ से दस ने ही फायर एनओसी ली है।
आडिट रिपोर्ट में भी गड़बड़ी
17 दिन बाद भी सिर्फ 200 संस्थानों ने रिपोर्ट जमा की है। उनमें से भी 50 फीसदी रिपोर्ट में बड़ी खामियां मिलीं। किसी के पास बिल्डिंग का नक्शा नहीं था। किसी ने इलेक्ट्रिक वायरिंग का कॉलम खाली छोड़ा।
क्या होनी चाहिए सुरक्षा
कम से कम दो अलग-अलग आपातकालीन निकास द्वार और चौड़े गलियारे होने चाहिए। इमरजेंसी लाइटिंग और एग्जिट साइन बोर्ड भी अनिवार्य हैं।
जांच का यही पैटर्न
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