कांग्रेस का संगठन महामंत्री फॉर्मूला फिर मैदान में, 71 जिलों में नियुक्ति, क्या दोहराएगा पुरानी नाकामी?
News In Short
- कांग्रेस ने जिलों में 71 संगठन महामंत्री नियुक्त किए हैं।
- पदाधिकारियों की ट्रेनिंग 16 मार्च से भोपाल में शुरू होगी।
- संगठन महामंत्री स्थानीय स्तर पर पार्टी को मजबूत करेंगे।
- पिछली गलतियों से सबक लेते हुए नया प्रयोग किया गया है।
News In Detail
मध्यप्रदेश कांग्रेस ने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए 71 जिलों में जिला संगठन महामंत्री नियुक्त करने का नया प्रयोग पूर्ण हो चुका है। सोमवार से इन पदाधिकारियों को भोपाल में ट्रेनिंग दी जाएगी।
दिलचस्प बात यह है कि ऐसा ही प्रयोग कमलनाथ सरकार के समय भी किया गया था, लेकिन स्पष्ट रणनीति और स्थानीय भागीदारी के अभाव में वह मॉडल ज्यादा सफल नहीं हो पाया था।
अब कांग्रेस नेतृत्व ने फिर वही फॉर्मूला अपनाया है, ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या यह प्रयोग इस बार संगठन को मजबूती देगा या फिर पुरानी कहानी दोहराएगा।
जिलों में ‘संगठन महामंत्री’ बनाकर नई रणनीति
प्रदेश कांग्रेस ने संगठन को सक्रिय करने के लिए जिलों में जिला संगठन महामंत्री का पद सृजित किया है।
इन पदाधिकारियों का काम होगा...
- संगठन की गतिविधियों को जिलों में सक्रिय करना।
- जिलाध्यक्ष के साथ तालमेल बनाकर पार्टी को मजबूत करना।
- कांग्रेस की नीति और कार्यक्रमों को कार्यकर्ताओं तक पहुंचाना।
- विधानसभा चुनाव की तैयारियों में स्थानीय टीम को संगठित करना।
- कांग्रेस का मानना है कि इससे जमीनी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने में मदद मिलेगी।
16 मार्च से भोपाल में शुरू होगा ट्रेनिंग अभियान
प्रदेश कांग्रेस ने इन पदाधिकारियों के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम का विस्तृत कैलेंडर तैयार किया है।
मुख्य कार्यक्रम इस प्रकार हैं...
- 16 मार्च (सोमवार): 71 जिलों के संगठन महामंत्रियों की ट्रेनिंग।
- 17 मार्च: वोटर लिस्ट प्रबंधन से जुड़े करीब 250 पदाधिकारियों की ट्रेनिंग।
- 23 मार्च: प्रकोष्ठ, विभाग और मोर्चा संगठनों के अध्यक्षों व जिलाध्यक्षों की ट्रेनिंग।
इन सभी कार्यक्रमों के जरिए कांग्रेस संगठनात्मक ढांचे को सक्रिय करने की कोशिश कर रही है।
कमलनाथ सरकार में भी हुआ था ऐसा प्रयोग
कांग्रेस ने पहले भी कमलनाथ सरकार के दौरान जिला संगठन महामंत्री बनाने की कवायद शुरू की थी। हालांकि, उस समय यह प्रयोग चुनावी साल में जल्दबाजी में किया गया।
कई जिलों में नियुक्तियां सीधे भोपाल से तय कर दी गईं, जिससे स्थानीय स्तर पर असंतोष भी सामने आया। संगठन में स्पष्ट जिम्मेदारियां तय नहीं होने के कारण यह मॉडल ज्यादा प्रभावी साबित नहीं हो पाया।
इस बार जिलाध्यक्षों को दी गई चयन की छूट
इस बार कांग्रेस नेतृत्व ने पिछली गलतियों से सबक लेने का दावा किया है। पार्टी ने जिलाध्यक्षों को जिला संगठन महामंत्री चुनने की पूरी छूट दी। शर्त सिर्फ इतनी रखी गई कि चयन ऐसा व्यक्ति हो-
- जिसे संगठन का अनुभव हो।
- कांग्रेस की नीति और विचारधारा की समझ हो।
- कार्यकर्ताओं के साथ संवाद स्थापित कर सके।
कांग्रेस का मानना है कि स्थानीय चयन से संगठनात्मक तालमेल बेहतर होगा।
ट्रेनिंग के बाद जिलों में भेजे जाएंगे ‘ट्रेंड नेता’
ट्रेनिंग के बाद इन पदाधिकारियों को कांग्रेस की कार्यप्रणाली और संगठनात्मक रणनीति का लिटरेचर दिया जाएगा। इसके बाद इन्हें जिलों में भेजकर कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। उद्देश्य यह है कि एक प्रशिक्षित टीम पूरे जिले में संगठन को सक्रिय करे।
कांग्रेस का दावा- संगठन को मिलेगी मजबूती
प्रदेश कांग्रेस संगठन महामंत्री संजय कामले का कहना है कि पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए यह ट्रेनिंग कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। उनके मुताबिक ट्रेनिंग में पदाधिकारियों को कांग्रेस की नीति, संगठनात्मक संरचना और चुनावी रणनीति से जुड़े गुर सिखाए जाएंगे। इसके बाद वही पदाधिकारी जिलों में कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करेंगे।
बड़ा सवाल: प्रयोग सफल होगा या फिर पुरानी कहानी?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संगठन में नए पद बनाना ही पर्याप्त नहीं होता, उसकी स्पष्ट जिम्मेदारी और लगातार मॉनिटरिंग भी जरूरी होती है।
कांग्रेस पहले भी इस तरह का प्रयोग कर चुकी है, लेकिन परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे। ऐसे में अब देखना होगा कि 71 जिलों में बनाया गया यह नया संगठनात्मक ढांचा वास्तव में कांग्रेस को मजबूत करता है या फिर यह भी कागजी कवायद बनकर रह जाता है।
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