केंद्र की रिपोर्ट : शिकायत सुलझाने में देश में मध्य प्रदेश का 8वां नंबर
Sanjay Sharma | Mar 13, 2026, 20:19 IST
THESOOTR
मध्य प्रदेश में ऑनलाइन शिकायतों के समाधान में प्रशासन बहुत सुस्त है। केंद्र सरकार की एक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य शिकायत निवारण में एमपी 8वें स्थान पर है। वहीं इसका औसत समय 40 दिन है।
BHOPAL. मध्य प्रदेश सरकार के लोकसेवा प्रबंधन के दावों की कलई केंद्र सरकार की 41वीं रिपोर्ट ने खोल दी है। केंद्रीय प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत निवारण विभाग के आंकड़े स्थिति को उजागर करने वाले हैं।
ये आंकड़े आमजन की शिकायतों पर प्रशासनिक व्यवस्था की उदासीनता की ओर भी इशारा कर रहे हैं। देश के प्रमुख 10 राज्यों में मध्यप्रदेश 8वें पायदान पर है। यहां शिकायत का निराकरण औसतन 40 दिन में होता है। जबकि L1, L2 और L3 स्तर पर समाधान के लिए 7 से 30 दिन की समय सीमा तय है। निर्धारित अवधि में जन शिकायतों के समाधान में मध्यप्रदेश तेलंगाना, उत्तरप्रदेश, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों से कहीं पीछे है।
मध्यप्रदेश सरकार आमजन की शिकायतों के समाधान के लिए लगातार नवाचार कर रही है। सीएम हेल्पलाइन, समाधान ऑनलाइन जैसे पोर्टल भी शिकायतों के ऑनलाइन निराकरण के लिए चल रहे हैं। इसके बावजूद सरकारी सिस्टम की सुस्ती इन पर भारी है। नतीजा सामान्य शिकायतों के समाधान के लिए भी आमजन को महीनों इंतजार करना पड़ रहा है।
निर्धारित अवधि में समाधान न होने के कारण पोर्टल पर शिकायतों का अंबार लग रहा है। लोग अपनी शिकायत के निराकरण के लिए L1 से L4 तक जाने मजबूर हैं। प्रशासनिक अधिकारियों की इसी सुस्ती ने राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश के लोकसेवा प्रबंधन और शिकायत निवारण की स्थिति को बदतर कर दिया है।
मध्यप्रदेश में सीएम हेल्पलाइन यानी 181 पर दर्ज शिकायतों के निराकरण की अधिकतम समय सीमा 7 दिन है। जब इस स्तर पर समाधान नहीं हो पाता तब L2 स्तर (जिला अधिकारी) पर शिकायत पहुंचती है। यहां 15 से 30 दिन में निराकरण करना तय है। इस स्तर पर भी समाधान न होने की स्थिति में शिकायत L3 स्तर पर यानी कलेक्टर/जिला अधिकारी के पास भेजी जाती हैं।
यहां भी समाधान के लिए 15 से 30 दिन का समय तय है। व्यवस्था निर्धारित होने के बावजूद आमजन की ऑनलाइन शिकायतों का हल तय अवधि में नहीं हो रहा है। इस वजह से लोग अपनी समस्याओं को लेकर ऑनलाइन शिकायत करने के बाद भी ऑफिसों का चक्कर काटने को विवश हैं।
ये खबर भी पढ़ें...
आलोक नागर और राजेश भट्ट होंगे मप्र के सूचना आयुक्त, नोटिफिकेशन जल्द
केंद्रीय प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत निवारण विभाग की रिपोर्ट के अनुसार शिकायतों के निवारण में 10 प्रमुख राज्यों में एमपी 8वें नंबर पर है। मध्य प्रदेश में 2025 में 1 जनवरी से 31 दिसम्बर के बीच 34413 शिकायतों का समाधान किया गया है। ऑनलाइन शिकायतों के समाधान की औसत समय सीमा 40 दिन रही है।
वहीं इस मामले में तेलंगाना सबसे अव्वल राज्य रहा है। 2025 में इसी अवधि में तेलंगाना प्रशासन ने 9534 शिकायतों का निराकरण केवल 8 दिन के औसत में किया गया है।
ये खबर भी पढ़ें...
मंत्री तुलसी सिलावट पर बोले जीतू पटवारी-वह झूठ बोलते हैं, चार दिन में पेट्रोल पंप हो जाएंगे बंद
दूसरा नंबर केंद्र शासित चंडीगढ़ का है जहां 4268 शिकायतों को 12 दिन के औसत में सुलझाया गया है। तीसरा नंबर अंडमान निकोबार का है जहां 13 दिन की औसत अवधि में 1192 ऑनलाइन शिकायतों का समाधान हुआ है।
पुड्डूचेरी में 1633 शिकायतों को 18 दिन के औसत के साथ निपटाया गया है। देश में सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश इस रैंकिंग में 5वें नंबर पर है।
यहां 19 दिन के औसत के साथ 296444 शिकायतों का समाधान किया गया है। राजस्थान ने 34854 शिकायतों को 27 दिन के औसत से निपटारा कर 6वां पायदान हासिल किया है। जबकि गुजरात में 63049 शिकायतों का समाधान कर 38वां स्थान बनाया है।
ये खबर भी पढ़ें...
टोल कंपनियों की बढ़ सकती है मुश्किल, सुप्रीम कोर्ट ने इंदौर हाईकोर्ट का आदेश किया रद्द
मध्यप्रदेश की प्रशासनिक मशीनरी ऑनलाइन शिकायतों का निर्धारित समय में समाधान करने के मामले में काफी पिछड़ गई है। केंद्र की रिपोर्ट के आंकड़े ऑनलाइन शिकायतों की भरमार को भी उजागर कर रहे हैं।
देश के ऑनलाइन शिकायत लंबित होने के मामले में 10 प्रमुख राज्यों की रैंकिंग में मध्यप्रदेश चौथे नंबर पर है। 21 दिन की अवधि में लंबित शिकायतों की स्थिति को देखें तो सर्वाधिक लंबित शिकायतों वाला राज्य महाराष्ट्र है।
यहां 26677 ऑनलाइन शिकायतें 2025 में निराकृत नहीं की जा सकीं। दूसरा नंबर ओडिशा का है यहां 9959 शिकायतें अटकी हुई हैं। तीसरे पायदान पर बिहार में 9320 शिकायतों को समाधान का इंतजार है। वहीं मध्यप्रदेश में साल 2025 में 8088 शिकायतों का समाधान नहीं किया जा सका है। शेष छह राज्यों की संख्या इससे कहीं कम है।
ये खबर भी पढ़ें...
झीलों की नगरी में लगेगा इन तीन राज्यों के 70 से अधिक युवा विधायकों का जमावड़ा
सेवानिवृत्त सिविल सर्जन डॉ. अरुण सराफ का कहना है सोशल मीडिया के दौर और ऑनलाइन साधनों की उपलब्धता ने शिकायतों की संख्या बढ़ा दी है। वास्तविक शिकायतों की संख्या तो बहुत सीमित होती है।
जागरुकता के चलते लोग सामान्य सी विभागीय या प्रशासनिक चूक या गड़बड़ी पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराते हैं। इसलिए आंकड़ा बढ़ा नजर आता है। वहीं राजस्व या सिविल कोर्ट से जुड़े विवादित मामलों की शिकायतें भी पोर्टल के डेटा को बढ़ाती हैं। जबकि ऐसी शिकायतों पर प्रशासनिक स्तर पर समाधान संभव नहीं होता।
सेवानिवृत्त आईजी सतीश सक्सेना के अनुसार शिकायतों के समाधान की ऑनलाइन व्यवस्था ने लोगों को काफी राहत दी है। अब लोग आसानी से किसी भी मामले की शिकायत शीर्ष अधिकारियों तक पहुंचा सकते हैं।
ऑनलाइन शिकायत समाधान की व्यवस्थाएं लगातार सुधरी हैं। हांलाकि, कुछ दिक्कतें अभी भी हैं। अक्सर अधिकारियों की बेरुखी के कारण समय पर शिकायतों का निराकरण नहीं हो पाता।
कुछ विभागों में तो गैरजिम्मेदार अधिकारी सप्ताह या महीने भर तक शिकायत देखते ही नहीं है। इसे सुधारने अब हर माह जिला स्तर पर समीक्षा भी शुरू हो गई है। इस व्यवस्था को चुस्त और बेहतर बनाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों का चयन और एक्सपर्ट की कमी को दूर करना जरूरी है।
ये आंकड़े आमजन की शिकायतों पर प्रशासनिक व्यवस्था की उदासीनता की ओर भी इशारा कर रहे हैं। देश के प्रमुख 10 राज्यों में मध्यप्रदेश 8वें पायदान पर है। यहां शिकायत का निराकरण औसतन 40 दिन में होता है। जबकि L1, L2 और L3 स्तर पर समाधान के लिए 7 से 30 दिन की समय सीमा तय है। निर्धारित अवधि में जन शिकायतों के समाधान में मध्यप्रदेश तेलंगाना, उत्तरप्रदेश, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों से कहीं पीछे है।
News In Short
- मध्यप्रदेश में ऑनलाइन शिकायतों के समाधान में प्रशासनिक सुस्ती है।
- सीएम हेल्पलाइन पर शिकायतों का समाधान निर्धारित समय में नहीं हो रहा।
- शिकायत समाधान में मध्यप्रदेश 8वें नंबर पर है, औसत समय 40 दिन।
- तेलंगाना ने शिकायतों को 8 दिन में हल करके पहला स्थान हासिल किया।
- मध्यप्रदेश में 8088 शिकायतें 2025 में लंबित रहीं, चौथा स्थान।
News In Detail
निर्धारित अवधि में समाधान न होने के कारण पोर्टल पर शिकायतों का अंबार लग रहा है। लोग अपनी शिकायत के निराकरण के लिए L1 से L4 तक जाने मजबूर हैं। प्रशासनिक अधिकारियों की इसी सुस्ती ने राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश के लोकसेवा प्रबंधन और शिकायत निवारण की स्थिति को बदतर कर दिया है।
प्रशासनिक सुस्ती ने अटकाया समाधान
यहां भी समाधान के लिए 15 से 30 दिन का समय तय है। व्यवस्था निर्धारित होने के बावजूद आमजन की ऑनलाइन शिकायतों का हल तय अवधि में नहीं हो रहा है। इस वजह से लोग अपनी समस्याओं को लेकर ऑनलाइन शिकायत करने के बाद भी ऑफिसों का चक्कर काटने को विवश हैं।
ये खबर भी पढ़ें...
आलोक नागर और राजेश भट्ट होंगे मप्र के सूचना आयुक्त, नोटिफिकेशन जल्द
शिकायत निवारण में मध्यप्रदेश 8वां राज्य
वहीं इस मामले में तेलंगाना सबसे अव्वल राज्य रहा है। 2025 में इसी अवधि में तेलंगाना प्रशासन ने 9534 शिकायतों का निराकरण केवल 8 दिन के औसत में किया गया है।
ये खबर भी पढ़ें...
मंत्री तुलसी सिलावट पर बोले जीतू पटवारी-वह झूठ बोलते हैं, चार दिन में पेट्रोल पंप हो जाएंगे बंद
एमपी से आगे यूपी, राजस्थान और गुजरात
पुड्डूचेरी में 1633 शिकायतों को 18 दिन के औसत के साथ निपटाया गया है। देश में सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश इस रैंकिंग में 5वें नंबर पर है।
यहां 19 दिन के औसत के साथ 296444 शिकायतों का समाधान किया गया है। राजस्थान ने 34854 शिकायतों को 27 दिन के औसत से निपटारा कर 6वां पायदान हासिल किया है। जबकि गुजरात में 63049 शिकायतों का समाधान कर 38वां स्थान बनाया है।
ये खबर भी पढ़ें...
टोल कंपनियों की बढ़ सकती है मुश्किल, सुप्रीम कोर्ट ने इंदौर हाईकोर्ट का आदेश किया रद्द
पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायतों की बाढ़
देश के ऑनलाइन शिकायत लंबित होने के मामले में 10 प्रमुख राज्यों की रैंकिंग में मध्यप्रदेश चौथे नंबर पर है। 21 दिन की अवधि में लंबित शिकायतों की स्थिति को देखें तो सर्वाधिक लंबित शिकायतों वाला राज्य महाराष्ट्र है।
यहां 26677 ऑनलाइन शिकायतें 2025 में निराकृत नहीं की जा सकीं। दूसरा नंबर ओडिशा का है यहां 9959 शिकायतें अटकी हुई हैं। तीसरे पायदान पर बिहार में 9320 शिकायतों को समाधान का इंतजार है। वहीं मध्यप्रदेश में साल 2025 में 8088 शिकायतों का समाधान नहीं किया जा सका है। शेष छह राज्यों की संख्या इससे कहीं कम है।
ये खबर भी पढ़ें...
झीलों की नगरी में लगेगा इन तीन राज्यों के 70 से अधिक युवा विधायकों का जमावड़ा
शिकायतों की अनदेखी से लड़खड़ाई व्यवस्था
जागरुकता के चलते लोग सामान्य सी विभागीय या प्रशासनिक चूक या गड़बड़ी पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराते हैं। इसलिए आंकड़ा बढ़ा नजर आता है। वहीं राजस्व या सिविल कोर्ट से जुड़े विवादित मामलों की शिकायतें भी पोर्टल के डेटा को बढ़ाती हैं। जबकि ऐसी शिकायतों पर प्रशासनिक स्तर पर समाधान संभव नहीं होता।
बार-बार बदलाव, एक्सपर्ट की कमी भी वजह
ऑनलाइन शिकायत समाधान की व्यवस्थाएं लगातार सुधरी हैं। हांलाकि, कुछ दिक्कतें अभी भी हैं। अक्सर अधिकारियों की बेरुखी के कारण समय पर शिकायतों का निराकरण नहीं हो पाता।
कुछ विभागों में तो गैरजिम्मेदार अधिकारी सप्ताह या महीने भर तक शिकायत देखते ही नहीं है। इसे सुधारने अब हर माह जिला स्तर पर समीक्षा भी शुरू हो गई है। इस व्यवस्था को चुस्त और बेहतर बनाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों का चयन और एक्सपर्ट की कमी को दूर करना जरूरी है।
देश में मानसून की बेरुखी से 51% हिस्से में सूखे का संकट: खरीफ फसलों पर मार, बढ़ सकती है महंगाई और आम आदमी की मुश्किलें
By Aman Vaishnav, CHAKRESH
Live |उज्जैन में मस्जिद हटाने पर बवाल
By
राजस्थान नगर निगम चुनाव में BJP का दबदबा
By
गंगरेल बांध का विकराल रूप, खोले गए सभी 14 गेट, महानदी में बढ़ा जलस्तर
By
छत्तीसगढ़ में भारी बारिश का असर: महादेव घाट पुल डूबा, शबरी पर बढ़ा खतरा; कई रास्तों पर आवाजाही बंद
By Umeshwari Baghel
छत्तीसगढ़ के स्कूलों में अक्टूबर से बदलेगा पढ़ाई का तरीका, कठिन विषयों की होंगी लाइव ऑनलाइन क्लास
By Harrison Masih
31 साल का साथ, फिर शादी पर उठे सवाल, ग्वालियर हाईकोर्ट ने दिलाया पत्नी होने का हक
By Sanjay Dhiman