भाजपा के ऑपरेशन सेंध का डर? कांग्रेस उम्मीदवारों पर भरोसे से पहले मांगेगी बॉण्ड!

Ramanand Tiwari | Jun 29, 2026, 08:15 IST
Share
भाजपा के ऑपरेशन सेंध का डर
Photograph: (THESOOTR)

BHOPAL. मध्यप्रदेश निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस नई रणनीति तैयार कर रही है। पार्टी के प्रति निष्ठा साबित करने के लिए उम्मीदवारों को बॉण्ड भी देना पड़ सकता है।

ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...

  • निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस ने नई रणनीति बनाई।
  • बी-फॉर्म के साथ बॉण्ड लेने की तैयारी।
  • दलबदल रोकने पर सबसे ज्यादा जोर।
  • पिछली बार तीन महापौर भाजपा में शामिल हो गए थे।
  • 16 नगर निगमों में वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी।
क्या कांग्रेस को अपने ही नेताओं पर पूरा भरोसा नहीं रह गया है, या फिर भाजपा की संभावित सेंधमारी ने पार्टी को पहले से ज्यादा सतर्क कर दिया है? मध्यप्रदेश निकाय चुनाव में अभी समय है, लेकिन कांग्रेस ने उम्मीदवारों के लिए नया फार्मूला तैयार करना शुरू कर दिया है।

अब केवल जीतने की क्षमता ही नहीं, बल्कि पार्टी के प्रति निष्ठा साबित करने के लिए बांड भी देना पड़ सकता है। यह फैसला राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर रहा है।

टिकट से पहले निष्ठा की कसौटी

मध्यप्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव भले अभी दूर हों, लेकिन कांग्रेस ने चुनावी तैयारियों की दिशा बदल दी है। पार्टी अब टिकट देने से पहले ऐसे उम्मीदवार तलाश रही है जो चुनाव जीतने के बाद भी संगठन के साथ बने रहें। इसी सोच के तहत बी-फॉर्म के साथ बॉण्ड लेने की तैयारी की जा रही है।

पिछले अनुभव से मिला सबक

इस रणनीति के पीछे सबसे बड़ा कारण पिछला राजनीतिक अनुभव माना जा रहा है। पिछली बार कांग्रेस के टिकट पर जीतकर आए जबलपुर, छिंदवाड़ा और मुरैना के महापौर बाद में भाजपा में शामिल हो गए थे। इन घटनाओं ने कांग्रेस संगठन के भीतर भरोसे और राजनीतिक जोखिम दोनों पर नए सवाल खड़े कर दिए।

16 नगर निगमों में वरिष्ठ नेताओं की जिम्मेदारी

अब पार्टी ने 16 नगर निगमों और प्रमुख नगरपालिकाओं में वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है। उनसे ऐसे उम्मीदवारों की तलाश करने को कहा गया है, जिनकी जीतने की संभावना के साथ-साथ संगठन के प्रति प्रतिबद्धता भी मजबूत हो। यानी टिकट का पैमाना अब केवल लोकप्रियता नहीं, बल्कि राजनीतिक स्थिरता भी होगी।

सेमीफाइनल से पहले कोई जोखिम नहीं

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि निकाय चुनाव को विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जाता है। ऐसे में कांग्रेस कोई ऐसा जोखिम नहीं लेना चाहती, जिससे चुनाव जीतने के बाद भी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़े।

क्या बॉण्ड रोक पाएगा दलबदल?

हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कागज पर लिखा बॉण्ड राजनीतिक निष्ठा की गारंटी बन सकता है? भारतीय राजनीति का इतिहास बताता है कि दलबदल केवल नियमों से नहीं रुकता, बल्कि परिस्थितियां, सत्ता का समीकरण और राजनीतिक कूटनीति कई बार पूरे खेल का रुख बदल देती है।

रक्षात्मक रणनीति या राजनीतिक मजबूरी?

कांग्रेस की यह रणनीति जितनी संगठनात्मक दिखती है, उतनी ही रक्षात्मक भी नजर आती है। भाजपा पर विपक्षी दलों के नेताओं में सेंध लगाने के आरोप पहले भी लगते रहे हैं।

ऐसे में कांग्रेस का नया फार्मूला यह संकेत देता है कि पार्टी पहले से ही संभावित राजनीतिक तोड़फोड़ के खतरे को ध्यान में रखकर तैयारी कर रही है।

लेकिन असली परीक्षा चुनाव के बाद होगी। यह देखना दिलचस्प रहेगा कि नेताओं को नियम-कायदों से बांधा जा सकेगा या फिर सत्ता की राजनीति और कूटनीतिक समीकरण एक बार फिर पुराने इतिहास को दोहराएंगे। आखिरकार, राजनीति में कागज से ज्यादा असर अक्सर परिस्थितियों का होता है।

कांग्रेस का पक्ष

प्रदेश कांग्रेस संगठन महामंत्री संजय कामले का कहना है कि किसी भी चुनाव से पहले संगठन को मजबूत बनाने के उद्देश्य से पार्टी अपने नियमों और रणनीतियों की समीक्षा करती है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था पर संगठन स्तर पर मंथन चल रहा है।

इस तरह का फैसला लागू किया जाएगा या नहीं, इस पर अंतिम निर्णय जल्द लिया जाएगा। फिलहाल पार्टी विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श कर रही है, ताकि चुनावी रणनीति को और प्रभावी बनाया जा सके।

ये खबरें भी पढ़ें...

पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल, 65 अफसरों को नई जिम्मेदारी; कई जिलों की कमान बदली

अब बहानों से नहीं चलेगा काम! कलेक्टर-SP की रिपोर्ट पर होगी सीधी निगरानी

फर्जी जाति प्रमाण पत्र विवाद: नीरज आनंद लिखार केस की सुनवाई 29 जून को

सांसद से विधायक बनीं रीति पाठक क्या अब बनेंगी मंत्री? खुद बताया सच

Tags:
  • मध्यप्रदेश
  • कांग्रेस
  • विधानसभा चुनाव
  • महापौर
  • निकाय चुनाव
  • दलबदल
  • भाजपा
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग

By Jitendra Shrivastava

Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग

By Jitendra Shrivastava

Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग

By Jitendra Shrivastava

Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती

By VINAY VERMA

मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती