मध्य प्रदेश में महंगाई भत्ते पर गतिरोध जारी, कर्मचारी-पेंशनर्स का इंतजार बढ़ा
Pawan Modiya | Jul 21, 2026, 22:25 IST
पेंशनर डीए
मध्य प्रदेश में डीए बढ़ोतरी को लेकर गतिरोध बना हुआ है। राज्य के 12 लाख कर्मचारी और पेंशनर्स केंद्र के बराबर भत्ते का इंतजार कर रहे हैं। जानिए क्यों अटका है मामला और आगे क्या होगा।
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्य प्रदेश में डीए बढ़ोतरी को लेकर गतिरोध बना हुआ है।
- राज्य के कर्मचारियों को अभी 58 प्रतिशत डीए मिल रहा है।
- केंद्र सरकार जनवरी से ही 60 प्रतिशत डीए दे रही है।
- राज्य के IAS, IPS, IFS अफसरों को यह बढ़ोतरी मिल चुकी है।
- लेकिन 12 लाख नियमित कर्मचारी और पेंशनर्स अब भी इंतजार में हैं।
अफसरों को मिला फायदा, कर्मचारी वंचित
इन अफसरों को जनवरी से ही 60 प्रतिशत की दर से भत्ता मिल रहा है। लेकिन राज्य सरकार के नियमित कर्मचारियों को अब भी 58 प्रतिशत पर ही रोका गया है। इसी असमानता को लेकर कर्मचारी संगठनों में नाराजगी बढ़ रही है। उनका कहना है कि जब अफसरों को बढ़ोतरी मिल सकती है तो आम कर्मचारियों को क्यों नहीं।
पांच महीने से अटकी है मांग
संघ ने साफ मांग रखी है कि डीए को 58 से बढ़ाकर 60 प्रतिशत किया जाए। यह मांग बीते करीब पांच महीने से लंबित बताई जा रही है। अब जुलाई का महीना भी बीतने को है, फिर भी राज्य सरकार की तरफ से कोई ठोस जवाब नहीं आया है। कर्मचारियों में इंतजार को लेकर थकान और निराशा दोनों बढ़ रही हैं।
कितने लोगों पर पड़ रहा है असर
यह पेंशनर्स महंगाई राहत यानी डीआर (Dearness Relief) पर निर्भर रहते हैं। डीए और डीआर दोनों की दर एक साथ तय होती है। ऐसे में जब तक डीए नहीं बढ़ता, तब तक पेंशनर्स की राहत राशि भी नहीं बढ़ पाती। यही वजह है कि यह मुद्दा सिर्फ कर्मचारियों तक सीमित नहीं, बल्कि लाखों पेंशनर्स परिवारों को भी प्रभावित कर रहा है।
केंद्र और राज्य में क्यों बना अंतर
मध्य प्रदेश ने भी अपने बजट और संसाधनों को ध्यान में रखते हुए फैसला टाला है। राज्य सरकार का कहना रहा है कि आने वाले समय में डीए दर को केंद्र के बराबर लाया जाएगा। लेकिन इसकी कोई तय समय सीमा अब तक सामने नहीं आई है।
नया नियम भी आया सामने
यह बदलाव राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की एक पुरानी जटिलता को खत्म करने के लिए किया गया। हालांकि इस आदेश में यह भी साफ किया गया है कि कोई भी राज्य केंद्र से ज्यादा दर पर डीआर नहीं दे सकेगा। जानकारों का मानना है कि इससे भविष्य में फैसले जल्दी हो सकेंगे। लेकिन मौजूदा गतिरोध पर इसका सीधा असर अभी नहीं दिख रहा।
आगे क्या हो सकता है
कर्मचारी संगठनों की उम्मीद है कि यह बढ़ोतरी जल्द से जल्द हो। फिलहाल सभी कर्मचारी और पेंशनर्स सरकार के अगले आदेश का इंतजार कर रहे हैं। जब तक यह इंतजार खत्म नहीं होता, तब तक असंतोष भी बना रहेगा।
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