आरोपी मोहित गोगिया के बयान की वायरल कॉपी।
1 करोड़ के शराब घूसकांड के आरोप में घिरे डिप्टी सीएम के OSD दीपम रायचूरा पद से हटाए गए, जांच के आदेश
Amresh Kushwaha | Oct 09, 2026, 15:21 IST
इसमें सफेद शर्ट में डिप्टी सीएम और ब्लैक कपड़े में OSD हैं।
मध्यप्रदेश के डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने अपने ओएसडी दीपम रायचूरा को पद से हटा दिया है। रायचूरा पर शराब के ठेके दिलाने के बदले एक करोड़ रुपए की रिश्वत लेने का आरोप लगा है। इन आरोपों के सामने आने के बाद डिप्टी सीएम देवड़ा ने यह कदम उठाया है। साथ ही, वाणिज्यिक कर विभाग को जल्द जांच करने को कहा गया है।
जानें डिप्टी सीएम ने क्या कहा-
ओएसडी दीपम रायचूरा पर क्या आरोप लगे हैं
कथित बयान में साल 2024-25 के शराब ठेकों का जिक्र है। भोपाल के टीटी नगर इलाके की दो दुकानों की बात कही गई है। इन दुकानों को दिलाने के बदले कुल एक करोड़ रुपए लेने का आरोप है। इसमें से 50 लाख रुपए नकद और 50 लाख रुपए बैंक खाते में बताए गए हैं।
बयान में फर्जी बैंक एफडीआर का भी दावा है। एफडीआर यानी फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद (Fixed Deposit Receipt)। शराब ठेके के लिए बैंक गारंटी जरूरी होती है। आरोप है कि फर्जी एफडीआर मंजूर कराने में मदद की गई।
इसके अलावा बिना लाइसेंस शराब दिलाने में सहयोग का दावा भी किया गया है। बयान में बिचौलियों की भूमिका बताई गई है। एक मोबाइल नंबर पर बातचीत का दावा भी है।
पर यहां एक बात साफ रहनी चाहिए। ये सब कथित बयान में किए गए दावे हैं। इनकी आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। कॉल या चैट का कोई सत्यापित रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं कराया गया है।
दीपम रायचूरा का पक्ष
उन्होंने कहा कि भोपाल में सहायक आबकारी आयुक्त रहते हुए गोगिया से लाइसेंसधारी के तौर पर मुलाकात हुई होगी। इसके अलावा उन्होंने गोगिया से किसी संबंध की बात नहीं मानी। रिश्वत लेने के सभी आरोप उन्होंने झूठे बताए।
कांग्रेस ने क्या मांग की
पटवारी ने विशेष जांच दल यानी एसआईटी (Special Investigation Team) बनाने की मांग की। यह दल हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में हो। उन्होंने छह मांगें रखी हैं।
इनमें शराब ठेकों, बैंक एफडीआर और पैसों के कथित लेन-देन की जांच शामिल है। 50-50 लाख रुपए के भुगतान और संबंधित बैंक खातों की जांच भी मांगी गई है। जांच के लिए समय-सीमा तय करने की मांग भी है।
पटवारी ने यह भी कहा कि कार्रवाई की जानकारी जनता को मिलनी चाहिए। दोषी मिलने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग भी उन्होंने रखी है। यह राजनीतिक दल की मांग है, सरकार का फैसला नहीं।
मुख्यमंत्री जी, सवाल सीधा है, मध्य प्रदेश में आबकारी जैसे तमाम सरकारी ठेके नियमों से मिल रहे हैं या @BJP4MP सत्ता के प्रभाव और कथित लेन-देन के सहारे?@DrMohanYadav51 https://t.co/Pf3Q5ca1SX
— Jitendra (Jitu) Patwari (@jitupatwari) October 9, 2026
अब आगे क्या होगा
कुछ सवाल अभी खुले हैं। क्या गोगिया के कथित बयान की सच्चाई जांची जाएगी? क्या कोई एजेंसी अलग से जांच करेगी? क्या सरकार एसआईटी की मांग पर विचार करेगी?
मान लीजिए जांच में आरोप गलत निकलें। तब रायचूरा को राहत मिल सकती है। अगर आरोपों में दम मिला, तो आगे कानूनी कार्रवाई हो सकती है। दोनों स्थितियां फिलहाल सिर्फ संभावना हैं।
फिलहाल इतना तय है कि उप मुख्यमंत्री ने जांच से पहले ही ओएसडी को हटाया है। इससे यह संदेश गया है कि सरकार जांच में दखल नहीं चाहती। असली परीक्षा जांच की रिपोर्ट के बाद होगी।
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