ई-रिक्शा की मनमानी पर लगाम लगाने की तैयारी में सरकार, तय होगा रूट, कटेंगे चालान
Sanjay Dhiman | Jul 11, 2026, 17:21 IST
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मध्यप्रदेश में ई-रिक्शा की मनमानी रोकने के लिए इंदौर मॉडल लागू होगा। कलेक्टर को रूट और संख्या तय करने का अधिकार मिलेगा। जबलपुर हाईकोर्ट में भी मामला विचाराधीन है।
मध्यप्रदेश में ई-रिक्शा बिना परमिट के मनमाने तरीके से चल रहे हैं। सरकार अब इंदौर मॉडल पूरे प्रदेश में लागू करने जा रही है। परिवहन विभाग ने नई नीति का ड्राफ्ट शासन को भेज दिया है। इसके तहत जिला कलेक्टर को रूट और संख्या तय करने का अधिकार मिलेगा। जबलपुर हाईकोर्ट में भी इस मामले पर सरकार को नोटिस जारी हुआ है।
केंद्रीय मोटरयान अधिनियम के तहत ई-रिक्शा चलाने के लिए परमिट जरूरी नहीं है। इसी वजह से इनके लिए कोई तय रूट भी नहीं बनाया जा सका। नतीजा यह हुआ कि शहरों में ई-रिक्शा चौराहों और व्यस्त सड़कों पर बेतरतीब तरीके से चलने लगे। कई जगहों पर इनकी वजह से यातायात भी बाधित हो रहा है।
इंदौर में सबसे पहले रूट तय करने की कोशिश हुई थी। लेकिन इसका असर जमीन पर ठीक से नहीं दिखा। कई ई-रिक्शा चालकों ने तय व्यवस्था का पालन नहीं किया। यही देखकर अब सरकार पूरे प्रदेश के लिए ठोस नीति बना रही है।
नई नीति लागू होने के बाद हर जिले के कलेक्टर के पास साफ अधिकार होंगे। वे तय करेंगे कि किस इलाके में कितने ई-रिक्शा चलेंगे। साथ ही यह भी तय होगा कि कौन-सा ई-रिक्शा किस रूट पर चलेगा। परिवहन विभाग के अनुसार इससे संचालन में अनुशासन आएगा।
नीति में परमिट जैसी शर्तें भी जोड़ी जाएंगी। इससे बिना निगरानी के चल रहे ई-रिक्शा की संख्या पर भी नियंत्रण होगा। जरूरत पड़ने पर इंदौर की तरह कलर कोडिंग व्यवस्था भी अपनाई जा सकती है। इससे अलग-अलग रूट के ई-रिक्शा की पहचान आसान होगी।
जिस मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू करने की योजना है, उसी इंदौर में इसका असर अब भी सीमित है। बड़ी संख्या में चालकों ने अब तक रूट आधारित पंजीयन नहीं कराया है। इसकी वजह से कई चालक तय नियमों का पालन नहीं कर रहे। जब यातायात पुलिस कार्रवाई करती है तो चालकों और पुलिसकर्मियों के बीच अक्सर विवाद हो जाता है।
परिवहन विभाग का मानना है कि नई नीति के बाद स्थिति बदल जाएगी। जिला प्रशासन के पास स्पष्ट अधिकार होने से लागू करना आसान होगा। विभाग को उम्मीद है कि ड्राफ्ट को सरकार से जल्द मंजूरी मिल जाएगी।
इंदौर में पहले भी एक योजना बनाई गई थी। इसके तहत शहर को चार सेक्टरों में बांटा गया। हर सेक्टर के लिए अलग रंग तय किया गया है। हर जोन का ई-रिक्शा उसकी छत के रंग से पहचाना जाएगा। अगले 10 दिनों में इसकी आवंटन प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
जबलपुर हाईकोर्ट में ई-रिक्शा संचालन को लेकर एक याचिका दायर हुई है। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। इसके बाद परिवहन विभाग ने नीति बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी। अधिकारियों के अनुसार अब यह मामला प्राथमिकता पर है।
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बिना परमिट की छूट बनी वजह
इंदौर में सबसे पहले रूट तय करने की कोशिश हुई थी। लेकिन इसका असर जमीन पर ठीक से नहीं दिखा। कई ई-रिक्शा चालकों ने तय व्यवस्था का पालन नहीं किया। यही देखकर अब सरकार पूरे प्रदेश के लिए ठोस नीति बना रही है।
कलेक्टर को मिलेंगे बड़े अधिकार
नीति में परमिट जैसी शर्तें भी जोड़ी जाएंगी। इससे बिना निगरानी के चल रहे ई-रिक्शा की संख्या पर भी नियंत्रण होगा। जरूरत पड़ने पर इंदौर की तरह कलर कोडिंग व्यवस्था भी अपनाई जा सकती है। इससे अलग-अलग रूट के ई-रिक्शा की पहचान आसान होगी।
इंदौर में ही असर सीमित
परिवहन विभाग का मानना है कि नई नीति के बाद स्थिति बदल जाएगी। जिला प्रशासन के पास स्पष्ट अधिकार होने से लागू करना आसान होगा। विभाग को उम्मीद है कि ड्राफ्ट को सरकार से जल्द मंजूरी मिल जाएगी।
चार सेक्टर, अलग-अलग रंग
हाईकोर्ट में भी मामला
FAQ
- ई-रिक्शा का इंदौर मॉडल क्या है?
इंदौर मॉडल में ई-रिक्शा के लिए रूट, संख्या और रंग तय किए जाते हैं। इसे कलेक्टर की निगरानी में लागू किया जाता है। अब इसे पूरे मध्यप्रदेश में लागू करने की योजना है। - ई-रिक्शा को परमिट की जरूरत क्यों नहीं होती?
केंद्रीय मोटरयान अधिनियम के तहत ई-रिक्शा परमिट से मुक्त हैं। इसी वजह से इनके लिए तय रूट नहीं बनाए जा सके। नई नीति में परमिट जैसी शर्तें जोड़ी जाएंगी। - नई नीति से क्या बदलाव आएगा?
जिला कलेक्टर को रूट और संख्या तय करने का अधिकार मिलेगा। कलर कोडिंग व्यवस्था भी लागू हो सकती है। इससे ई-रिक्शा संचालन अधिक व्यवस्थित होगा।
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