एमपी आर्थिक सर्वे 2025-26 : आमदनी में उछाल, रिकॉर्ड निवेश और 2047 का विजन

एमपी आर्थिक सर्वे 2025-26 के अनुसार प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय 1 लाख 69 हजार रुपए पहुंच गई है। 11.14% की GSDP ग्रोथ के साथ मध्यप्रदेश देश का उभरता हुआ आर्थिक पावरहाउस बन गया है।

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Ramanand Tiwari
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MP Economic Survey 2025-26

Photograph: (the sootr)

BHOPAL.मध्यप्रदेश सरकार ने विधानसभा में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश कर दिया है। रिपोर्ट बताती है कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था सिर्फ आंकड़ों में नहीं, जमीन पर भी रफ्तार पकड़ रही है। सबसे बड़ी राहत आम आदमी के लिए है। प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 1 लाख 69 हजार 050 रुपए (अग्रिम अनुमान 2025-26) हो गई है, जो 2023-24 के 1 लाख 41 हजार 756 रुपए और 2024-25 के 1 लाख 52 हजार 615 रुपए से काफी अधिक है। दो वर्षों में लगभग 19.25% की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। सरकार इसे “विकसित मध्यप्रदेश 2047” के रोडमैप की मजबूत नींव मान रही है।

आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ें

  • प्रति व्यक्ति आय: 1 लाख 69 हजार 050 रुपए
  • GSDP: 16,69,750 करोड़ रुपए (11.14% वृद्धि), 
  • स्थिर मूल्यों पर वृद्धि दर: 8.04%, 
  • दो वर्षों में कुल GSDP वृद्धि: 22.56%, 
  • पूंजीगत व्यय (Capex): 82,513 करोड़ रुपए (46% वृद्धि), 
  • कृषि योगदान: 43.09%, 9.29 लाख संभावित रोजगार, 11.71 लाख करोड़ रुपए निवेश प्रस्ताव प्रगति पर, 
  • पर्यटन वृद्धि: 94%,
  • GSDP और विकास दर: लगातार दो साल दो अंकों की ग्रोथ 

2025-26 में प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) ₹16.69 लाख करोड़ आंका गया है। यह पिछले साल से 11.14% ज्यादा है। सरकार बनने के बाद पहले वर्ष 10% से अधिक और दूसरे वर्ष 11% से अधिक वृद्धि दर्ज की गई। लगातार दो साल दो अंकों की वृद्धि राज्य की आर्थिक मजबूती दिखाती है।

रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय: अधोसंरचना पर बड़ा दांव

पूंजीगत व्यय 2023-24 के 56 हजार 539 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹82,513 करोड़ होने का अनुमान है। यानी 46% की वृद्धि। यह पैसा सड़कों, उद्योग, बिजली, सिंचाई और कनेक्टिविटी पर खर्च हो रहा है। तुलना करें तो 2025-26 में कर्नाटक का पूंजीगत व्यय ₹71,336 करोड़ रहा, जबकि एमपी इससे आगे है। यह संकेत है कि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित विकास मॉडल पर काम कर रही है। 

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कृषि: अर्थव्यवस्था की रीढ़

राज्य की अर्थव्यवस्था में कृषि की हिस्सेदारी 43.09% है। भावांतर भुगतान योजना किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा देती है। उर्वरक वितरण का डिजिटलीकरण, GPS ट्रैकिंग और आधार लिंक्ड सिस्टम से पारदर्शिता बढ़ी है। पशुपालन में 10.81% वृद्धि हुई है। डेयरी उत्पादों में भी उछाल दर्ज किया गया—दूध 13%, पनीर 18%, घी 7% और मिल्क केक 17% बढ़ा।

दलहन और उत्पादन: मिले-जुले संकेत

एक ओर रिपोर्ट में लगभग 225 लाख टन दाल उत्पादन और 6% वृद्धि का दावा है, वहीं कुछ आंकड़े दलहन उत्पादन में गिरावट की ओर भी इशारा करते हैं। चना, उड़द और मूंग के उत्पादन व रकबे में कमी दर्ज की गई है। यह कृषि क्षेत्र के लिए सुधार की जरूरत का संकेत है।

महिला सशक्तिकरण: ‘लखपति दीदी’ से आर्थिक भागीदारी

महिला स्व-सहायता समूह और ‘लखपति दीदी’ जैसी पहल से ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं। भोपाल में महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन और ओडीओपी प्रदर्शनी से महिला उद्यमियों को राष्ट्रीय पहचान मिली। मातृ मृत्यु दर को 142 से घटाकर 20 से नीचे लाने का लक्ष्य रखा गया है। 

युवा, स्किल और रोजगार: “उद्योग एवं रोजगार वर्ष” पर फोकस

स्वामी विवेकानंद युवा शक्ति मिशन और कौशल विकास कार्यक्रमों से युवाओं को उद्योगों के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 14 संस्थानों के साथ करार हुए हैं। 9.29 लाख रोजगार अवसरों का अनुमान है। सेवा क्षेत्र की 15.8% वृद्धि और 37% हिस्सेदारी नए जॉब सेक्टर तैयार कर रही है।

उद्योग और निवेश: ग्राउंडिंग पर जोर उद्योग क्षेत्र में 9.93% वृद्धि दर्ज हुई है। GIS-2025 से ₹30 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले, जिनमें से ₹8.5 लाख करोड़ जमीन पर उतर चुके हैं। ₹11.71 लाख करोड़ के अन्य प्रस्तावों पर काम जारी है।

MSME को ₹2,900 करोड़ सहायता दी गई। 1,723 स्टार्टअप सक्रिय हैं। CSR व्यय लगभग ₹600 करोड़ रहा। 73,669 नई नौकरियां सृजित हुईं। 

पर्यटन: धार्मिक और एडवेंचर हब के रूप में पहचान

प्रदेश में 94% पर्यटन वृद्धि दर्ज की गई।

  • उज्जैन: 42% से अधिक वृद्धि
  • इंदौर: 30% घरेलू पर्यटक बढ़े
  • भोपाल: विदेशी पर्यटक 6% बढ़े
  • वॉटर स्पोर्ट्स: 26% वृद्धि

हालांकि ग्वालियर और खजुराहो में गिरावट दर्ज की गई है।

पोषण और सामाजिक संकेतक: सुधार की जरूरत

आर्थिक प्रगति के बीच कुपोषण से जुड़े आंकड़े चिंता पैदा करते हैं। गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को मिलने वाले लाभ में हल्की गिरावट आई है।यह दर्शाता है कि आर्थिक वृद्धि के साथ सामाजिक क्षेत्र पर और अधिक फोकस जरूरी है।

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मजबूत रफ्तार, लेकिन संतुलन जरूरी

मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था 2025-26 में तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही है। आय, निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन और उद्योग में सकारात्मक संकेत हैं। लेकिन कृषि विविधीकरण, दलहन उत्पादन और पोषण जैसे क्षेत्रों में सुधार की जरूरत बनी हुई है।

अगर निवेश, कृषि सुधार, महिला सशक्तिकरण और युवा रोजगार को संतुलित ढंग से आगे बढ़ाया गया, तो “विकसित मध्यप्रदेश 2047” का लक्ष्य केवल नारा नहीं, हकीकत बन सकता है।

स्वामी विवेकानंद मध्यप्रदेश सरकार विधानसभा अर्थव्यवस्था लखपति दीदी
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