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5 पॉइंट्स में समझें क्या है पूरा मामला...
करीब एक लाख 66 हजार किसान पीएम किसान सम्मान निधि योजना से बाहर हो गए हैं।
मध्य प्रदेश के 74 हजार 271 किसानों की किस्त ई-केवाईसी (e-KYC) न होने की वजह से रुकी हैं।
योजना में किसानों को मिलने वाली कुल राशि में 93 करोड़ 77 लाख रुपए की कमी आई है।
दूसरी ओर, राज्य सरकार का दावा है कि कोई भी पात्र किसान इस योजना से बाहर नहीं हुआ है।
ई-केवाईसी प्रक्रिया पूर्ण होने पर रुकी हुई राशि दोबारा मिल सकती है।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से मध्य प्रदेश के एक लाख 66 हजार किसान बाहर हो गए हैं। यह योजना 2019 में शुरू हुई थी। इसके अंतर्गत किसानों को सालाना 6000 रुपए की राशि तीन किस्त में दी जाती है।
मध्य प्रदेश सरकार ने इसके साथ ही राज्य स्तर पर (मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत) अतिरिक्त 6 हजार रुपए देने की शुरुआत भी की थी। इससे किसानों को कुल 12 हजार रुपए सालाना मिलते थे।
हालांकि, अब राज्यसभा में पेश आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के एक लाख 66 हजार से ज्यादा किसान इस योजना से बाहर हो गए हैं। इससे राज्य को मिलने वाली केंद्रीय आर्थिक सहायता पर भी असर पड़ा है।
कांग्रेस का आरोप और राज्य सरकार का पक्ष
कांग्रेस ने इसे किसान विरोधी कदम बताया है। कांग्रेस का आरोप है कि धीरे-धीरे पात्र किसानों को भी इस योजना से बाहर किया जा रहा है। साथ ही, उन्होंने कहा कि जो राशि दी जा रही है, वह बहुत कम है। दूसरी ओर, विधानसभा/राज्यसभा में इस मुद्दे पर कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने जवाब दिया कि योजना से किसी भी पात्र किसान को बाहर नहीं किया गया है।
लाभार्थियों की संख्या में कमी और ई-केवाईसी की समस्या
मध्यप्रदेश में लाभार्थियों की संख्या में कमी का एक बड़ा कारण ई-केवाईसी (e-KYC) सत्यापन की प्रक्रिया है। आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 74 हजार 271 किसानों की किश्तें इसीलिए रुकी हुई हैं क्योंकि उनकी ई-केवाईसी प्रक्रिया अधूरी है। यदि ये किसान अपनी सत्यापन प्रक्रिया पूरी कर लेते हैं, तो उनकी रुकी हुई किस्त फिर शुरू हो सकती हैं।
93 करोड़ 77 लाख रुपए की कमी
किसानों की संख्या घटने से राज्य को मिलने वाली कुल राशि में भी गिरावट आई है। साल 2022 में एक हजार 730 करोड़ 12 लाख प्रति किश्त वितरित किए गए थे। वहीं, साल 2025 में यह राशि घटकर एक हजार 636 करोड़ 35 लाख रुपए रह गई है। इससे प्रत्येक किश्त में93 करोड़ 77 हजार रुपए की कमी दर्ज की गई है। बजट की यह राशि घटने से राज्य के किसानों को दी जाने वाली प्रत्यक्ष मदद प्रभावित हो रही है।
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