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5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
- मध्य प्रदेश सरकार विदिशा और गुना को नगर निगम बनाने की तैयारी कर रही है।
- इस कदम से राज्य में नगर निगमों की संख्या 16 से बढ़कर 18 हो जाएगी।
- शिवपुरी का प्रस्ताव आबादी कम होने के कारण स्थगित है।
- नगर निगम बनने से इन शहरों में शहरी विकास को गति मिलेगी।
- प्रस्ताव के अनुसार, नगर निगम के लिए शहर की आबादी 3 लाख से अधिक होनी चाहिए।
मध्य प्रदेश में नगर निगमों की संख्या बढ़ेगी
मध्य प्रदेश सरकार एक महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। विदिशा और गुना को नगर निगम का दर्जा मिलने वाला है। इससे प्रदेश में नगर निगमों की संख्या 16 से बढ़कर 18 हो जाएगी। यह बदलाव शहरी विकास को गति देने में मदद करेगा। इस फैसले से इन दोनों शहरों को अधिक संसाधन और स्वायत्तता मिलने की उम्मीद है।
दूसरी ओर, शिवपुरी का मामला अभी भी अटका हुआ है। कारण यह है कि शिवपुरी की आबादी अभी तीन लाख से कम है। यह राज्य सरकार के मानकों के मुताबिक नगर निगम बनाने के लिए जरूरी है।
मध्य प्रदेश के नगर निगम बनने के मानदंड
मध्यप्रदेश में किसी भी शहर को नगर निगम बनाने के लिए सख्त मानदंड तय हैं। सबसे पहले, उस शहर की स्थायी आबादी कम से कम 3 लाख होनी चाहिए। इसके बाद, शहर का वार्षिक राजस्व 50 करोड़ रुपए होना चाहिए।
इसके अलावा, उस शहर का क्षेत्रफल कम से कम 50 वर्ग किलोमीटर होना चाहिए। साथ ही जल निकासी, सड़कें, स्ट्रीट लाइटिंग और कचरा प्रबंधन जैसी बुनियादी सुविधाएं भी पुख्ता होनी चाहिए।
विदिशा और गुना के नगर निगम बनने की शुरुआत
विदिशा और गुना को नगर निगम बनाने की मांग वर्षों से चल रही थी। 2023 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस मुद्दे पर विधानसभा में घोषणा की थी। वहीं, 2024 में कांग्रेस नेता कमलनाथ ने भी इसे अपने चुनावी प्रचार का हिस्सा बनाया था। हालांकि, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी गुना के प्रस्ताव को मूर्त रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
विदिशा के मामले में, शिवराज सरकार ने 2022 में ही इसे मंजूरी दे दी थी, लेकिन नोटिफिकेशन में देरी हो रही थी। 2024 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी इस प्रस्ताव को फिर से हरी झंडी दे दी थी। दोनों शहरों की आबादी अब तीन लाख से अधिक है और राजस्व लक्ष्य भी पूरे हो चुके हैं। इससे यह प्रस्ताव अब अंतिम चरण में है।
आगे की राह और शहरी विकास की दिशा
विदिशा और गुना को नगर निगम का दर्जा मिलने से इन शहरों में शहरी विकास में भी तेजी आएगी। इन शहरों के नागरिकों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी। साथ ही नगर निगम बनने से यहां के प्रशासन को अधिक स्वायत्तता भी मिलेगी।
इस कदम के बाद, सरकार शिवपुरी जैसे शहरों के बारे में भी विचार कर सकती है, जहां आबादी बढ़ने के बाद नगर निगम बनाने की संभावना हो।
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