मध्य प्रदेश पेंशन योजना: दो लाख अफसर निर्णय के इंतजार में, सरकार की कमेटी 7 महीने से साइलेंट मोड पर

Ramanand Tiwari | Nov 28, 2025, 23:05 IST
Photograph: (THESOOTR)
मध्य प्रदेश के दो लाख से अधिक कर्मचारी पेंशन विकल्प पर उलझे हुए हैं। केंद्र सरकार ने 30 नवंबर तक यूपीएस (UPS) चुनने की डेडलाइन तय की है, लेकिन मप्र की कमेटी ने अब तक कोई फैसला नहीं लिया। कर्मचारी ओपीएस (Old Pension Scheme) की बहाली की मांग कर रहे हैं।

BHOPAL. मध्यप्रदेश के आईएएस, आईपीएस, आईएफएस और अन्य दो लाख से ज्यादा अधिकारी-कर्मचारी इन दिनों पेंशन की उलझी पहेली में फंसे हैं। केंद्र की यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) और नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) के बीच चयन का समय आ चुका है। जबकि मप्र सरकार की ओर से अब तक कोई साफ संकेत नहीं आया है।



मप्र की कमेटी ‘स्टैंडबाय’ पर

केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों को यूपीएस अपनाने की आखिरी तारीख 30 नवंबर तय कर दी। इधर मप्र में यूपीएस लागू करने के लिए अप्रैल 2025 में बनी आईएएस अफसरों की कमेटी की हालत ये है। 7 महीने में सिर्फ एक बैठक… वो भी औपचारिक।



ये खबर भी पढ़ें...



ई-अटेंडेंस प्रणाली: डेटा लीक और साइबर फ्रॉड का आरोप, 1 दिसंबर को राज्य सरकार देगी जवाब



यूपीएस को कर्मचारियों का ठंडा रिस्पॉन्स

वित्त मंत्रालय ने संसद में बताया था कि 23 लाख पात्र सरकारी कर्मचारियों में से सिर्फ 1.37% यानी 31,555 ने ही यूपीएस चुनी। यह आंकड़ा बताता है कि स्कीम नई है, लेकिन भरोसा बेहद कमजोर। यही कारण है कि मप्र सरकार भी आगे बढ़ने से पहले सोच रही है।



कमेटी भी समझ गई- रिस्क लेना ठीक नहीं

29 अप्रैल को बनी कमेटी की कमान अपर मुख्य सचिव वन अशोक बर्णवाल के पास है। सूत्रों का कहना है। केंद्र में खराब रिस्पॉन्स देखकर मप्र में भी हवा बदल गई है। सरकार किसी अघोषित असंतोष को जगाने के मूड में नहीं दिख रही।



ये खबर भी पढ़ें...



सिवनी हवाला कांड : SDOP पूजा पांडे की जमानत सुनवाई टली, 1 दिसंबर के लिए हुई लिस्ट



कर्मचारी बोले- हम ओपीएस चाहते हैं, यूपीएस नहीं

मप्र के 4.5 लाख एनपीएस कर्मचारी लगातार एक ही मांग कर रहे हैं। ओल्ड पेंशन स्कीम वापस करो। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने भी दो टूक कहा कि ओपीएस ही हमारे लिए सुरक्षित है। यूपीएस को लेकर प्रदेश का कर्मचारी सहज नहीं है।



पुराना हवाला: ओपीएस क्यों अभी भी नंबर-1 चॉइस?

2004 से पहले देश में ओपीएस लागू थी। इसमें वेतन से कोई कटौती नहीं अंतिम सैलरी के 50% तक तय पेंशन डीआर का फायदा और पूरी जिम्मेदारी सरकारी खजाने की यही वजह है कि कर्मचारियों के लिए ओपीएस अब भी सबसे भरोसेमंद विकल्प बना हुआ है।



ये खबर भी पढ़ें...



इंदौर RTO में वरिष्ठ पत्रकार हेमंत शर्मा के साथ मारपीट पर आरटीओ कर्मचारी, दलालों पर FIR



पेंशन योजना: तीन स्कीमें, तीन रास्ते…

NPS (नेशनल पेंशन स्कीम)

बाजार से जुड़ा निवेश कर्मचारी 10%, सरकार 14% योगदान 60% रकम रिटायरमेंट पर निकाल सकते हैं। 40% पेंशन में फिक्स



UPS (यूनिफाइड पेंशन स्कीम)

अंतिम वेतन का 50% पेंशन, कर्मचारी 10%, सरकार 18.5% योगदान (कॉर्पस राशि सहित) कोई मार्केट रिस्क नहीं डीआर का लाभ



OPS (ओल्ड पेंशन स्कीम)

फिक्स पेंशन 50% अंतिम वेतन कोई कटौती नहीं भुगतान सरकारी ट्रेजरी से



ये खबर भी पढ़ें...



इंदौर के इंडेक्स मेडिकल कॉलेज भी पहुंची थी ED, जारी हुई सूचना, सुरेश भदौरिया बोलते रहे झूठ



सरकार की मुश्किल

केंद्र के कमजोर रिस्पॉन्स ने मप्र में UPS को लेकर फाइल आगे बढ़ने से रोक दी है। कमेटी की निष्क्रियता साफ संकेत है। प्रदेश फिलहाल यूपीएस पर निर्णय टाल रहा है।



क्या मप्र ओपीएस पर बड़ा फैसला लेगा?

केंद्र की डेडलाइन अब बस सामने है। मप्र में हजारों कर्मचारी इंतजार कर रहे हैं। क्या सरकार ओपीएस बहाली की ओर बढ़ेगी? या फिर UPS पर कमेटी कभी रिपोर्ट दे भी पाएगी? फैसले की घड़ी नजदीक है… और कर्मचारियों की निगाहें सिर्फ एक फाइल पर अटकी हैं।





Tags:
  • मध्यप्रदेश
  • ओल्ड पेंशन स्कीम
  • पेंशन योजना
  • नेशनल पेंशन स्कीम
  • यूनिफाइड पेंशन स्कीम