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Photograph: (thesootr)
मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में लागू ई-अटेंडेंस प्रणाली को लेकर जारी विवाद अब और गंभीर हो गया है। शुक्रवार, 28 नवंबर को हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान मामला सीधे डाटा लीक और साइबर फ्रॉड के आरोपों तक पहुंच गया।
याचिकाकर्ता शिक्षकों ने अपना संशोधित आवेदन पेश करते हुए दावा किया कि हमारे शिक्षक एप एक निजी एजेंसी द्वारा संचालित किया जा रहा है, और इसी कारण ऐप डाउनलोड करने के बाद कई शिक्षकों के बैंक खातों से रकम गायब होने जैसी घटनाएं सामने आई हैं।
एप से डाटा लीक, खातों से पैसे निकले: शिक्षकों का दावा
अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने शिक्षकों की ओर से कोर्ट को बताया कि ऐप के इंस्टॉल होते ही मोबाइल डाटा, बैंक-लिंक्ड नंबर और निजी जानकारी तक पहुंच बनाई जाती है। उन्होंने कहा कि यह डेटा प्रोटेक्शन एक्ट–2023 का सीधा उल्लंघन है।
याचिकाकर्ताओं ने सुनवाई में यह भी खुलासा किया कि लोक शिक्षण संचालनालय ने खुद सभी जिलों के डीईओ को पत्र भेजकर सावधानी बरतने को कहा है, जिससे डेटा-सुरक्षा को लेकर आशंकाएं और मजबूत हो जाती हैं।
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ऐप सुरक्षित, नेटवर्क की कोई समस्या नहीं: राज्य सरकार
पिछली सुनवाई में मध्य प्रदेश सरकार ने कोर्ट को बताया था कि हमारे शिक्षक एप पूरी तरह सुरक्षित है। डेटा सेफ्टी सर्टिफिकेट प्राप्त है और मोबाइल नेटवर्क की कोई कमी नहीं है, क्योंकि उसी स्कूल में अधिकांश शिक्षक बिना किसी परेशानी के उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं। लेकिन आज की सुनवाई में उठे नए आरोपों ने मामले को और पेचीदा बना दिया है।
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डाटा लीक के आरोप सरकार को देना होगा जवाब
जस्टिस मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि साइबर फ्रॉड और डेटा लीक संबंधी सभी आरोपों पर विस्तृत और स्पष्ट जवाब 1 दिसंबर से पहले पेश किया जाए।
शिक्षकों की बढ़ी उम्मीदें, सरकार पर बढ़ा दबाव
शिक्षकों की ओर से लगातार नेटवर्क, तकनीकी खराबी और डेटा सुरक्षा के मुद्दे उठाए जा रहे हैं। वहीं सरकार पुराने दो फैसलों W.P. 7816/2014 (राजेंद्र कुमार शिवहरे बनाम मप्र राज्य) और W.P. 8206/2017 (राज्य अध्यापक संघ बनाम मप्र राज्य) का हवाला देकर अपने पक्ष को मजबूत बताती आ रही है। अब कोर्ट में सरकार को यह सिद्ध करना होगा कि यह ऐप पूरी तरह से सुरक्षित है।
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1 दिसंबर को होगी मामले की सुनवाई
लेकिन अब बैंक खातों से रकम गायब होने जैसे नए आरोप सामने आने के बाद इस विवाद का दायरा और बड़ा हो चुका है।अब सभी निगाहें 1 दिसंबर की सुनवाई पर टिकी हैं, जिसमें यह तय हो सकता है कि ई-अटेंडेंस व्यवस्था जारी रहेगी या इसमें बड़े बदलाव की जरूरत पड़ेगी।
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