हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने चीफ जस्टिस को लिखा पत्र, जजों के रोस्टर और मामलों की लिस्टिंग सुधारने की मांग
Neel Tiwari | Nov 28, 2025, 19:04 IST
Photograph: (THESOOTR)
एमपी हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने चीफ जस्टिस को पत्र लिखा। इसमें जजों के रोस्टर और मामलों की लिस्टिंग में सुधार की मांग की है। बार का कहना है कि पुराने सिस्टम को हटाने से वकीलों को सुनवाई तिथि तय करने में कठिनाई हो रही है।
JABALPUR. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने 26 नवंबर को चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा को एक विस्तृत पत्र भेजा है। इसमें मामलों की लिस्टिंग (मुकदमों को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने) व्यवस्था और जजों के रोस्टर (जजों को केसों के आवंटन) को लेकर कई गंभीर शिकायतें की गई हैं।
बार एसोसिएशन का कहना है कि पुराने स्लिप-ड्रॉप बॉक्स सिस्टम को हटाए जाने के बाद वकीलों को सुनवाई की तिथि तय करने में असुविधा हो रही है। पहले वकील अपनी कोर्ट-स्लिप के माध्यम से संभावित सुनवाई तिथि मांग सकते थे, लेकिन अब यह सुविधा नहीं है।
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जिन मुकदमों की सुनवाई के लिए पहले तिथि तय थी वे कई बार फिर सूचीबद्ध नहीं हो रहे। यानी ‘पहले से तय’ सुनवाई भी लिस्ट नहीं हो रही, जबकि पुनः लिस्टिंग का कोई स्पष्ट नियम नहीं है।
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विशेष रूप से जमानत, रिट-पिटिशन यानी CrPC धारा 482 या अन्य आपात याचिकाएं अब कोर्ट में आसानी से सूचीबद्ध नहीं हो रही। इन याचिकाओं के लिए बार ने अलग पीठ गठित करने की मांग की है।
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बार एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि “राहत-उन्मुख” (relief-oriented) जजों को महत्वपूर्ण मामलों के रोस्टर से वंचित किया जा रहा है, और बार-बार उनकी असाइनमेंट बदल दी जाती है । जिससे न्यायपालिका की निष्पक्षता और भरोसे पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इसके अलावा, उन रिट आदेशों की प्रतियों की उपलब्धता को लेकर भी समस्या बताई गई है, जिनमें अदालत ने अन्य मामलों के हवाले दिए हों। वकीलों के लिए उन्हें जुटाना कठिन है।
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बार एसोसिएशन के अनुसार, ये व्यवस्थागत गड़बड़ियां है। लिस्टिंग हो, रोस्टर हो या पुनः लिस्टिंग की अस्पष्ट नीति, यह न केवल वकीलों और मुकदमों के हित में बाधा पैदा कर रही हैं, बल्कि न्यायपालिका की प्रक्रिया को गड़बड़ा रही हैं।
बार ने चेताया है कि 1 दिसंबर 2025 को एक आम बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें इन समस्याओं और संभावित निर्णायों पर चर्चा होगी। यदि प्रशासन द्वारा मुद्दों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो वकील-समूहों के लिए यह कदम आगे की कार्रवाई की नींव बन सकता है।
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बार में मामलों की पुनः लिस्टिंग के लिए स्पष्ट नीति बनाने की मांग की है ताकि जिन मुकदमों की सुनवाई तय थी, उन्हें अनिश्चितकाल के लिए लंबित न रहना पड़े। नई याचिकाओं (जमानत, रिट, आपात पीठ आदि) को अलग से सूचीबद्ध करने के लिए विशेष पीठ का गठन ताकि उन्हें सामान्य केसों के साथ न मिलाया जाए। रोस्टर आवंटन में भी पारदर्शिता की मांग की जा रही है। ताकि वकील, वादियों और अदालत के सिस्टम के बीच भरोसा बना रहे।
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एमपी हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की मांग के अनुसार यदि लिस्टिंग-रोस्टर जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं पारदर्शी और सुव्यवस्थित नहीं रहेंगी तो न सिर्फ वकीलों, बल्कि उन आम नागरिकों का भी फायदा होगा जो न्याय के लिए अदालतों का सहारा लेते हैं।
बार की मांगें न्यायिक सुधार की दिशा में एक सकारात्मक संकेत हैं। अब प्रतीक्षा है कि कोर्ट प्रशासन विशेष रूप से चीफ जस्टिस इस पत्र को गंभीरता से लें और आवश्यक सुधार कर न्याय व्यवस्था को भरोसेमंद बनाये रखें।
बार एसोसिएशन का कहना है कि पुराने स्लिप-ड्रॉप बॉक्स सिस्टम को हटाए जाने के बाद वकीलों को सुनवाई की तिथि तय करने में असुविधा हो रही है। पहले वकील अपनी कोर्ट-स्लिप के माध्यम से संभावित सुनवाई तिथि मांग सकते थे, लेकिन अब यह सुविधा नहीं है।
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मामलों के दोबारा लिस्ट होने में आ रही समस्या
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नई याचिकाएं लिस्ट होना भी हुआ मुश्किल
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जजों के बार-बार बदल रहे रोस्टर
इसके अलावा, उन रिट आदेशों की प्रतियों की उपलब्धता को लेकर भी समस्या बताई गई है, जिनमें अदालत ने अन्य मामलों के हवाले दिए हों। वकीलों के लिए उन्हें जुटाना कठिन है।
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लिस्टिंग और रोस्टर प्रक्रिया में सुधार की मांग
बार ने चेताया है कि 1 दिसंबर 2025 को एक आम बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें इन समस्याओं और संभावित निर्णायों पर चर्चा होगी। यदि प्रशासन द्वारा मुद्दों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो वकील-समूहों के लिए यह कदम आगे की कार्रवाई की नींव बन सकता है।
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बार की मांगें न्यायिक सुधार की दिशा में एक सकारात्मक संकेत हैं। अब प्रतीक्षा है कि कोर्ट प्रशासन विशेष रूप से चीफ जस्टिस इस पत्र को गंभीरता से लें और आवश्यक सुधार कर न्याय व्यवस्था को भरोसेमंद बनाये रखें।
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