सीएम मोहन यादव ने एमएसएमई इकाइयों के खाते में 450 करोड़ रुपए की सहायता राशि ट्रांसफर की।
MP में MSME के लिए बनेगी नई सरकारी कंपनी: जमीन से लेकर इंसेंटिव तक की मिलेगी सुविधाएं, जानें सरकार का प्लान
Arohi Raj | Sootr Creatives | Nov 01, 2026, 13:55 IST
मध्य प्रदेश में उद्यमियों को अब जमीन के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। मोहन सरकार MSME के लिए अलग कंपनी बनाएगी।
मध्य प्रदेश सरकार छोटे और मझोले कारोबारियों के लिए अलग कंपनी बनाने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसी जरूरत को ध्यान में रखकर बड़ी घोषणाएं की है। इस नई कंपनी के जरिए छोटे कारोबारियों को फैक्ट्री लगाने के लिए जमीन और दूसरी जरूरी सुविधाएं मिल सकेंगी। यह कंपनी MPIDC की तर्ज पर काम करेगी। इसके तहत जमीन, इंफ्रास्ट्रक्चर और इंसेंटिव से जुड़े काम संभाले जाएंगे।
इसका मकसद छोटे कारोबारियों को फैक्ट्री लगाने के लिए जल्द और आसानी से जमीन उपलब्ध कराना है। साथ ही जमीन मिलने की प्रक्रिया में ट्रांसपेरेंसी लाना भी है। दरअसल, अभी प्रदेश में बड़े उद्योगों के लिए ऐसी व्यवस्था है। लेकिन छोटे कारोबारियों को जमीन और दूसरी सुविधाएं मिलने में परेशानी होती है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सूक्ष्म लघु मध्यम उद्यम (MSME – Micro, Small and Medium Enterprises) प्रदेश की आर्थिक रीढ़ हैं। इसी क्षेत्र के लिए सरकार एक नई एमएसएमई कंपनी बनाने जा रही है।
प्रस्तावित MSME Company पूरी तरह राज्य शासन के स्वामित्व वाली सरकारी कंपनी होगी। वह क्षेत्र के इंसेंटिव और विकास के लिए ही काम करेगी। बड़े उद्योगों की तरह इसके लिए भी अलग संस्था और अलग टीम बनाने की बात है।
मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम, यानी MPIDC, अब तक बड़े उद्योगों के लिए काम कर रहा है। खबरों के मुताबिक, इस घोषणा के तहत 500 करोड़ रुपए से अधिक निवेश की सीमा तय की गई है। इसकी सीमा 250 करोड़ रुपए बताई गई है। घोषणा में कहा गया कि छोटे उद्यमियों के लिए अब तक अलग संस्था की कमी रही है।
मध्य प्रदेश में छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तीन बड़ी घोषणाएं की हैं। इनमें औद्योगिक पार्क बनाने पर अनुदान, नई MSME कंपनी का गठन और सभी जिलों में जमीन उपलब्ध कराने की बात शामिल है।
कंपनी का मुख्य काम औद्योगिक जमीन की पहचान, अधिग्रहण, आवंटन और प्रबंधन करना होगा। इसका मकसद उद्यमियों को जमीन के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से बचाना है। इसके अलावा कहा गया है कि इससे जमीन और उद्योग, दोनों की संख्या दोगुनी होगी।
इसके साथ ही कंपनी छोटे भूखंडों और फ्लैटेड फैक्ट्री वाले औद्योगिक क्षेत्र विकसित करेगी। यहां प्लग-एंड-प्ले सुविधा मिलेगी। यानी उद्यमी बिना ज्यादा इंतजार किए अपना काम शुरू कर सकेंगे। इन क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी और जल निकासी जैसी सुविधाएं भी तय समय पर विकसित की जाएंगी।
इसका फोकस बड़े निवेश पर है। नई कंपनी का फोकस छोटे और मझोले उद्यमों पर होगा। इसकी अपनी टीम होगी और इसे फैसले लेने के अधिकार मिलेंगे। जिला उद्योग केंद्र के साथ मिलकर भी काम होगा।
पहले MSME से जुड़े मामले सीधे सरकार के अधीन थे। इसी वजह से हर फैसले के लिए फाइलें बार-बार घूमती थीं। मुख्यमंत्री के मुताबिक, नई कंपनी इस चक्कर को खत्म करेगी।
खबरों के मुताबिक, घोषणा में कहा गया कि तमिलनाडु के बाद मध्य प्रदेश ऐसा करने वाला दूसरा राज्य होगा। तमिलनाडु में राज्य की SIPCOT मध्यम और बड़े उद्योगों के लिए औद्योगिक पार्क विकसित करती है। इसलिए दोनों मॉडल की तुलना अलग से जांचना जरूरी है।
बातचीत में कहा गया कि कंपनी की कमाई सरकार के पास जाने के बजाय कंपनी के पास ही रहेगी। इससे जवाबदेही, ऑडिट और राज्य के राजस्व पर सवाल उठते हैं।
सरकारी कंपनी की कमाई का हिसाब आमतौर पर ऑडिट और विधानसभा में जवाबदेही से जुड़ा रहता है। इस नई कंपनी में यह ढांचा कैसा होगा, इस पर स्पष्ट विवरण अभी सामने नहीं है।
मध्यप्रदेश में MSME सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। भोपाल में आयोजित समृद्ध MSME-विकसित मध्य प्रदेश कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने 900 यूनिट को 360 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए। यह राशि एक क्लिक के जरिए भेजी गई।
हाल ही में कैबिनेट ने जबलपुर-भोपाल-इंदौर औद्योगिक कॉरिडोर के लिए नई कंपनी बनाने की मंजूरी दी है। यह पूरी तरह राज्य सरकार के स्वामित्व वाली कंपनी होगी। इसके लिए 100 करोड़ रुपए की शुरुआती पूंजी तय की गई है। इसे उद्योग विभाग के माध्यम से बनाया जाएगा।
हालांकि, यह कंपनी घोषित होने वाली नई MSME कंपनी से अलग है। इसलिए दोनों कंपनियों को एक ही नहीं समझना चाहिए। सरकार ने 2047 तक प्रदेश में एक करोड़ MSME इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री ने अगले ढाई साल में MSME सेक्टर को 4,500 करोड़ रुपए देने की बात भी कही है।
FAQs
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सूक्ष्म लघु मध्यम उद्यम (MSME – Micro, Small and Medium Enterprises) प्रदेश की आर्थिक रीढ़ हैं। इसी क्षेत्र के लिए सरकार एक नई एमएसएमई कंपनी बनाने जा रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के द्वारा मुख्यमंत्री निवास, भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में 900+ MSME इकाइयों को ₹450 करोड़+ की राशि का अंतरण #Bhopal https://t.co/b93hNpUBn1
— Chief Minister, MP (@CMMadhyaPradesh) November 1, 2026
एमएसएमई कंपनी क्या है
मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम, यानी MPIDC, अब तक बड़े उद्योगों के लिए काम कर रहा है। खबरों के मुताबिक, इस घोषणा के तहत 500 करोड़ रुपए से अधिक निवेश की सीमा तय की गई है। इसकी सीमा 250 करोड़ रुपए बताई गई है। घोषणा में कहा गया कि छोटे उद्यमियों के लिए अब तक अलग संस्था की कमी रही है।
MSME कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने की ये घोषणाएं
- अब निजी निवेशक भी औद्योगिक पार्क बना सकेंगे। इसके लिए सरकार हर हेक्टेयर पर 50 लाख रुपए अनुदान देगी।
- सीएम मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में एक नई MSME कंपनी गठित की जाएगी ।
- साथ ही सीएम मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश के सभी जिलों में 2 माह में MSME के लिए भूमि उपलब्ध होगी, अभी लगभग 22 जिलों में भूमि खत्म हो गई है।
भूमि और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस
छोटे भूखंड और प्लग-एंड-प्ले सुविधा
MPIDC से कैसे अलग होगी कंपनी
पहले MSME से जुड़े मामले सीधे सरकार के अधीन थे। इसी वजह से हर फैसले के लिए फाइलें बार-बार घूमती थीं। मुख्यमंत्री के मुताबिक, नई कंपनी इस चक्कर को खत्म करेगी।
तमिलनाडु के दावे की जांच
कमाई और कंट्रोल का सवाल
राज्य के राजस्व पर सवाल
360 करोड़ रुपए एक क्लिक में ट्रांसफर
हाल ही में कैबिनेट ने जबलपुर-भोपाल-इंदौर औद्योगिक कॉरिडोर के लिए नई कंपनी बनाने की मंजूरी दी है। यह पूरी तरह राज्य सरकार के स्वामित्व वाली कंपनी होगी। इसके लिए 100 करोड़ रुपए की शुरुआती पूंजी तय की गई है। इसे उद्योग विभाग के माध्यम से बनाया जाएगा।
हालांकि, यह कंपनी घोषित होने वाली नई MSME कंपनी से अलग है। इसलिए दोनों कंपनियों को एक ही नहीं समझना चाहिए। सरकार ने 2047 तक प्रदेश में एक करोड़ MSME इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री ने अगले ढाई साल में MSME सेक्टर को 4,500 करोड़ रुपए देने की बात भी कही है।
FAQs
- मध्य प्रदेश में एमएसएमई कंपनी का निर्माण कब हो सकता है?
इस कंपनी के गठन की समय-सीमा और कैबिनेट मंजूरी की अधिकृत पुष्टि अभी नहीं मिली है। घोषणा में इसकी कोई तारीख नहीं बताई गई है। - MPIDC और MSME कंपनी में मुख्य अंतर क्या है?
MPIDC वर्तमान में बड़े निवेश के लिए भूमि और अधोसंरचना का काम करता है। नई कंपनी सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए अलग संस्था होगी, जिसकी अपनी टीम और निर्णय लेने के अधिकार होंगे। - सूक्ष्म लघु मध्यम उद्यमों को इस नई कंपनी से क्या लाभ होगा?
उद्यमियों को औद्योगिक जमीन प्राप्त करने में आसानी होगी और प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी, जिससे उनकी लागत में कमी और नए उद्योगों एवं रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
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